समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 01 जुलाई को अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं। विदेश में पढ़ाई करने वाले अखिलेश यादव ने राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल किया है। भले ही इस समय अखिलेश यादव सत्ता में नहीं हैं, लेकिन वह विपक्षी नेता के रूप में सत्ताधारी दल को घेरते रहते हैं। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर पूर्व सीएम अखिलेश यादव के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के गांव सैफई में 01 जुलाई 1973 को अखिलेश यादव का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम मुलायम सिंह यादव था। उन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा सैफई के सेंट मैरी स्कूल से की थी। इसके बाद वह राजस्थान के धौलपुर के मिलिट्री स्कूल गए। फिर उन्होंने कर्नाटक की मैसूर यूनिवर्सिटी से सिविल एनवायरमेंट में इंजीनियरिंग की। फिर वह हायर एजुकेशन के लिए ऑस्ट्रेलिया चले गए थे।
सियासी सफर
साल 2000 में पहली बार अखिलेश यादव कन्नौज लोकसभा सीट से सांसद बने थे। इसके बाद उन्होंने लगातार 2 बार चुनाव जीता। फिर साल 2012 में उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया और यूपी विधानसभा चुनाव लड़ा। इस दौरान वह जीते और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
यूपी के सबसे युवा CM
15 मार्च 2012 को 38 साल की उम्र में अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के सबसे युवा सीएम बने थे। फिर साल 2017 में वह समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष बने और इस साल हुए यूपी विधानसभा में उन्होंने कांग्रेस से हाथ मिलाया। लेकिन वह दोबारा सरकार बनाने में नाकाम रहे।
साल 2019 में उन्होंने आजमगढ़ से लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की। साल 2022 में अखिलेश यादव ने फिर यूपी विधानसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार भी उनको हार का सामना करना पड़ा। वहीं साल 2024 में लोकसभा चुनाव में वह चौथी बार जीत हासिल कर सांसद बने।
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तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता के. अन्नामलाई ने मंगलवार को एक बड़ा दावा करते हुए राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अन्नामलाई के अनुसार, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के सांसद टी.आर. बालू ने उनके खिलाफ दायर किया 100 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा वापस ले लिया है। इस घटनाक्रम के बाद अन्नामलाई ने दोटूक लहजे में कहा कि वे सत्ताधारी पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के अपने हर एक आरोप पर आज भी पूरी तरह कायम हैं। यह कानूनी विवाद अन्नामलाई के बहुचर्चित 'DMK फाइल्स' कैंपेन से जुड़ा हुआ है, जिसके तहत उन्होंने सत्तारूढ़ दल के शीर्ष नेताओं की कथित संपत्तियों का ब्यौरा सार्वजनिक किया था।
X पर एक पोस्ट में, अन्नामलाई ने कहा कि बालू ने मानहानि का केस तब दायर किया था जब उन्होंने अपने "DMK फाइल्स" कैंपेन के ज़रिए सीनियर DMK नेता और उनके परिवार की कथित संपत्ति और कंपनियों की जानकारी सार्वजनिक की थी।
अन्नामलाई ने लिखा, "थिरु टी.आर. बालू ने 'DMK फाइल्स' के ज़रिए उनके और उनके परिवार की संपत्ति/कंपनियों की जानकारी प्रकाशित करने के लिए मेरे खिलाफ मानहानि का केस दायर किया था और हर्जाने के तौर पर 100 करोड़ रुपये की मांग की थी।"
राज्य बीजेपी के पूर्व प्रमुख ने कहा कि सुनवाई के एक चरण के बाद, उन्होंने खुद केस लड़ा और व्यक्तिगत रूप से बालू से जिरह की। उन्होंने कहा कि कार्यवाही की जानकारी पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में थी।
अन्नामलाई ने आगे आरोप लगाया कि जिरह के दौरान, बालू ने अदालत में उनके खिलाफ बिना किसी आधार के "अपमानजनक टिप्पणी" की, जिसके कारण उन्हें उन बयानों को लेकर DMK सांसद के खिलाफ एक अलग केस दायर करना पड़ा।
उन्होंने कहा, "आज, थिरु टी.आर. बालू ने अपनी मर्जी से मेरे खिलाफ दायर मानहानि का केस वापस लेने का फैसला किया। उन्होंने मेरे खिलाफ मानहानि का केस दायर किया था; इसे आगे बढ़ाना है या नहीं, यह उनका फैसला था, मेरा नहीं।"
अपनी बात दोहराते हुए, अन्नामलाई ने कहा कि वे पिछली DMK सरकार और सत्ताधारी पार्टी के कुछ सदस्यों के खिलाफ की गई "हर एक टिप्पणी" पर कायम हैं।
उन्होंने सुनवाई के दौरान समर्थन के लिए वकील पॉल कनगराज, कुमारगुरु और बीजेपी की कानूनी टीम के सदस्यों का भी धन्यवाद किया और अपनी पोस्ट का समापन इस टिप्पणी के साथ किया, "सत्य की हमेशा जीत होती है!"
यह घटनाक्रम अन्नामलाई द्वारा यह घोषणा किए जाने के कुछ दिनों बाद हुआ है कि उनका नया शुरू किया गया "वी द लीडर्स" (We the Leaders) आंदोलन जुलाई में एक राजनीतिक पार्टी में बदलने की राह पर है। उन्होंने कहा है कि संगठन का लक्ष्य 50 लाख सदस्य बनाना और तमिलनाडु में खुद को लोगों पर केंद्रित राजनीतिक विकल्प के तौर पर स्थापित करना है। इसके लिए संगठन राज्य में गवर्नेंस, भ्रष्टाचार और ड्रग्स की बढ़ती समस्या जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
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