Government Employees News Update: सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा ऐलान! खाते में आएंगे ₹20 हजार |
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं। बड़सर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार अब तक 2,170 करोड़ रुपये से अधिक के वेतन और पेंशन एरियर का भुगतान कर चुकी है। ग्रुप D कर्मचारियों को इसी महीने वेतन एरियर की 20 हजार रुपये की अतिरिक्त किस्त मिलेगी। वहीं 2016 से दिसंबर 2021 के बीच रिटायर हुए ग्रुप C पेंशनर्स को एरियर का 30% और ग्रुप A-B पेंशनर्स को 15% हिस्सा इसी महीने दिया जाएगा। इन भुगतानों पर करीब 281 करोड़ रुपये खर्च होंगे।Mood Swing Issue: 5 वजहों से हो सकता है मूड स्विंग! इन आसान तरीकों से रखें अपने मूड को कंट्रोल
Mood Swing Issue: कभी बिना किसी बड़ी वजह के अचानक गुस्सा आना, फिर कुछ देर बाद उदास महसूस करना या छोटी-सी बात पर जरूरत से ज्यादा खुश हो जाना-मूड में ऐसे बदलाव कई लोगों को परेशान करते हैं। हर बार इसे सिर्फ स्वभाव का हिस्सा मानना सही नहीं है। हमारी नींद, खान-पान, तनाव और रोजमर्रा की आदतों का सीधा असर मानसिक स्थिति और भावनाओं पर पड़ सकता है। अगर मूड स्विंग बार-बार हो रहे हैं, तो इसके पीछे की वजह समझना जरूरी है।
मूड में कभी-कभार बदलाव सामान्य हैं, लेकिन जब ये बदलाव काम, रिश्तों या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगें तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अच्छी बात यह है कि कई मामलों में लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव करके मूड को काफी हद तक स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
मूड स्विंग के 5 कारण और काबू करने के तरीके
नींद की कमी
पर्याप्त नींद न लेने से शरीर और दिमाग दोनों प्रभावित होते हैं। लगातार कम नींद लेने पर चिड़चिड़ापन, गुस्सा और बेचैनी बढ़ सकती है। देर रात तक मोबाइल चलाना या सोने का समय रोज बदलना भी नींद की गुणवत्ता खराब कर सकता है।
क्या करें: रोज लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें। सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें और शांत माहौल में पर्याप्त नींद लें।
लगातार तनाव
काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां या किसी बात की लगातार चिंता मूड को अस्थिर कर सकती है। तनाव बढ़ने पर छोटी-सी बात भी बड़ी लगने लगती है और व्यक्ति जल्दी गुस्सा या परेशान हो सकता है।
क्या करें: दिन में कुछ समय अपने लिए निकालें। गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज, मेडिटेशन, हल्की वॉक या पसंदीदा गतिविधि तनाव कम करने में मदद कर सकती है।
खान-पान में गड़बड़ी
लंबे समय तक भूखे रहना, बहुत ज्यादा मीठा या अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड लेना और भोजन का अनियमित समय भी ऊर्जा और मूड में उतार-चढ़ाव से जुड़ा हो सकता है।
क्या करें: भोजन में प्रोटीन, फाइबर, साबुत अनाज, सब्जियां और फल शामिल करें। लंबे समय तक खाली पेट रहने से बचें और पर्याप्त पानी पिएं।
हार्मोनल बदलाव
हार्मोन में होने वाले बदलाव भी मूड पर असर डाल सकते हैं। खासकर महिलाओं में मासिक धर्म के आसपास होने वाले हार्मोनल परिवर्तन के दौरान चिड़चिड़ापन, उदासी या भावनात्मक संवेदनशीलता बढ़ सकती है। उम्र और अन्य शारीरिक बदलाव भी भूमिका निभा सकते हैं।
क्या करें: अगर मूड स्विंग लगातार या बहुत ज्यादा हो रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। बिना जांच के हार्मोन या कोई दवा लेना उचित नहीं है।
बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम और कम शारीरिक गतिविधि
लगातार मोबाइल या लैपटॉप पर समय बिताना और दिनभर बैठे रहना भी मानसिक थकान बढ़ा सकता है। शारीरिक गतिविधि की कमी से तनाव और सुस्ती महसूस हो सकती है।
क्या करें: रोज कुछ समय वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज के लिए निकालें। काम के बीच छोटे ब्रेक लें और अनावश्यक स्क्रीन टाइम कम करें।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी?
अगर मूड में बहुत तेज और बार-बार बदलाव हो रहे हैं, कई दिनों तक उदासी या चिड़चिड़ापन बना रहता है, नींद और भूख में बड़ा बदलाव आता है या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। कुछ स्थितियों में मूड स्विंग किसी मानसिक या शारीरिक समस्या का संकेत भी हो सकते हैं।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
अगर आपको यह खबर उपयोगी लगी हो, तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना न भूलें और हर अपडेट के लिए जुड़े रहिए [haribhoomi.com] के साथ।
लेखक: (कीर्ति)
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
IBC24
Haribhoomi







