अटल ने निष्कलंक और निष्कपट राजनीति को बढ़ाया आगे, उनके लिए राष्ट्रहित रहा सर्वोपरि: CM योगी
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने भारतीय राजनीति में निष्कलंक और निष्कपट राजनीति को आगे बढ़ाया. उनके लिए राजनीति केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, मूल्यों और आदर्शों का मार्ग थी.
यही वजह है कि किसी भी दल या किसी भी पक्ष के लोग रहे हों, सभी ने अटल जी की मुक्त कंठ से प्रशंसा की. अटल जी के लिए 'राष्ट्र प्रथम' केवल विचार नहीं, बल्कि उनके सार्वजनिक जीवन का आधार था. देशहित की बात आने पर उन्होंने दल के हित को भी तिलांजलि देकर राष्ट्र के पक्ष में निर्णय लिए.
प्रदेशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पं.अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा एवं साहित्य संध्या को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने अटल जी की स्मृतियों को नमन करते हुए प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों पर आधारित पुस्तिका का विमोचन भी किया. उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में दुनिया ने उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति देखी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्त कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अटल जी के सपने को साकार किया गया.
जान की भीख मांग रहा था
लखनऊ में अटल जी के नाम पर प्रदेश की पहली मेडिकल युनिवर्सिटी बनी और बलरामपुर में अब युद्धस्तर पर मेडिकल कॉलेज बन रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कांग्रेस के अभद्र और अशिष्ट आचरण तथा सेना पर उंगली उठाने पर जब सवाल खड़े होते हैं तो उनकी राष्ट्रनिष्ठा पर भी संदेह होने लगता है. पूरी दुनिया देख रही थी जब पाकिस्तान अमेरिका में गिड़गिड़ा रहा था और दुम दबाकर जान की भीख मांग रहा था.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज दल और गठबंधन बनते-टूटते हैं. क्षणिक स्वार्थ की सिद्धि न होने पर लोग पूरे ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने पर उतारू हो जाते हैं, लेकिन श्रद्धेय अटल जी ने एक बार नहीं, अनेक बार राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का उदाहरण प्रस्तुत किया.
पूरे अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लिया
उन्होंने कहा कि 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान बांग्लादेश में पाकिस्तान के अमानवीय अत्याचार के खिलाफ पूरे देश की एकता दिखनी चाहिए थी. उस समय अटल बिहारी वाजपेयी आगे आए और उन्होंने बांग्लादेश मुक्ति के पूरे अभियान का समर्थन किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौरान भी अटल ने दल से अधिक महत्वपूर्ण देश को माना. उन्होंने भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय किया और देश में लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले आंदोलन में किसी दल की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका थी तो वह भारतीय जनसंघ की थी. जनसंघ ने उस पूरे अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लिया. जब भी देश को आवश्यकता पड़ी, अटल जी ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा.
स्रोत: आईएएनएस
आरजी कर में युवक की मौत पर बवाल, परिजनों का लापरवाही का आरोप
कोलकाता, 16 अगस्त (आईएएनएस)। रविवार को परिवार वालों ने आरोप लगाया कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में इलाज में लापरवाही के कारण एक युवक की मौत हो गई।
उन्होंने अस्पताल परिसर से सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी से घटना की जांच करने और राज्य के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं देने के तरीके को बदलने की अपील की।
अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक, मृतक युवक का नाम प्रीतम रॉय है। उसे शनिवार शाम करीब 5:30 बजे सड़क दुर्घटना में गंभीर चोटों के साथ ट्रॉमा केयर सेंटर लाया गया था।
हावड़ा जिले के राजचंद्रपुर के रहने वाले प्रीतम के पैरों की दोनों हड्डियां और कमर की बाईं हड्डी टूट गई थी।
आरजी कर अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक, बहुत ज्यादा खून बहने के कारण मरीज को हेमोरेजिक शॉक (खून की भारी कमी से सदमा) लगा, जिसके बाद शनिवार रात करीब 10:30 बजे उसकी मौत हो गई।
मृतक के परिवार के सदस्य शौविक सरकार ने रविवार को सीधे तौर पर आरजी कर अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया।
अस्पताल के सुपरिटेंडेंट सप्तर्षि चटर्जी ने कहा कि शिकायत की जांच की जा रही है।
इससे पहले इस साल मार्च में, दमदम के रहने वाले अरूप बनर्जी की आरजी कर ट्रॉमा केयर बिल्डिंग की लिफ्ट में फंसने से मौत हो गई थी। उस समय प्रशासन पर निगरानी में लापरवाही के आरोप लगे थे।
9 अगस्त, 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में एक महिला डॉक्टर के साथ रेप और हत्या की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।
समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों ने न्याय की मांग करते हुए सड़कों पर उतरकर आंदोलन, विरोध प्रदर्शन, रात भर जागकर विरोध किया, भूख हड़ताल कीं और कई जुलूस निकाले।
उस समय अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए थे।
बाद में, प्रशासन के साथ एक बैठक में, आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों ने बुनियादी ढांचे के विकास, निगरानी आदि जैसे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक में आश्वासन भी दिया गया।
--आईएएनएस
एमएस/
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