पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी कूटनीतिक कोशिशों के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर घालीबाफ ने बुधवार को साफ कर दिया कि तेहरान अमेरिका के साथ शांति वार्ता के अगले चरण में तब तक कदम नहीं बढ़ाएगा, जब तक कि 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत किए गए मुख्य वादे—विशेष रूप से लेबनान में युद्ध खत्म करने की गारंटी—पूरे नहीं हो जाते। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ISNA के मुताबिक, एक टेलीविजन इंटरव्यू में घालीबाफ ने जोर देकर कहा कि ईरान के परमाणु अधिकारों और उसकी राष्ट्रीय 'रेड लाइन्स' (अहम शर्तों) पर किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
ISNA के अनुसार, घालीबाफ ने मंगलवार को एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम 'परमाणु अप्रसार संधि' (NPT) के दायरे में और 'अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी' (IAEA) की निगरानी में चल रहा है।
उन्होंने कहा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान 'परमाणु अप्रसार संधि' (NPT) का सदस्य है और 'अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी' की निगरानी में है। वह यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) को अपना अधिकार मानता है। NPT की शर्तों का पालन किया जा रहा है, लेकिन ईरान के परमाणु अधिकारों और 'रेड लाइन्स' पर कोई समझौता नहीं हो सकता। इन्हें इस्लामिक रिपब्लिक की ताकत और अमेरिकी ज्यादतियों के खिलाफ गारंटी का हिस्सा माना जाता है।"
अंतर्राष्ट्रीय गारंटियों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए, घालीबाफ ने 2015 के परमाणु समझौते 'जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन' (JCPOA) के साथ ईरान के अनुभव का हवाला दिया।
उन्होंने कहा, "JCPOA के अनुभव ने दिखाया है कि सुरक्षा परिषद द्वारा पुष्टि (रैटिफिकेशन) भी कोई कार्यकारी गारंटी नहीं बनाती है।" घालीबाफ ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए MoU में वाशिंगटन ने लेबनान में युद्ध खत्म करने का वादा किया था।
उन्होंने कहा, "समझौता ज्ञापन के अनुच्छेद 1 में, अमेरिका ने वादा किया है और गारंटी दी है कि लेबनान में युद्ध खत्म होगा, कोई सैन्य कार्रवाई नहीं होगी, लोग अपनी जमीन पर लौटेंगे और लेबनान की राष्ट्रीय संप्रभुता उसकी जमीन पर कायम रहेगी। यह एक बहुत बड़ी जीत है और इसे हासिल किया जाना चाहिए, और अब हम इसे पूरी तरह से लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि ईरान MoU के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और उम्मीद करता है कि अमेरिका भी ऐसा ही करेगा। उन्होंने कहा, "इस्लामिक रिपब्लिक यह पक्का करने के लिए प्रतिबद्ध है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही उस मेमोरेंडम के अनुसार हो, और अमेरिका को भी ऐसा ही करना चाहिए।"
यह चेतावनी देते हुए कि अगर वादों को पूरा नहीं किया गया तो ईरान तनाव बढ़ाने के लिए तैयार है, घालीबाफ ने कहा, "हम बातचीत भी कर रहे हैं, और अगर वे बातचीत में अपने वादों को पूरा नहीं करना चाहते हैं, तो हम युद्ध के लिए तैयार हैं।"
घालीबाफ ने कहा कि मेमोरेंडम में लेबनान से जुड़ी शर्तों को लागू करने की निगरानी के लिए ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति बनाई गई है और कहा कि बातचीत तब तक जारी रहेगी जब तक कि पांच मुख्य शर्तों को पूरी तरह से लागू नहीं कर दिया जाता।
उन्होंने कहा, "हमने लेबनान के मुद्दे को प्राथमिकता दी, और आज आप देख रहे हैं कि वहां काफी हद तक शांति कायम हो गई है। इस पर गंभीरता से काम हो रहा है और बातचीत अभी भी जारी है। जब तक ये पांच शर्तें - जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण लेबनान का मुद्दा है - पक्की और अंतिम रूप से तय नहीं हो जातीं, तब तक हम मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग की अन्य शर्तों को लागू करने के अगले चरण में नहीं जाएंगे।"
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पश्चिम एशिया में महीनों से जारी भीषण सैन्य टकराव को शांत करने के लिए जहां एक तरफ वाशिंगटन और तेहरान कूटनीतिक टेबल पर हैं, वहीं दूसरी तरफ इजराइल के कड़े रुख ने इस शांति प्रक्रिया पर संशय के बादल मंडरा दिए हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को दोटूक चेतावनी देते हुए कहा है कि इजराइल अपनी सुरक्षा के लिए ईरान पर 'तीसरी बार' भी हमला करने से पीछे नहीं हटेगा। नेतन्याहू के इस बयान ने साफ कर दिया है कि भले ही अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत चल रही हो, लेकिन इजराइल के लिए सैन्य कार्रवाई का विकल्प आज भी पूरी तरह खुला हुआ है।
'परमाणु तबाही को हमने रोका, आगे भी कड़ा एक्शन संभव'
इजराइल के 'चैनल 14' से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने तेहरान के खिलाफ किए गए पिछले सैन्य ऑपरेशन्स का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा:
"ईरान में, हमने खुद को परमाणु बमों की तबाही से बचाया है। अगर हमारी सुरक्षा चिंताएं हल नहीं हुईं, तो जरूरत पड़ने पर तीसरी बार भी ऐसा ही हमला किया जाएगा। इजराइल, ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा और इसके लिए हम स्वतंत्र रूप से कार्रवाई जारी रखेंगे।"
तुर्की की सरकारी 'अनादोलु एजेंसी' के अनुसार, नेतन्याहू का यह बयान किसी भी ऐसे वैश्विक समझौते के प्रति इजराइल के कड़े विरोध को दर्शाता है, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट नहीं करता।
नाजुक मोड़ पर शांति वार्ता: 'इस्लामाबाद ढांचा' और ट्रंप की चेतावनी
इजराइल की यह आक्रामक चेतावनी ऐसे समय में आई है जब कतर की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच 18 जून को हुए शुरुआती युद्धविराम समझौते (इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन) को एक स्थायी राजनीतिक शांति संधि में बदलने की कोशिशें जारी हैं। इस ड्राफ्ट मेमोरेंडम में निम्नलिखित मुख्य बिंदु शामिल हैं:
चरणबद्ध तरीके से दोनों देशों के बीच सैन्य आक्रामकता को रोकना। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को जहाजों के लिए सुरक्षित खोलना। ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और उसकी परमाणु गतिविधियों की कड़े अंतरराष्ट्रीय तंत्र से निगरानी।
डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू को टोका:
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल को संयम बरतने की सख्त हिदायत दी है। मीडिया संस्थान Axios के मुताबिक, ट्रंप ने नेतन्याहू को आगाह करते हुए कहा है कि यदि इजराइल ने दोबारा बड़ा हमला किया, तो वह वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक रूप से अलग-थलग (Isolate) पड़ सकता है। ट्रंप ने कहा, "मैंने कहा, 'बिबी, तुम्हें सावधान रहना चाहिए, वरना बहुत जल्द तुम दुनिया में अकेले पड़ जाओगे।'"
लेबनान को लेकर इज़राइल-ईरान के बीच लड़ाई
इन कोशिशों के बावजूद तनाव बना हुआ है। बेरूत में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर इज़राइली हमलों के बाद, ईरान ने इज़राइल की ओर मिसाइलें दागीं, जिसके जवाब में इज़राइल ने ईरान के अंदर मौजूद ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की।
अमेरिका ने इन हमलों में सीधे तौर पर हिस्सा नहीं लिया, लेकिन इज़राइल के हवाई सुरक्षा अभियानों में मदद की।
नेतन्याहू ने सैन्य अभियान का बचाव जारी रखा है। उनका दावा है कि इज़राइली अभियानों ने ईरान और हिज़्बुल्लाह दोनों को काफी कमज़ोर कर दिया है और जिसे उन्होंने तत्काल परमाणु खतरा बताया था, उसे टाल दिया है।
नेतन्याहू का लेबनान दौरा
इसी माहौल में, नेतन्याहू ने मंगलवार को दक्षिणी लेबनान में इज़राइल के कब्ज़े वाले इलाकों का दौरा किया और वादा किया कि बेरूत के साथ हालिया सुरक्षा समझौतों के बावजूद इज़राइली सेना वहां बनी रहेगी।
नेतन्याहू ने इज़राइली सैनिकों से कहा, "हमारा ज़ोर इस बात पर है कि जब तक खतरा खत्म नहीं हो जाता, हम दक्षिणी लेबनान नहीं छोड़ेंगे।"
उन्होंने कहा, "और जब तक हिज़्बुल्लाह यहां हथियारबंद होकर हमें धमकाता रहेगा, हम भी यहीं बने रहेंगे।"
यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका समर्थित सुरक्षा व्यवस्था के तहत कुछ खास इलाकों से इज़राइल के सीमित रूप से पीछे हटने और लेबनान की सेना का नियंत्रण बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके बाद नेतन्याहू का कब्ज़े वाले लेबनानी इलाके का यह पहला दौरा था।
वाशिंगटन और तेहरान मौजूदा ढांचे को एक पक्के समझौते में बदलने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि इज़राइल एकतरफा सैन्य कार्रवाई का अपना अधिकार बनाए हुए है। ऐसे में आने वाले हफ़्तों में यह तय हो सकता है कि कूटनीति कामयाब रहती है या यह इलाका फिर से टकराव की ओर बढ़ता है।
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