बेलफास्ट, 28 जून (आईएएनएस)। आयरलैंड के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज जय मूंदड़ा को भारत के खिलाफ टी20 सीरीज के अंतिम मुकाबले में 'प्लेयर ऑफ द मैच' और 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' चुना गया। भारत में जन्मे इस खिलाड़ी ने सीरीज के पहले मैच में 25 रन देकर 2 विकेट, जबकि अगले मुकाबले में 32 रन देकर 3 विकेट हासिल किए। आयरलैंड ने पहली बार भारत के खिलाफ टी20 सीरीज जीती है, जिसके बाद जय ने कहा कि इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने का उनका पहला अनुभव 'शानदार' रहा।
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हिंदू धर्म में शनिदेव को न्याय और कर्मफल देवता माना जाता है। शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल देते हैं। स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण और अन्य कई धार्मिक ग्रंथों में शनि देव को न्यायाधीश का पद मिलने की कथा का उल्लेख है। शास्त्रों के मुताबिक ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को शनिदेव का जन्म हुआ था। इस कारण हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है। इस बार 16 मई 2026 को शनि जयंती मनाई जाती है। वहीं शनिवार का दिन पड़ने के कारण इसका महत्व और भी अधिक माना जा रहा है। तो आइए जानते इस दिन की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...
तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक इस बार 16 मई की सुबह 05:11 मिनट से ज्येष्ठ माह के अमावस्या तिथि की शुरूआत होगी। वहीं 17 मई की रात 01:30 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 16 मई 2026 को शनि जयंती मनाई जाएगी।
पूजन विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इस दिन नीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए। फिर सूर्योदय से पहले पीपल के पेड़ को जल अर्पित करें और पीपल पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद शनिदेव को उड़द दाल, काले तिल, नीले फूल और तेल आदि अर्पित करें। अगर घर के पास शनि मंदिर है तो वहां पर पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठें और चाहें तो घर के मंदिर में भी बैठ सकते हैं। अब रुद्राक्ष की माला से शनि देव के मंत्रों का जाप करें।
मंत्र
ओम शं शनैश्चराय नमः
ओम शन्नो देविर्भिष्ठयः आपो भवन्तु पीतये।
ओम नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
ओम प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
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