Bangladesh Politics Update: बांग्लादेश में फिर बड़े राजनीतिक उलटफेर के संकेत, जमात-ए-इस्लामी पर दोबारा बैन लगाने की मांग
दक्षिण एशिया के महत्वपूर्ण देश बांग्लादेश में आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक समीकरणों को लेकर एक बार फिर भारी उथल-पुथल की स्थिति पैदा हो गई है। वर्ष 2024 के ऐतिहासिक छात्र आंदोलन और तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बनी नई राजनीतिक व्यवस्था को अब दोतरफा मोर्चों पर बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
एक तरफ जहाँ सत्ताधारी गठबंधन के भीतर ही कट्टरपंथी विचारधारा वाले संगठन 'जमात-ए-इस्लामी' पर दोबारा पूर्ण प्रतिबंध लगाने की विधिक मांग उठ खड़ी हुई है, वहीं दूसरी तरफ भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सार्वजनिक रूप से अपने देश वापस लौटने की हुंकार भरकर वर्तमान सरकार की रातों की नींद उड़ा दी है।
बीएनपी सांसद ने संसद में उठाई मांग, कहा- 1971 के विरोधियों और 'फासीवादियों' को पूरी तरह बैन करो
इस नए विवाद की शुरुआत बांग्लादेश की संसद में 22 जून 2026 को हुई कार्यवाही के दौरान हुई। सत्तारूढ़ गठबंधन की मुख्य पार्टी बीएनपी के सांसद रफीकुल इस्लाम ने संसद के पटल पर जमात-ए-इस्लामी की राजनीति पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की कड़क मांग उठाई।
रफीकुल इस्लाम ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि जिन ताकतों और पार्टियों ने साल 1971 के ऐतिहासिक स्वाधीनता संग्राम का विरोध किया था और जो आज भी धर्म का राजनीतिक शोषण कर रही हैं, उन्हें देश की मुख्यधारा की राजनीति में रहने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने जमात को 'फासीवादियों की तरह' प्रतिबंधित करने की वकालत करते हुए मस्जिदों को भी हर तरह की राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने की अपील की।
जमात-ए-इस्लामी का तीखा पलटवार, पूछा- क्या देश में एक-दलीय शासन स्थापित करना चाहते हैं?
संसद में उठे इस प्रतिबंध के सुरों पर मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी जमात-ए-इस्लामी ने बेहद तीखी और आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के सांसद एटीएम अज़हरुल इस्लाम ने संसद की कार्यवाही के दौरान सत्तारूढ़ दल को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि यदि विपक्ष की सबसे मजबूत आवाज पर ही प्रतिबंध लगा दिया जाएगा, तो उस खाली जगह को कौन भरेगा? क्या बीएनपी अकेले पूरे देश को चलाना चाहती है या वे देश में तानाशाही और एक-दलीय शासन व्यवस्था स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं?
गौरतलब है कि जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के बाद शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के पतन के साथ ही जमात पर लगा पुराना प्रतिबंध हटा लिया गया था, जिसके बाद फरवरी 2026 के आम चुनावों में इस पार्टी ने 68 सीटें जीतकर तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार के सामने एक मजबूत और कड़क चुनौती पेश की है।
जमात ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार चार महीने बीत जाने के बाद भी नया राष्ट्रपति बनाने के लिए कोई उपयुक्त व्यक्ति नहीं ढूंढ पाई है, इसलिए जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
'मैं इसी साल अपने देश वापस आऊंगी': शेख हसीना के इंटरव्यू से मची खलबली
इन तमाम अंदरूनी विवादों के बीच बांग्लादेश की राजनीति में सबसे बड़ा धमाका पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के ताजा बयान से हुआ है। एक विशेष इंटरव्यू के दौरान शेख हसीना ने अपनी वापसी के प्लान को पूरी तरह साफ करते हुए कहा कि वे बहुत जल्द अपने वतन लौटेंगी। हसीना ने कहा कि वे पांच बार देश की प्रधानमंत्री चुनी गईं और उन्होंने बांग्लादेश के अभूतपूर्व विकास और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी पूरी जिंदगी समर्पित कर दी है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बीएनपी सरकार के साथ किसी भी तरह की गुप्त या बैकचैनल बातचीत की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है, क्योंकि जनता के संवैधानिक अधिकार किसी सौदेबाजी का विषय नहीं हो सकते। शेख हसीना ने दृढ़ता से कहा कि वे हर बाधा और राजनीतिक साजिश को पार करते हुए इसी साल बांग्लादेश की धरती पर कदम रखेंगी, जिससे आने वाले दिनों में देश का सियासी पारा और अधिक चढ़ना तय माना जा रहा है।
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