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PM मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण पर आरिफ मसूद ने जताई आपत्ति, बोले- ‘मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र क्यों नहीं?’

भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए भाषण को लेकर आपत्ति जताई है। आरिफ मसूद का कहना है कि प्रधानमंत्री ने आजादी की लड़ाई के कई सेनानियों का जिक्र किया लेकिन मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम सामने नहीं रखे। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर मुस्लिम सेनानियों के योगदान को भी देश के सामने रखने की मांग की है।

आरिफ मसूद ने कहा कि भारत की आजादी किसी एक धर्म या समुदाय की कोशिश का नतीजा नहीं थी। अंग्रेजों के खिलाफ लंबे संघर्ष में अलग-अलग इलाकों और समुदायों के लोगों ने हिस्सा लिया और कई लोगों ने अपनी जान भी गंवाई। विधायक आरिफ मसूद ने अपने ज्ञापन में इतिहास के अलग-अलग दौर का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई को व्यापक नजरिए से देखा जाना चाहिए।

मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का किया जिक्र

दरअसल आरिफ मसूद ने अपने ज्ञापन में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े कई नामों और घटनाओं का हवाला दिया है। उन्होंने 18वीं सदी के फकीर-संन्यासी आंदोलन का जिक्र करते हुए मजनू शाह फकीर, मूसा शाह, चिराग अली और नूरुल मोहम्मद जैसे नाम सामने रखे। उनका कहना है कि अंग्रेजी शासन के खिलाफ हुए आंदोलनों में अलग-अलग समुदायों के लोगों ने मिलकर विरोध किया था। विधायक ने 1857 के विद्रोह का उदाहरण भी दिया। उन्होंने अहमदुल्ला शाह मदरासी का जिक्र करते हुए दावा किया कि उन्होंने देश के कई हिस्सों में अंग्रेजों के खिलाफ लोगों को जोड़ने का काम किया था। मसूद ने अपने पत्र में यह भी कहा कि ब्रिटिश सरकार ने अहमदुल्ला शाह को पकड़ने के लिए इनाम की घोषणा की थी।

स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास सिर्फ कुछ बड़े नामों तक सीमित नहीं: आरिफ मसूद

आरिफ मसूद का कहना है कि स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास सिर्फ कुछ बड़े नामों तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, जिन लोगों ने स्थानीय स्तर पर आंदोलन किए, लोगों को जोड़ा और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, उनके योगदान को भी याद किया जाना चाहिए। उन्होंने इसी आधार पर प्रधानमंत्री के भाषण में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख नहीं होने पर सवाल उठाया है।

1857 के विद्रोह को लेकर क्या कहा?

आरिफ मसूद ने अपने ज्ञापन में 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजों की कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि विद्रोह को दबाने के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को बिना मुकदमे के सजा दी गई और इनमें मुस्लिम उलेमा तथा दूसरे स्वतंत्रता सेनानी भी शामिल थे। हालांकि, ज्ञापन में दिए गए ऐतिहासिक आंकड़ों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है। आरिफ मसूद ने अपने पत्र में ब्रिटिश अधिकारियों और इतिहास से जुड़ी किताबों का हवाला देते हुए कहा कि 1857 के संघर्ष में मुस्लिम समुदाय के कई लोगों ने अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में आजादी के आंदोलन की कहानी को समझने के लिए पुराने दस्तावेजों और स्मारकों को देखा जा सकता है।

विधायक ने इंडिया गेट के पास मौजूद नेशनल वॉर मेमोरियल और अंडमान-निकोबार की सेलुलर जेल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आजादी और देश की रक्षा से जुड़े लोगों के नाम दर्ज हैं। उनका तर्क है कि स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा करते समय सभी समुदायों के योगदान को बराबर जगह मिलनी चाहिए।

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अप्रैल 2027 से लागू होंगे लोन से जुड़े नए नियम, RBI ने जारी किया ड्राफ्ट, 11 सितंबर तक मांगा फीडबैक

रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) लोन से जुड़े नियमों में बदलाव करने की तैयारी में है। लोन और एडवांस पर ब्याज दरों को लेकर नए ड्राफ्ट नियम जारी किए गए हैं।  जिसपर आरबीआई ने 11 सितंबर तक मांगा गया है। नागरिक अपनी राय ईमेल या आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर साझा कर सकते हैं। हितधारकों की राय की समीक्षा के बाद नियमों को लागू करने का फैसला लिया जाएगा।

सेंट्रल बैंक ने रेगुलेटेड एंटिटीज (REs) के लिए लोन और एडवांस पर ब्याज दरों को लेकर निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य मॉनेटरी पॉलिसी का अक्सर ठीक से लागू करना और क्रेडिट रिस्क की सही कीमत तय करना है। साथ ही उधर लेने वालों के निष्पक्ष और बिना भेदभाव वाला व्यवहार सुनिश्चित करना है। लोन और एडवांस पर ब्याज दरों से जुड़ा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क कमर्शियल बैंकों पर 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा। 

फिक्स्ड फ्लोटिंग रेट का प्रस्ताव

ड्राफ्ट गाइडलाइंस में फ्लोटिंग रेट लोन के लिए इंटरनल और एक्सटर्नल बेंचमार्क आधारित लेंडिंग फ्रेमवर्क और ऐसे बेंचमार्क का  स्प्रेड तय करने के लिए निर्देश शामिल किए गए हैं। इसके अलावा कमर्शियल बैंक कुछ खास पहलुओं को भी अलग-अलग तरीके देखा गया, जिसमें एमसीएलआर और उसके कॉम्पोनेंट्स तय करना शामिल है। रेगुलेटरी एंटिटीज के लिए एक जैसा निर्देश जारी करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें फिक्स्ड रेट और फ्लोटिंग रेट दोनों  ब्याज दरें तय करने के लिए व्यापक सिद्धांतों पर आधारित फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा। जो REs के कामकाज की प्रकृति, जटिलता और पैमाने पर निर्भर करेगा। 

MCLR से जुड़े नए नियम समझें 

मार्जिनल कॉस्ट ऑफ़ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट्स के लिए आरबीआई ने एक नई पद्धति का प्रस्ताव रखा है। एमसीएलआर कि गणना बैंक के लिए पिछले 3 महीने की अवधि के दौरान घरेलू जमा और उधर की मार्जिनल कॉस्ट की मूविंग एवरेज के तौर पर की जाएगी। हर महीने फंड की मार्जिनल कॉस्ट की गणना नए जमा और उधर की मात्रा पर सलाना वेटेड एवरेज ब्याज लागत के तौर पर की जाएगी, जो सिस्टम से जनरेट होगा और स्वतंत्र रूप से इसे वेरीफाई किया जाएगा। इससे बैंकों द्वारा अपने सीमांत वित्त पोषण लागत का निर्धारण करने के लिए उपयोग किए जाने वाले डेटा मानकीकरण होगा। इन तीन मासिक आंकड़ों का इस्तेमाल सीमांत लागत घटक के लिए गतिशील औसत निकालने के लिए किया जाएगा।

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  Sports

क्यों रवींद्र जडेजा और प्रभात जयसूर्या से अलग है मानव सुथार, पैरों के 'पिवटिंग' से डाल रहे है गॉल टेस्ट में बड़ा फर्क

manav suthar analysis: श्रीलंका के गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम की स्पिन-अनुकूल पिच पर भारतीय युवा स्पिनर मानव सुथार ने गेंद को हवा में जिस तरह से नचाया, उसने सभी को हैरान कर दिया। हालांकि इस मैच में प्रभात जयसूर्या और रवींद्र जडेजा जैसे दुनिया के दिग्गज और स्थापित बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स स्पिनर भी खेल रहे थे, लेकिन सुथार के एक्शन ने उन्हें एक अलग ही धार दी. Mon, 17 Aug 2026 15:25:56 +0530

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