सरकारी बैंक की 4 स्पेशल FD स्कीम, मिल रहा 6% से ज्यादा ब्याज, यहां जानें डिटेल
स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) देश के प्रमुख पब्लिक सेक्टर बैंकों में से एक है। यह ग्राहकों को विभिन्न प्रकार की सेवाएं ऑफर करता है। जिसमें फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भी शामिल है। वर्तमान में एसबीआई ग्राहकों को चार स्पेशल एफडी स्कीम ऑफर कर रहा है, जिसमें 3 करोड रुपए से काम का निवेश किया जा सकता है। सभी बैंक समय-समय पर फिक्स डिपाजिट के ब्याज दरों में बदलाव करते रहते हैं। इसलिए निवेश से पहले बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या नजदीकी शाखा विजिट करने की सलाह दी जाती है।
स्पेशल एफडी स्कीम की लिस्ट में अमृत वृष्टि स्कीम, एसबीआई Patrons स्कीम, एसबीआई ग्रीन रूपी टर्म डिपॉजिट और एसबीआई वी-केयर डिपॉजिट स्कीम शामिल है। एसबीआई एसबीआई ग्रीन डिपॉजिट स्कीम और अमृत वृष्टि स्कीम में सामान्य नागरिक भी निवेश कर सकते हैं। एसबीआई पैट्रन्स स्कीम में केवल सुपर सीनियर सिटीजंस (80 साल या इससे अधिक) और एसबीआई वी केयर स्कीम में वरिष्ठ नागरिकों (60 साल या इससे अधिक आयुवर्ग) के लोग निवेश कर सकते हैं।
स्पेशल एफडी स्कीम के बारे में जानें
- एसबीआई पैट्रन्स स्कीम में 7 दिन लेकर 10 साल तक का निवेश ग्राहक कर सकते हैं। वहीं न्यूनतम निवेश की सीमा 1,000 रुपये होती है। सीनियर सिटीजन की तुलना में इस पर 0.10% अतिरिक्त ब्याज मिलता है।
- एसबीआई वी केयर एफडी स्कीम की अवधि 5 से लेकर 10 साल है। इस पर सीनियर सिटीजन को 50 बीपीएस अतिरिक्त प्रीमियम का लाभ मिलता है यानी ब्याज दर 7.10% है।
- एसबीआई अमृत वृष्टि स्कीम के तहत 444 दिन के टेन्योर पर 6.45% ब्याज बैंक ऑफर कर रहा है। आखरी बार ब्याज दरों में दिसंबर 2025 में बदलाव किया गया था। पहले इंटरेस्ट रेट 6.60% था। निवेश की न्यूनतम सीमा 1,000 रुपये और अधिकतम 3 करोड़ रुपये से कम है। वरिष्ठ नागरिकों को 0.50% अतिरिक्त ब्याज की सुविधा भी बैंक ऑफर कर रहा है।
- एसबीआई ग्रीन डिपॉजिट स्कीम में तीन टेन्योर ऑप्शंस मिलते हैं- 1111 दिन, 1777 दिन और 2222 दिन। जिसमें से किसी का भी चुनाव ग्राहक कर सकते हैं। इसपर 1 मई 2026 को जारी कार्ड रेट के बराबर ब्याज दर बैंक ऑफर कर रहा है।
टेन्योर वाइज ब्याज दरें जानें
- 7 से लेकर 45 दिन- 3.05%
- 46 से लेकर 179 दिन- 4.90%
- 180 दिन से लेकर 210 दिन- 5.65%
- 211 दिन से लेकर 1 साल से कम- 5.90%
- 1 साल से लेकर 2 साल से कम- 6.25%
- 2 साल से लेकर 3 साल से कम- 6.40%
- 3 साल से लेकर 5 साल से कम- 6.30%
- 5 साल से लेकर 10 साल तक- 6.05%
बिहार में सम्राट सरकार के दावों की खुली पोल, स्वास्थ्य सेवाएं तोड़ रहीं दम
Bihar Health Crisis: बिहार में स्वास्थ्य महकमे को लेकर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आ रही तस्वीरें व्यवस्था की पूरी पोल खोल देती हैं. सरकार की तरफ से अस्पतालों के कायाकल्प और हर मरीज को बेहतर इलाज देने के दावे तो बहुत होते हैं, मगर असलियत इससे कोसों दूर नजर आती है. मुजफ्फरपुर से लेकर बगहा और मुंगेर तक सरकारी अस्पतालों में मरीजों की लाचारी यह बताने के लिए काफी है कि यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था आज भी किस कदर बदहाल है. आम जनता को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं और लोग अपनों की जान बचाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं.
दावों के बीच मुजफ्फरपुर में बेबसी की तस्वीर
मंच से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और रेफरल सिस्टम पर सख्ती बरतने की बातें कही जाती हैं. यह भी कहा जाता है कि अस्पतालों में दर्जनों तरह के आपरेशन होंगे और सामुदायिक केंद्रों को आधुनिक बनाया जाएगा. लेकिन इन तमाम बातों के बीच मुजफ्फरपुर के मशहूर एसकेएमसीएच अस्पताल से जो तस्वीर सामने आई, उसने हर किसी को हिलाकर रख दिया. यहां एक महिला का पैर टूट गया था और वह दर्द से कराह रही थी. अस्पताल पहुंचने के बाद जब काफी देर तक स्ट्रेचर नहीं मिला, तो लाचार पति को अपनी घायल पत्नी को पीठ पर लादना पड़ा. वह अपनी पत्नी को कंधे पर बैठाकर डाक्टरों के कमरों के चक्कर काटता रहा. जिस अस्पताल को जिले का सबसे बड़ा सहारा माना जाता है, वहां इलाज की पहली सीढ़ी यानी स्ट्रेचर तक का न होना बेहद शर्मनाक है.
रास्ते में थमी गर्भवती महिला और बच्चे की सांसें
अस्पतालों की बदहाली का आलम केवल मुजफ्फरपुर तक सीमित नहीं है. बगहा के रामनगर इलाके से आई घटना दिल दहला देने वाली है. यहां प्रसव पीड़ा से तड़प रही सत्ताईस साल की सुमन देवी को अस्पताल ले जाने के लिए समय पर एंबुलेंस तक नहीं मिल सकी. बदहवास परिजन मरीज को ट्रैक्टर पर लादकर अस्पताल ले जाने लगे. लेकिन रास्ते में हरहा नदी पार करते समय ट्रैक्टर पानी और कीचड़ के बीच फंस गया. घंटों की जद्दोजहद के बाद भी समय पर इलाज नहीं मिल सका और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उस मां और उसके गर्भ में पल रहे मासूम बच्चे की मौत हो गई. यह घटना दिखाती है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी बुनियादी स्वास्थ्य और परिवहन तंत्र किस हाल में है.
मुंगेर के मॉडल अस्पताल में आक्सीजन की कमी का आरोप
लापरवाही की इंतहा मुंगेर के तैंतीस करोड़ रुपये की लागत से बने माडल सदर अस्पताल में भी देखने को मिली. यहां डेंगू से पीड़ित एक मरीज की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों का आरोप है कि उसे खाली आक्सीजन सिलेंडर लगा दिया गया. आक्सीजन के अभाव में तड़प-तड़प कर मरीज ने दम तोड़ दिया. आरोप है कि मरीज की हालत बिगड़ते ही अस्पताल का मेडिकल स्टाफ वहां से हट गया. जब विधानसभा की शून्यकाल समिति ने इस अस्पताल का औचक निरीक्षण किया तो वहां केवल एक डाक्टर ड्यूटी पर मिला. बत्तीस स्वीकृत पदों में से चौदह पद खाली पड़े थे और पूरे माडल अस्पताल की सर्जिकल सेवाएं केवल एक सर्जन के भरोसे चल रही थीं.
बजट के बावजूद धरातल पर संकट
बिहार में स्वास्थ्य विभाग का बजट तेईस हजार पांच सौ अस्सी करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, लेकिन आबादी के अनुपात में सुविधाएं अब भी बेहद कम हैं. आंकड़ों के अनुसार प्रति दस हजार की आबादी पर लगभग दो बेड ही उपलब्ध हैं. दस लाख की आबादी के हिसाब से यह आंकड़ा करीब दो सौ पांच बेड का बैठता है. इसके अलावा डाक्टरों, नर्सों और जरूरी तकनीकी स्टाफ की भारी कमी है. जब तक अस्पतालों में स्ट्रेचर, आक्सीजन और समय पर एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाएं हर नागरिक के लिए सुनिश्चित नहीं की जातीं, तब तक आंकड़ों और दावों की चमक से मरीजों की परेशानी कम नहीं होने वाली है.
यह भी पढ़ें: बिहार में शराबबंदी के बाद भी महिलाओं पर नहीं थम रहे अपराध, नई रिपोर्ट में दावा
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Mp Breaking News
News Nation









