टीवी की 'किन्नर बहू' फ्यूजन ड्रेस में लगीं ग्लैमरस, 8 Photos से फैंस की नहीं हट रही नजर
एक्ट्रेस रुबीना दिलैक अपनी एक्टिंग के साथ-साथ अपने फैशन सेंस के लिए भी जानी जाती हैं।16 अगस्त को रुबीना ने इंस्टाग्राम पर अपनी कुछ तस्वीरें शेयर कीं, जिनमें उनका बेहद एलिगेंट और रॉयल अंदाज देखने को मिला। आइए दिखाते हैं, 8 फोटोज में उनकी ब्यूटी।
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय क्यों बजाई जाती है घंटी? जानें इसका धार्मिक महत्व और सही नियम
Shivling jalabhishek mahatva: हिंदू धर्म में शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय घंटी बजाने की परंपरा अत्यंत प्राचीन काल से चली आ रही है। मान्यता है कि जलाभिषेक के साथ-साथ घंटी की गूंज भी उतनी ही आवश्यक मानी जाती है, क्योंकि इससे भगवान शिव का ध्यान आकर्षित होता है और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि सावन के महीने में शिव मंदिरों में जलाभिषेक के दौरान लगातार घंटी की मधुर ध्वनि सुनाई देती है।
जलाभिषेक के दौरान घंटी बजाने की धार्मिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव को अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होने वाला देवता माना जाता है, और उन्हें "आशुतोष" के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि जलाभिषेक के समय घंटी बजाने से भगवान शिव का ध्यान भक्त की पूजा की ओर आकर्षित होता है, जिससे उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा घंटी की ध्वनि को नकारात्मक शक्तियों को दूर भगाने वाला भी माना जाता है, जिससे शिवलिंग के आसपास का वातावरण पूरी तरह पवित्र बना रहता है।
कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि घंटी की निरंतर गूंजती ध्वनि भक्त के मन को एकाग्र करने में सहायक होती है, जिससे पूजा के दौरान ध्यान भटकता नहीं है।
जलाभिषेक करने का सही तरीका
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, शिवलिंग पर जल हमेशा तांबे या चांदी के लोटे से अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जल की धारा को धीरे-धीरे और निरंतर शिवलिंग पर गिराना चाहिए, ताकि यह एक अखंड धारा के रूप में प्रवाहित हो। इसके साथ ही "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते हुए जलाभिषेक करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
इसके अलावा यह भी मान्यता है कि जलाभिषेक करते समय भक्त को शिवलिंग के ठीक सामने खड़े होने के बजाय थोड़ा साइड में खड़े होना चाहिए, क्योंकि शिवलिंग के जलहरी (निर्गम मार्ग) की दिशा में खड़े होना वर्जित माना जाता है।
सावन में क्यों बढ़ जाता है जलाभिषेक का महत्व?
सावन के पवित्र महीने को भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। इस दौरान शिवभक्त बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं और घंटी बजाकर भगवान शिव का ध्यान करते हैं। मान्यता है कि सावन के सोमवार को किया गया जलाभिषेक विशेष रूप से फलदायी होता है, और इससे समस्त पापों का नाश होता है।
घंटी बजाने से जुड़े कुछ जरूरी नियम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घंटी को हमेशा शांत मन से और लयबद्ध तरीके से बजाना चाहिए, न कि जल्दबाजी या उतावलेपन में। मान्यता है कि जलाभिषेक करते समय घंटी की ध्वनि निरंतर बनी रहनी चाहिए, ताकि पूजा में पूर्ण एकाग्रता बनी रहे। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि घर में शिवलिंग की पूजा करते समय भी छोटी घंटी का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है।
आज भी हर शिव मंदिर में निभाई जाती है यह परंपरा
समय के साथ भले ही पूजा-पाठ के तरीकों में कुछ बदलाव आया हो, लेकिन जलाभिषेक के दौरान घंटी बजाने की यह परंपरा आज भी उतनी ही श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। आज भी देशभर के शिव मंदिरों में भक्त जलाभिषेक करते समय घंटी बजाकर भगवान शिव से अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी भी उपाय या धार्मिक कर्मकांड को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान से सलाह अवश्य लें।
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