प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण सार्वजनिक सेवा वितरण में क्रांतिकारी बदलाव लाया: भजनलाल शर्मा
जयपुर, 1 जुलाई (आईएएनएस)। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को राजस्थान अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (आरआईसी) में 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन का उद्घाटन किया।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 से सुशासन के लिए प्रौद्योगिकी के लाभ उठाने के दृष्टिकोण ने देश भर में सार्वजनिक सेवा वितरण में क्रांतिकारी बदलाव लाया है।
उन्होंने कहा कि जन-धन, आधार और मोबाइल (जेएएम) योजना ने कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में बिचौलियों की भूमिका को समाप्त कर दिया है, जबकि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) ने यह सुनिश्चित किया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा हो।
उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया और एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) जैसी प्रमुख पहलों ने भारत के डिजिटल परिवर्तन को काफी गति प्रदान की है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री शर्मा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रियल टाइम सिस्टम (स्मार्ट) परियोजना के साथ सेवा प्रबंधन, ई-मित्र व्हाट्सएप सेवा और राजस्थान इनोवेशन चैलेंज का शुभारंभ किया।
उन्होंने राज्य की डिजिटल शासन पहलों को उजागर करने वाली एक कॉफी टेबल बुक का भी अनावरण किया।
इस नई पहल के तहत, नागरिक केवल 946106270 व्हाट्सएप नंबर पर हाय भेजकर 27 सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
इन सेवाओं में बिजली और पानी के बिलों का भुगतान, विभिन्न प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन और कई अन्य सरकारी सुविधाओं तक पहुंच शामिल है। कनेक्ट होने पर, उन्हें 27 ई-मित्र सेवाओं की सूची प्राप्त होती है, जिससे वे सीधे व्हाट्सएप के माध्यम से उपयोगिता बिलों का भुगतान कर सकते हैं, प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन कर सकते हैं और अन्य सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
राज्य सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक सेवाओं को अधिक सुलभ और सुविधाजनक बनाना है, साथ ही सरकारी कार्यालयों और ई-मित्र केंद्रों पर बार-बार जाने की आवश्यकता को कम करना है।
इस कार्यक्रम में 80 से अधिक केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों, 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह गुरुवार को सम्मेलन में शामिल होंगे।
इससे पहले, मुख्यमंत्री ने प्रौद्योगिकी-आधारित सरकारी सेवाओं और नवोन्मेषी डिजिटल समाधानों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी का उद्घाटन और दौरा किया।
राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्री राजवर्धन सिंह राठौर भी उपस्थित थे।
उद्घाटन सत्र से पहले, मुख्यमंत्री शर्मा ने डिजिटल शासन पहलों और उभरती प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
उद्घाटन सत्र के बाद, मुख्यमंत्री ने उद्योग प्रतिनिधियों के साथ एक गोलमेज चर्चा में भाग लिया।
--आईएएनएस
एमएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
महाराष्ट्र : अवैध आईवीएफ सेंटरों के खिलाफ सरकार करेगी कार्रवाई, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर मकोका लगाने की तैयारी
मुंबई, 1 जुलाई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को अवैध रूप से लिंग जांच और गलत तौर-तरीकों को रोकने के लिए राज्य भर में बिना मंजूरी के चल रहे सोनोग्राफी और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
महाराष्ट्र विधानसभा में सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश अबितकर ने घोषणा की कि राज्य सरकार कानून तोड़ने वालों के खिलाफ महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) लागू करने की योजना बना रही है।
यह घोषणा सत्र के दौरान की गई, जब विधायक अबू आजमी ने राज्य भर में चल रही बिना नियम-कानून वाली आईवीएफ सुविधाओं के बारे में गंभीर चिंताएं जताईं।
हरीश पिंपल, अजय चौधरी, योगेश सागर और राहुल पाटिल सहित अन्य विधायकों ने भी अतिरिक्त सवाल पूछकर चर्चा में हिस्सा लिया।
मंत्री अबितकर ने महाराष्ट्र में आईवीएफ इलाज और बिना जरूरत के होने वाले सिजेरियन सेक्शन (सी-सेक्शन) डिलीवरी, दोनों में चिंताजनक और अनावश्यक बढ़ोतरी की ओर ध्यान दिलाया।
इससे निपटने के लिए, राज्य एक व्यापक नियम-कानून का ढांचा तैयार करेगा ताकि यह पक्का किया जा सके कि आईवीएफ इलाज सिर्फ मेडिकल जरूरत के आधार पर ही बताया जाए।
मंत्री ने कहा, हम अनैतिक मेडिकल प्रैक्टिस के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति अपनाते हैं। आईवीएफ में गलत प्रैक्टिस और प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक्स (पीसीपीएनडीटी) एक्ट के उल्लंघन में शामिल लोगों को कड़ी सजा देने के लिए मकोका लागू करने सहित कड़े कानूनी प्रावधान लाए जाएंगे। यह दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों, एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ और हॉस्पिटल मैनेजमेंट पर लागू होगा।
मंत्री ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों की हालिया कार्रवाई के बारे में जानकारी दी। बदलापुर और अंबरनाथ में एक गैर-कानूनी गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद, इसमें शामिल डॉक्टरों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मंत्री ने आगे कहा कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने उनके मेडिकल लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
हाल ही में एक क्षेत्रीय विशेषज्ञ समिति ने चंद्रपुर में बेबीश्योर क्लिनिक और इंदिरा आईवीएफ सेंटर का निरीक्षण किया।
मंत्री ने कहा, कई तरह की संरचनात्मक और कामकाज से जुड़ी अनियमितताएं मिलने के बाद, दोनों सेंटरों को तुरंत अपना कामकाज रोकने का आदेश दिया गया है, जब तक वे आधिकारिक लेवल-1 असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) रजिस्ट्रेशन हासिल नहीं कर लेते। यह मामला अभी कोर्ट में है।
उन्होंने सदन को बताया कि राज्य सरकार गरीबों को लाभ पहुंचाने के लिए आईवीएफ सुविधा को महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना के तहत शामिल करने पर विचार कर रही है।
--आईएएनएस
एससीएच/एबीएम
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