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Explainer: फिल्म में Producer, Co-Producer और Executive Producer का क्या काम होता है? जानें तीनों के बीच क्या है फर्क

Type of Producers in Films:बॉलीवुड फिल्म हो या किसी दूसरी इंडस्ट्री की मूवी, हर फिल्म के अंत में स्क्रीन पर क्रेडिट्स चलने लगते हैं. जिसमें स्टारकास्ट, डायरेक्टर, राइटर और टेक्नीशियन समेत सैकड़ों नाम दिखाई देते हैं. इनमें प्रोड्यूसर, को-प्रोड्यूसर और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर का नाम भी लिखा देता है. हालांकि, अक्सर लोग इन तीनों को एक ही तरह का काम करने वाला समझ लेते हैं, लेकिन फिल्म बनाने की प्रोसेस में तीनों की जिम्मेदारियां अलग होती हैं. आसान भाषा में समझें तो प्रोड्यूसर फिल्म का प्लान बनाने समेत बड़े फैसले लेते है. जबकि को-प्रोड्यूसर फिल्म बनाने और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर फिल्म के प्रोडक्शन को जमीन पर उतारने के लिए अहम रोल निभाता है. लेकिन इन पोस्ट के कामों की जिम्मेदारियां हर फिल्म और प्रोडक्शन कंपनी के हिसाब से थोड़ी अलग हो भी सकती हैं. आइए विस्तार से समझते हैं.

प्रोड्यूसर का क्या काम होता है?

प्रोड्यूसर को फिल्म का सबसे अहम प्रोडक्शन क्रेडिट माना जाता है. वह अक्सर फिल्म बनने के शुरुआती प्रोसेस का हिस्सा होता है. उस काम फिल्म के लिए स्टोरी सेलेक्ट करना, डायरेक्टर और मैन कलाकारों को साथ लाना, बजट बनाना, फंडिंग देना और प्रोडक्शन के लिए प्लान बनाने का काम होता है. उदाहरण से समझिए. शुरु में किसी प्रोड्यूसर को कोई स्टोरी पसंद आती है. तो वह राइटर से फिल्म के लिए स्क्रिप्ट तैयार करवाता है. इसके बाद डायरेक्टर को उस स्टोरी के बारे में बताता है और फिल्म के बजट पर काम शुरू होता है. स्टारकास्ट की फीस, शूटिंग लोकेशन, कैमरा, सेट, VFX, पोस्ट-प्रोडक्शन और प्रमोशन जैसे खर्चां को उठाता है. हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर फिल्म में प्रोड्यूसर अपनी जेब से पूरा पैसा लगाए. कई फिल्मों में स्टूडियो, प्रोडक्शन कंपनी, निवेशक, डिस्ट्रीब्यूटर या दूसरे लोग भी फंडिंग करते हैं. इसी वजह से प्रोड्यूसर को केवल 'पैसा लगाने वाला' समझना सही नहीं है.

को-प्रोड्यूसर क्या करता है?

जब किसी फिल्म को बनाने का प्रोसेस शुरू होता है, उसमें कंपनियां या पार्टनरशिप का बहुत योगदान होता है. इसमें को-प्रोड्यूसर का क्रेडिट सामने आ सकता है. यह योगदान पैसे, सोर्स, प्रोडक्शन फैसिलिटी, किसी खास क्षेत्र की व्यवस्था या दूसरे कर्मिशियल सपोर्ट दे सकता है. मान लीजिए किसी फिल्म का बजट बहुत बड़ा है और मैन प्रोडक्शन कंपनी पूरा खर्च अकेले नहीं उठाना चाहती. ऐसे में दूसरी पार्टनर उसमें निवेश कर सकता है. इसके बदले उसे को-प्रोड्यूसर का क्रेडिट और एग्रीमेंट के मुताबिक मुनाफे या दूसरे राइट्स मिल सकते हैं.  कई बार कोई बड़ा एक्टर भी फिल्म से बतौर को-प्रोड्यूसर जुड़ जाता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं होता कि उसने पूरी फिल्म में सारा पैसा लगाया है. वह अपने प्रोडक्शन बैनर, इन्वेस्ट, क्रिएटिव पार्टनरशिप के तौर पर को-प्रोड्यूसर के तौर पर जुड़ सकता है.  इसलिए को-प्रोड्यूसर की रोल हर फिल्म में बिल्कुल एक जैसा नहीं होता. असली जिम्मेदारी उसके कॉन्ट्रैक्ट और प्रोडक्शन सिस्टम के हिसाब से तय होता है. 

एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर का फिल्म में क्या होता है योगदान?

एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर का नाम सुनकर अक्सर लोगों को लगता है कि यह फिल्म का सबसे बड़ा बॉस होता होगा . लेकिन ऐसा हर फिल्म में नहीं होता. एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर की रोल प्रोडक्शन की जरूरतों के हिसाब से चैंज हो सकती है. कई प्रोजेक्ट्स में एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर का काम यह देखना होता है कि फिल्म के प्रोडक्शन काम सही तरीके हो रहा है. शूटिंग का शेड्यूल, बजट पूरा है, अलग-अलग टीमों के बीच तालमेल बैठाना, लोकेशन से जुड़ी चीजों को देखना और प्रोडक्शन की जरूरतों और परेशानियों को संभालना उसके काम का हिस्सा हो सकता है.

मान लीजिए किसी फिल्म की शूटिंग 60 दिनों में पूरी करने की प्लान की गई है, ऐसे में अगर किसी लोकेशन पर मौसम खराब हो जाता है या किसी सेट तैयार करने में दिक्कतें आ रही हैं तो उसके लिए एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर दूसरी व्यवस्था करता है. एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर इस तरह की सिचुएशन में प्रोडक्शन को तय प्लान के अनुसार चलाने में मदद कर सकता है.  हालांकि हर फिल्म में एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर सीधे सेट पर मौजूद हो, यह जरूरी नहीं. खासकर बड़े स्टूडियो या इंटरनेशनल प्रोडक्शन में इस पद की जिम्मेंदारियां अलग हो सकती हैं. 

तीनों में सबसे बड़ा फर्क क्या है?

सीधे शब्दों में समझें तो प्रोड्यूसर फिल्म की बड़ी तस्वीर तैयार करने पर काम करता है. वह फिल्म को शुरू करने और उसे पूरी कराने में अहम रोल निभाता है. को-प्रोड्यूसर मैन प्रोड्यूसर या प्रोडक्शन टीम के साथ पार्टनरशिप में रहता है. उसका योगदान पैसों देना, सोर्स या किसी खास तरह की सपोर्ट के रूप में हो सकता है.वहीं, एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर का फोकस प्रोडक्शन का काम होता है कि पूरी फिल्म सुचारू रूप से चले, उसमें किसी तरह की दिक्कतें ना आएं. उसका काम यह देखने का हो सकता है कि फिल्म की शूटिंग और दूसरी प्रोडक्शन जरूरतें पूरी हो रही या नहीं.

उदाहरण के साथ समझे

मान लीजिए किसी फिल्म का बजट 100 करोड़ रुपये है. एक प्रोडक्शन कंपनी फिल्म बनाने के लिए 70 करोड़ रुपये का बजट रखती है. उसे उसे मैन प्रोड्यूसर कहा जा सकता है. इसके बाद दूसरी कंपनी 30 करोड़ रुपये लगाती है या फिल्म प्रोडक्श में दूसरे तरीके से सपोर्ट करती है तो उसे एग्रीमेंट के तौर पर को-प्रोड्यूसर का क्रेडिट मिल सकता है. अब फिल्म की शूटिंग शुरू होती है. 100 करोड़ के बजट के अंदर लोकेशन, स्टाफ, इक्विपमेंट, शेड्यूल और दूसरी प्रोडक्शन जरूरतों को मैनेज करने के लिए एक एक्सपीरियंस प्रोफेशनल जिम्मेदारी संभालता है, तो उसे एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर कहा जा सकता है. 

क्या प्रोड्यूसर ही फिल्म का मालिक होता है?

यहां पर यह बात भी समझना जरूरी है कि 'प्रोड्यूसर' शब्द का मीनिंग हर मामले में फिल्म का कानूनी मालिक होना नहीं है. किसी फिल्म के कॉपीराइट, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स और दूसरे राइट्स् किसके पास होंगे, यह कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट और प्रोडक्शन स्ट्रक्चर के आधार पर तय होता है. इसी तरह को-प्रोड्यूसर को सिर्फ इन्वेस्टर और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर को सिर्फ सेट का मैनेजर मान लेना सही नहीं होगा. फिल्म इंडस्ट्री में क्रेडिट और जिम्मेदारियां प्रोजेक्ट के हिसाब से अलग-अलग हो सकती हैं.  यानी क्रेडिट्स में तीनों नाम देखकर सबसे यह तय कर लेना सही नहीं होगा कि प्रोड्यूसर काम फिल्म बड़ी जिम्मेदारियों देखना, को-प्रोड्यूसर को इन्वेस्टर और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर को प्रोडक्शन मैनेजमेंट का काम देखना ही होता है.

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गॉल में ये कारनामा करने वाले सिर्फ तीसरे भारतीय बने देवदत्त पडिक्कल, पुजारा, रहाणे और विराट कोहली सब रह गए पीछे

Devdutt Padikkal: भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में इतिहास रच दिया है. भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से पहला टेस्ट मैच गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है. इस मैच में भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था. मैच के पहले ही दिन देवदत्त पडिक्कल ने शानदार शतक जड़ दिया. इसके बाद दूसरे दिन उन्होंने 167 रनों की बेहतरीन शतकीय पारी खेली और एक बड़ा कीर्तिमान बना दिया. उन्होंने एक मामले में चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे और विराट कोहली को भी इस मामले में पीछे छोड़ दिया है. 

गॉल में सबसे बड़ी टेस्ट पारी खेलने वाले तीसरे भारतीय बने देवदत्त पडिक्कल

श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में 167 रनों की पारी खेलकर देवदत्त पडिक्कल ने एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया है. पडिक्कल अब गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में एक टेस्ट पारी में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले सिर्फ तीसरे भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं. उनसे आगे अब वीरेंद्र सहवाग और शिखर धवन हैं. बता दें कि पडिक्कल का यह पहला टेस्ट शतक भी है. सहवाग ने 2008 में गॉल के मैदान पर दोहरा शतक लगाया था. उन्होंने नाबाद 201 रनों की पारी खेली थी. जबकि शिखर धवन ने 2017 में 190 रन बनाए थे.

देवदत्त पडिक्कल ने कोहली, रहाणे और पुजारा को छोड़ा पीछे

अब गॉल की एक टेस्ट पारी में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट देखें तो चौथे नंबर पर चेतेश्वर पुजारा हैं, जिन्होंने 2017 में 153 रनों की पारी खेली थी. वहीं शिखर धवन ने 2015 में 134 रन बनाए थे. जबकि अजिंक्य रहाणे ने साल 2015 में ही 126 रनों की पारी खेली थी. वहीं विराट कोहली ने 2017 में एक पारी में 3 रन और दूसरी पारी में नाबाद 103 रन बनाए थे. बता दें कि विराट कोहली और शिखर धवन ही ऐसे भारतीय हैं, जिन्होंने गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में 2-2 शतक लगाने का कारनामा किया है. हालांकि अब पडिक्कल कोहली, रहाणे और पुजारा से सबसे बड़ी पारी खेलने के मामले में आगे निकल गए हैं. 

गॉल में भारतीय बल्लेबाजों द्वारा बनाए गए एक टेस्ट पारी में सर्वाधिक स्कोर

बल्लेबाज रन साल
वीरेंद्र सहवाग 201* 2008
शिखर धवन 190 2017
देवदत्त पडिक्कल 167 2026
चेतेश्वर पुजारा 153 2017
शिखर धवन 134 2015
अजिंक्य रहाणे 126 2015
विराट कोहली 103* 2017
विराट कोहली 103 2015

देवदत्त पडिक्कल की पारी के दम पर मजबूत स्थिति में भारत

गॉल टेस्ट के दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक टीम इंडिया ने 9 विकेट पर 460 रन बना लिए हैं. पडिक्कल की 167 रनों की पारी के दम पर टीम इंडिया मजबूत स्थिति में नजर आ रही है. पडिक्कल ने पिछले 12 महीनों में बल्ले से खूब धमाल मचाया है. पहले घरेलू क्रिकेट, आईपीएल और अब इंटरनेशनल क्रिकेट में वो अपनी छाप छोड़ रहे हैं. हर जगह उनके बल्ले से रनों की बरसात हो रही है. श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय टीम ने एक वार्म-अप मैच खेला था. इस मैच में भी पडिक्कल के बल्ले से शतक निकला था, जिसके बाद से फैंस और टीम को उम्मीद थी कि उनके बल्ले से एक बड़ी पारी आएगी और वो टीम के लिए एक्स फैक्टर साबित हो सकते हैं. इस मैच में पडिक्कल ने 230 गेंदों का सामना करते हुए 167 रन बनाए, जिसमें 15 चौके और 1 छक्का लगाया.

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‘दिमाग में क्लियर प्लान और बड़ी पारी की भूख...' श्रीलंका के खिलाफ गॉल में गदर मचाने के बाद गरजे देवदत्त पडिक्कल

Devdutt Padikkla Statement: श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में पहला शतक जड़कर 167 रनों की शानदार पारी खेलने वाले देवदत्त पडिक्कल ने अपनी सफलता का राज खोला है. पिछले दो सालों से मौके का इंतजार कर रहे पडिक्कल ने बताया कि स्पिनरों के खिलाफ स्पष्ट रणनीति, बेहतरीन फुटवर्क और शतक को बड़ी पारी में बदलने की भूख ने इस मुकाम तक पहुंचाया. शतक के बाद एकाग्रता बनाए रखने को अहम बताते हुए उन्होंने कहा कि कर्नाटक के दिग्गजों को देखकर उन्हें बड़ी पारी खेलने की प्रेरणा मिली. Sun, 16 Aug 2026 22:03:36 +0530

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