सिंहस्थ वॉलंटियर्स भर्ती के नाम पर धार में की जा रही ठगी! 150 रूपए लेकर भरवाए जा रहे फॉर्म, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट
धार जिले में सिंहस्थ वॉलंटियर्स की भर्ती के नाम पर लोगों से पैसे लेने का मामला सामने आया है। शिकायतों के मुताबिक कुछ ऑनलाइन सेवा केंद्रों पर 100 से 150 रुपए लेकर लोगों के आवेदन तैयार किए जा रहे हैं। इसके बाद इन फॉर्म को होमगार्ड कार्यालय में जमा कराने के लिए भेजा जा रहा है। प्रशासन ने इसे लेकर लोगों को सावधान किया है।
सोशल मीडिया पर सिंहस्थ वॉलंटियर्स भर्ती से जुड़ी कुछ पोस्ट और मैसेज तेजी से शेयर किए जा रहे हैं। इन्हीं जानकारियों के आधार पर कई लोग ऑनलाइन केंद्रों पर पहुंचकर फॉर्म भरवा रहे हैं। लोगों से आवेदन तैयार करने के नाम पर फीस भी ली जा रही है। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सिंहस्थ वॉलंटियर्स के लिए कोई सरकारी भर्ती प्रक्रिया नहीं चल रही है।
सिंहस्थ वॉलंटियर्स भर्ती पर प्रशासन का संदेश
दरअसल डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट होमगार्ड धार आर.पी. मीना ने बताया कि सिंहस्थ वॉलंटियर्स के लिए पुलिस भर्ती जैसी कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। उन्होंने साफ किया कि डायरेक्टर जनरल होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा आपदा प्रबंधन मुख्यालय, जबलपुर या मध्यप्रदेश शासन की ओर से भी इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पोस्ट, व्हाट्सऐप मैसेज या किसी दूसरे माध्यम से सिंहस्थ वॉलंटियर्स भर्ती का फॉर्म उपलब्ध कराकर पैसे मांग रहा है तो लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। प्रशासन के मुताबिक फिलहाल किसी तरह का आवेदन शुल्क जमा करने का निर्देश नहीं दिया गया है।
अधिकारियों ने यह भी समझाया कि नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक और नियमित सरकारी कर्मचारी की प्रक्रिया अलग होती है। स्वयंसेवक आपदा, आपात स्थिति, बड़े आयोजनों या जरूरत के समय प्रशासन और समाज की मदद करते हैं। इसे सामान्य सरकारी नौकरी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। इसलिए किसी भी पोस्ट को देखकर नौकरी या पक्की भर्ती समझकर पैसा देना नुकसान का कारण बन सकता है।
ऑनलाइन फॉर्म के नाम पर ₹100 से ₹150 लेने की शिकायत
वहीं धार में सामने आई शिकायतों के अनुसार कुछ ऑनलाइन सेवा केंद्रों पर लोगों से सिंहस्थ वॉलंटियर्स के नाम पर फॉर्म भरवाने के लिए 100 से 150 रुपए तक लिए जा रहे हैं। आवेदन तैयार करने के बाद लोगों को इसे डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट होमगार्ड कार्यालय में जमा करने के लिए कहा जा रहा है। इससे यह भ्रम और बढ़ गया कि शायद सरकार ने सिंहस्थ को लेकर वॉलंटियर्स की भर्ती शुरू कर दी है। हालांकि प्रशासन ने ऐसी किसी प्रक्रिया से साफ इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर चल रही जानकारी की बिना जांच किए लोगों को आवेदन करने से बचना चाहिए। खासकर तब, जब किसी भर्ती के नाम पर पैसे मांगे जा रहे हों।
पैसा देने से पहले ऐसे करें जानकारी की जांच
प्रशासन के मुताबिक नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक के तौर पर पंजीकरण से जुड़ी सही जानकारी केवल अधिकृत माध्यमों से ही लेनी चाहिए। इसके लिए ‘माई भारत पोर्टल’ और ‘सिविल डिफेंस वॉरियर्स’ जैसे आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध जानकारी को देखा जा सकता है। अगर किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर सिंहस्थ वॉलंटियर्स भर्ती का विज्ञापन दिखाई देता है, तो सबसे पहले यह जांचना जरूरी है कि वह जानकारी किस विभाग ने जारी की है। पोस्ट में दिए किसी निजी मोबाइल नंबर या अनजान लिंक के आधार पर आवेदन करने से बचना चाहिए। इसी तरह सिर्फ इसलिए फॉर्म न भरें कि ऑनलाइन सेंटर संचालक उसे सरकारी प्रक्रिया बता रहा है।
सागर पुलिस ने सायबर अपराध के लिए म्यूल बैंक खातों का नेटवर्क संचालित करने वाली गैंग का किया पर्दाफाश
मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा सायबर अपराध एवं सायबर ठगी के नेटवर्क को समाप्त करने के लिए तकनीकी साक्ष्यों, बैंकिंग ट्रांजेक्शन के विश्लेषण एवं डिजिटल इन्वेस्टिगेशन के माध्यम से लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में सागर पुलिस ने बेरोजगार एवं सामान्य व्यक्तियों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम से फर्जी फर्में एवं म्यूल बैंक खाते खुलवाकर सायबर अपराध एवं अन्य संदिग्ध गतिविधियों से प्राप्त राशि का सर्कुलेशन करने वाले संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 03 अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
“ग्लैमर इंटरप्राइजेस” नामक फर्म तैयार कर करंट अकाउंट खुलवाया
13 अगस्त को थाना मकरोनिया में फरियादी रोहित पिता रूपराज पटेल द्वारा शिकायत प्रस्तुत की गई कि उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उसके नाम से फर्जी फर्म तैयार की गई तथा उसके आधार पर फेडरल बैंक, शाखा मकरोनिया में करंट अकाउंट खुलवाया गया है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने संबंधित बैंक खाते का तत्काल परीक्षण एवं तकनीकी-आर्थिक विश्लेषण कराया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि फरियादी के नाम से “ग्लैमर इंटरप्राइजेस” नामक फर्म तैयार कर करंट अकाउंट खुलवाया गया था। इस खाते में फरवरी 2026 से अब तक लगभग छह माह की अवधि में करीब 90 लाख रुपये का लेन-देन पाया गया।
टीम की गई गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीम गठित कर बैंक खातों में हुए लेन-देन, संबंधित फर्मों, बैंकिंग चैनल एवं उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों से की गई गहन पूछताछ एवं तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण में गिरोह के नेटवर्क के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई।
बेरोजगार और गरीब युवकों को कमीशन,आसान कमाई का लालच देते थे आरोपी
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बेरोजगार एवं सामान्य व्यक्तियों को कमीशन तथा आसान कमाई का लालच देकर उनके आधार कार्ड एवं अन्य दस्तावेज प्राप्त करते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम से फर्जी फर्म तैयार कर विभिन्न निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे। बाद में इन बैंक खातों को गिरोह अपने नियंत्रण में लेकर म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल करता था। इन खातों के माध्यम से सायबर ठगी तथा अन्य संदिग्ध गतिविधियों से प्राप्त राशि को विभिन्न खातों में भेजने एवं उसका सर्कुलेशन करने का कार्य किया जा रहा था।
16 से अधिक फर्जी फर्मों का खुलासा
आरोपियों से प्राप्त जानकारी तथा तकनीकी एवं बैंकिंग विश्लेषण के आधार पर अब तक 16 से अधिक फर्जी फर्मों का पता लगाया गया है। इन फर्मों से संबंधित बैंक खातों के प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण में 5 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक के लेन-देन का पता चला है। पुलिस द्वारा सभी खातों के लेन-देन का विस्तृत तकनीकी एवं वित्तीय विश्लेषण किया जा रहा है।
पुलिस द्वारा फर्जी फर्मों के पंजीयन एवं संबंधित बैंक खातों को खोलने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्मों के पंजीयन तथा बैंक खातों के संचालन में किन-किन व्यक्तियों अथवा संस्थाओं की भूमिका रही है। यदि जांच में किसी व्यक्ति अथवा संस्था की लापरवाही या आपराधिक संलिप्तता सामने आती है तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस की अपील
किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से फर्म अथवा बैंक खाता खुलवाकर उसका संचालन किसी और को सौंपना गंभीर कानूनी जोखिम उत्पन्न कर सकता है। ऐसे खातों का उपयोग यदि सायबर ठगी अथवा किसी अन्य अपराध से प्राप्त राशि के लेन-देन में किया जाता है तो खाताधारक भी पुलिस जांच के दायरे में आ सकता है। नागरिक किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें और सायबर अपराध से संबंधित मामलों में सतर्कता बरतें।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Mp Breaking News








