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'सिंदूर' में पाक के झूठ की पोल खोलने वाले विक्रम मिस्री को मिला इनाम, एक साल और दुश्मन की छाती पर दलेंगे मूंग

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के झूठे प्रोपेगैंडा को ध्वस्त करने वाले विदेश सचिव विक्रम मिस्री के कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है. उनका मौजूदा कार्यकाल 14 जुलाई 2026 को खत्‍म हो रहा था. वैश्विक चुनौतियों और पड़ोसी देशों से जारी तनाव के बीच भारत की विदेश नीति में निरंतरता बनाए रखने के लिए यह अहम फैसला लिया गया है.

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US Supreme Court का ऐतिहासिक फैसला, Donald Trump की इमिग्रेशन नीति खारिज, जन्म से नागरिकता का अधिकार कायम।

अमेरिका में जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता को लेकर चल रहा विवाद अब काफी हद तक समाप्त हो गया है। अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसके जरिए वह जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता की व्यवस्था को समाप्त करना चाहते थे। अदालत के इस फैसले को लाखों प्रवासी परिवारों, विशेष रूप से भारतीय मूल के लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा हैं।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने वर्ष 2025 में अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद कई नए आदेश जारी किए थे। इनमें एक प्रमुख आदेश यह भी था कि बिना वैध दस्तावेज वाले प्रवासियों और अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे विदेशी नागरिकों के यहां जन्म लेने वाले बच्चों को अमेरिकी नागरिकता नहीं मिले। इस आदेश को कई राज्यों, सामाजिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने अदालत में चुनौती दी थी।

मौजूद जानकारी के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदस्यीय पीठ ने छह के मुकाबले तीन मतों से ट्रंप के इस आदेश को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता देने की व्यवस्था पिछले लगभग 150 वर्षों से लागू हैं और इसका मूल आधार जन्मस्थान रहा है, न कि माता-पिता की इमीग्रेशन स्थिति या नागरिकता।

मुख्य न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि अमेरिकी संविधान के चौदहवें संशोधन का उद्देश्य इस देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक स्वतंत्र व्यक्ति को समान अधिकार देना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय कोई नया सिद्धांत नहीं बना रहा, बल्कि लंबे समय से चली आ रही संवैधानिक व्यवस्था को ही बरकरार रख रहा हैं।

इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन लाखों प्रवासी परिवारों पर पड़ेगा जो अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की भी हैं। गौरतलब है कि भारत के हजारों पेशेवर एच-1बी वीजा के तहत अमेरिका में कार्यरत हैं। यदि ट्रंप का आदेश लागू हो जाता तो उनके अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता को लेकर गंभीर अनिश्चितता पैदा हो सकती थीं।

भारतीय-अमेरिकी संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले का स्वागत किया हैं। चिंतन पटेल, जो भारतीय-अमेरिकी संगठन इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के कार्यकारी निदेशक हैं, ने इसे अमेरिका की समावेशी पहचान को मजबूत करने वाला फैसला बताया। उनके अनुसार भारतीय और दक्षिण एशियाई परिवार लंबे समय से वीजा प्रक्रिया में देरी और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, ऐसे में यह फैसला उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
 
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उनका कहना है कि ट्रंप का आदेश संविधान की भावना के खिलाफ था और इससे हजारों बच्चों के अधिकार प्रभावित हो सकते थे।

हालांकि, अमेरिकी न्याय विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि तथाकथित जन्म पर्यटन के मामलों पर कार्रवाई जारी रहेगी। जन्म पर्यटन उस स्थिति को कहा जाता है, जब कोई महिला केवल बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका जाकर प्रसव कराती हैं। यदि वीजा आवेदन में गलत जानकारी दी जाती है तो ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा सकती हैं।

मौजूद आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में अमेरिका में भारतीय मूल के लगभग 52 लाख लोग रह रहे थे। इनमें से लगभग 51 प्रतिशत लोग अमेरिकी नागरिक बन चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या अभी भी विभिन्न प्रकार के वीजा पर निवास कर रही हैं। ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला भारतीय समुदाय सहित लाखों प्रवासी परिवारों के लिए बड़ी कानूनी और सामाजिक राहत लेकर आया है।

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  Sports

Vaibhav Suryavanshi के Debut पर सस्पेंस, कप्तान Shreyas Iyer के जवाब से England Series से पहले मचा बवाल

इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 श्रृंखला शुरू होने से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर एक अलग वजह से चर्चा में आ गए हैं। दरअसल, मुकाबले से पहले आयोजित प्रेस वार्ता में उनसे युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर लगातार चल रही चर्चाओं और सोशल मीडिया पर हो रही प्रतिक्रियाओं के बारे में सवाल पूछा गया। अय्यर ने इस पर बेहद स्पष्ट और संक्षिप्त जवाब दिया, जिसके बाद उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

बता दें कि भारत हाल ही में आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी20 श्रृंखला में 0-2 से हार गया था। इस हार के बाद टीम चयन को लेकर कई सवाल उठे थे। सबसे ज्यादा चर्चा 15 वर्षीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर हुई, जिन्हें शानदार घरेलू और आईपीएल प्रदर्शन के बाद पहली बार भारतीय टीम में जगह मिली थी। हालांकि उन्हें दोनों मुकाबलों में अंतिम एकादश में खेलने का मौका नहीं मिला था।

इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले से पहले एक पत्रकार ने श्रेयस अय्यर से पूछा कि क्या वैभव सूर्यवंशी को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं ने टीम और कप्तान से ध्यान भटका दिया है। इस पर अय्यर ने कहा कि वह सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करते और न ही इस तरह की चर्चाओं पर ध्यान देते हैं।

श्रेयस अय्यर ने जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने इस तरह की कोई चर्चा नहीं देखी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह न तो समाचारों पर लगातार नजर रखते हैं और न ही सामाजिक माध्यमों पर चल रही हर प्रतिक्रिया को देखते हैं। इसलिए उन्हें इस विषय की जानकारी नहीं हैं।

इसके बाद जब उनसे वैभव सूर्यवंशी के संभावित पदार्पण को लेकर सवाल किया गया तो भारतीय कप्तान ने टीम की रणनीति सार्वजनिक करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी पहले से नहीं बता सकता कि आगे क्या होगा। टीम संयोजन पूरी तरह आंतरिक मामला है और विपक्षी टीम के सामने ऐसी जानकारी साझा नहीं की जा सकती हैं।

श्रेयस अय्यर के इस जवाब के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके जवाब को सख्त और बेबाक बताया, जबकि कुछ ने उनके व्यवहार पर सवाल भी उठाए। कई क्रिकेट प्रशंसकों का मानना था कि कप्तान ने पत्रकार के सवाल का सीधा जवाब देकर अनावश्यक विवाद से बचने की कोशिश की हैं।

गौरतलब है कि इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर श्रीवत्स गोस्वामी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि टीम के अंदर का माहौल और चयन प्रक्रिया को केवल खिलाड़ी और टीम प्रबंधन ही बेहतर तरीके से समझते हैं। उनके अनुसार मीडिया का सवाल पूछना और प्रशंसकों का अपनी राय रखना स्वाभाविक है, लेकिन टीम को बाहरी शोर से अलग रहकर फैसले लेने होते हैं।

अब सभी की नजर इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले पर टिकी हुई हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वैभव सूर्यवंशी को इस सीरीज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने का मौका मिलेगा या नहीं। यदि उन्हें फिर अंतिम ग्यारह में जगह नहीं मिलती है तो टीम चयन को लेकर बहस एक बार फिर तेज होने की संभावना हैं। ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ यह सीरीज केवल नतीजों के लिहाज से ही नहीं, बल्कि युवा खिलाड़ियों को अवसर देने के नजरिए से भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Wed, 01 Jul 2026 22:25:34 +0530

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