Atal Bihari Vajpayee को Babulal Marandi ने दी श्रद्धांजलि, बताया झारखंड का निर्माता
झारखंड भाजपा नेताओं ने रविवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और अन्य नेता विधानसभा परिसर पहुंचे तथा वाजपेयी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके योगदान को याद किया। मरांडी ने पत्रकारों से कहा, अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के अजातशत्रु थे।
अगर झारखंड के निर्माण का श्रेय किसी एक व्यक्ति को दिया जा सकता है, तो वह अटल बिहारी वाजपेयी हैं। झारखंड के सभी निवासी उनके ऋणी हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा में समर्पित कर दिया।
1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण की अनुमति देकर उन्होंने भारत को परमाणु हथियारों के मामले में आत्मनिर्भर बनाया। इसके अलावा, उन्होंने स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना की आधारशिला रखी और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी आज अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं और उनके छोटे से कार्यकाल में शुरू किए गए विकास कार्यों को जारी रखे हुए हैं।
वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के पहले नेता थे, जो देश के प्रधानमंत्री बने थे। उनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था और 16 अगस्त 2018 को नयी दिल्ली में उनका निधन हुआ।
Vijay Wadettiwar बोले, Census में ओबीसी कॉलम बिना जनगणना अधूरी रहेगी
महाराष्ट्र में कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने रविवार को दावा किया कि यदि केंद्र सरकार जनगणना के प्रश्नावली में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए अलग से एक कॉलम शामिल नहीं करती है, तो जनगणना अधूरी रहेगी। वडेट्टीवार ने यहां संवाददाताओं से कहा कि केवल जाति के बारे में पूछे जाने से ओबीसी की वास्तविक संख्या का पता नहीं चलेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सही आंकड़े जुटाने के लिए सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखने की जरूरत है।
शुक्रवार को केंद्र सरकार ने जनगणना के दौरान लोगों से पूछे जाने वाले 40 सवालों को अधिसूचित किया। एक सरकारी आदेश के अनुसार, इनमें जाति और कोविड-19 टीकाकरण का स्थान भी शामिल है। बर्फ से ढके रहने वाले क्षेत्रों में जनगणना का चरण एक सितंबर से शुरू होगा।
देश के बाकी हिस्सों में जनसंख्या गणना अगले वर्ष शुरू होगी। यह पहली बार होगा जब जनगणना के दौरान जाति से संबंधित जानकारी भी जुटाई जाएगी। जारी आदेश के मुताबिक, जनगणना के दौरान पूछा जाएगा कि व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित है या नहीं और उसकी जाति क्या है।
राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के अध्यक्ष बाबन तयवाड़े के इस बयान का जिक्र करते हुए कि अन्य पिछड़ा वर्ग ने अपनी आधी लड़ाई जीत ली है, वडेट्टीवार ने कहा कि ओबीसी समुदाय के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए जाति आधारित जनगणना बेहद महत्वपूर्ण है। कांग्रेस नेता ने दावा किया, ‘‘हालांकि, यदि केंद्र सरकार की ओर से जारी जनगणना प्रश्नावली में ओबीसी के लिए अलग से कोई कॉलम नहीं है, तो यह जनगणना अधूरी रहेगी।’’ उन्होंने कहा कि केवल जाति के बारे में पूछने से ओबीसी की वास्तविक संख्या का पता नहीं चलेगा, इसलिए यह कहना सही नहीं है कि ओबीसी ने अपनी लड़ाई जीत ली है।
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