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आरबीआई ब्याज दरों पर फैसले को लेकर 'वेट एंड वॉच' मोड में, मध्य पूर्व तनाव बड़ा जोखिम : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 16 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) नीतिगत दरों (ब्याज दरों) पर फैसले को लेकर वेट एंड वॉच मोड में बना हुआ है और मध्य पूर्व तनाव के समाधान को लेकर बनी हुई अनिश्चितता मैन्युफैक्चरिंग इनपुट लागत के लिए एक बड़ा जोखिम बनी हुई है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

यस बैंक की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि फिलहाल आरबीआई आपूर्ति पक्ष से आ रहे महंगाई के दबाव को नजरअंदाज कर वेट एंड वॉच मोड में बना हुआ है। हालांकि, इसमें लगातार इजाफा हो रहा है, जो दिखाता है कि आपूर्ति पक्ष में हाल में आया झटका पूरी तरह से उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है।

इससे आने वाले समय में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना शून्य नहीं होती है।

यस बैंक ने अपने नोट में अनुमान जताया है कि थोक महंगाई दर इस साल 9 प्रतिशत और खुदरा महंगाई दर 4.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।

खुदरा और थोक महंगाई के बीच अंतर बना हुआ है, इसलिए थोक से खुदरा तक महंगाई के असर पास होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, नोट में कहा गया, हमें लगता है कि सरकार तेल कंपनियों के अंडर-रिकवरी का बोझ पेट्रोल और डीजल की पंप कीमतों पर डालने से हिचकिचाएगी।

जुलाई के लिए मुख्य थोक महंगाई सालाना आधार पर 9.8 प्रतिशत रही, जो उम्मीदों (9.75 प्रतिशत) के अनुरूप है और जून के 9.9 प्रतिशत के मुकाबले इसमें थोड़ी कमी आई है।

यस बैंक ने अपने नोट में कहा, हालांकि इनपुट कीमतों को लेकर चिंताएं कुछ कम हुई हैं, लेकिन अहम मुद्दा यह है कि क्या यह स्थिति बनी रहेगी, क्योंकि वेस्ट एशिया संकट के समाधान को लेकर अनिश्चितता है। हम थोक से रिटेल तक महंगाई के असर का अंदाजा लगने का इंतजार कर रहे हैं। साथ ही, मुख्य खुदरा महंगाई बढ़ने की उम्मीदों के बावजूद, हम अपनी इस राय पर कायम हैं कि आरबीआई को इंतजार करो और देखो की नीति अपनानी चाहिए और ब्याज दरों में बदलाव को टालना चाहिए।

जुलाई के थोक महंगाई आंकड़ों में, मुख्य कैटेगरी की कीमतों में बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि मैन्युफैक्चर्ड कैटेगरी में कीमतों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

उत्पादक पक्ष पर, आउटपुट पीपीआई मोटे तौर पर थोक कीमतों के ट्रेंड के अनुरूप रहा, जबकि इनपुट पीपीआई से कुछ राहत मिली क्योंकि लगातार दूसरे महीने इनपुट लागत में कमी आई; इसकी एक वजह पेट्रोलियम और केमिकल से जुड़े इनपुट की कीमतों में नरमी थी।

हालांकि, नोट में कहा गया है कि जुलाई में अधिकतर ग्लोबल कमोडिटी की कीमतें स्थिर रहीं और अगस्त के लिए भी ऐसे ही ट्रेंड दिख रहे हैं।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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'पापा मम्मी को खूब पीटते थे...', हिमांशी खुराना ने सुनाया खौफनाक किस्सा, बोलीं- 'मैं रात में रोती थी'

Himanshi Khurana Recalls Childhood Trauma: ‘बिग बॉस 13’ से देशभर में पहचान बनाने वाली पंजाबी एक्ट्रेस और सिंगर हिमांशी खुराना इन दिनों अपने एक पॉडकास्ट इंटरव्यू को लेकर चर्चा में हैं. जी हां, हिमांशी ने पारस छाबड़ा के पॉडकास्ट में अपनी निजी जिंदगी से जुड़े कई ऐसे अनुभव साझा किए, जिन्हें सुनकर किसी का भी दिल भर आए. बातचीत के दौरान उन्होंने अपने बचपन के उस दौर को याद किया जब उन्होंने घर में कथित तौर पर हिंसा, आर्थिक परेशानियां और माता-पिता के बीच तनाव देखा.

हिमांशी ने बताया कि उनके पिता शराब के नशे में उनकी मां के साथ मारपीट करते थे. उन्होंने दावा किया कि कई बार उनकी मां इतनी बुरी तरह घायल हो जाती थीं कि बेहोश हो जाती थीं और एक बार उनका हाथ तक टूट गया था. उस वक्त हिमांशी खुद काफी छोटी थीं और अपने छोटे भाई को लेकर घर से बाहर निकल जाती थीं, ताकि किसी को बुलाकर अपनी मां की मदद करवा सकें.

‘पापा शराब में टुन्न रहते थे और मम्मी को बहुत मारते थे’

पारस छाबड़ा से बातचीत में हिमांशी ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपने माता-पिता के रिश्ते में काफी तनाव देखा. उनके मुताबिक, घर में अक्सर लड़ाई-झगड़े और हिंसा का माहौल रहता था. हिमांशी ने बताया कि कई बार घर में खाना तक नहीं बन पाता था. कभी राशन नहीं होता था तो कभी घर के हालात ऐसे होते थे कि खाना बनाना मुश्किल हो जाता था. इसका असर बच्चों पर भी पड़ता था और कई बार उन्हें भूखे रहना पड़ता था.

उन्होंने बताया कि वो और उनका भाई कई बार बिना नाश्ता किए स्कूल चले जाते थे. अगर मां कुछ पैसे दे देती थीं तो वो स्कूल की कैंटीन से कुछ खा लेते थे. घर लौटने पर कई बार खाना तैयार नहीं मिलता था. हिमांशी ने कहा कि उनके पिता शराब के नशे में रहते थे और इसी दौरान उनकी मां के साथ मारपीट करते थे. बचपन में इस तरह का माहौल देखना उनके लिए बेहद मुश्किल था.

‘भगवान, तू ही मेरा बाप है’

हिमांशी ने बताया कि उस उम्र में उन्हें समझ नहीं आता था कि वो अपनी परेशानियां किससे शेयर करें या अपनी जरूरतों के लिए किससे उम्मीद रखें. उन्होंने कहा कि वो इतनी छोटी थीं कि परिवार में चल रही परिस्थितियों को पूरी तरह समझ भी नहीं पाती थीं, लेकिन उन्हें ये जरूर महसूस होता था कि कुछ सही नहीं है. इसी दौरान उन्होंने भगवान से जुड़ी एक बात अपने मन में कही थी. हिमांशी ने बताया कि उन्होंने भगवान से कहा था कि ‘भगवान, तू ही मेरा बाप है.’ उनके मुताबिक, जिस व्यक्ति को दुनिया में उनके पिता के रूप में भेजा गया था उससे वो कुछ मांग नहीं सकती थीं. इसलिए उन्हें लगता था कि भगवान ही उनके लिए पिता जैसी भूमिका निभा रहे हैं.

‘भाई को गोद में उठाकर बाहर भाग जाती थी’

हिमांशी ने अपने बचपन की सबसे मुश्किल यादों में से एक को साझा करते हुए बताया कि जब उनके पिता उनकी मां के साथ मारपीट शुरू करते थे तो वो अपने छोटे भाई को गोद में उठाकर घर से बाहर निकल जाती थीं. उन्होंने बताया कि उस समय वो छठी या सातवीं क्लास में पढ़ती थीं. घर में जब रात के समय हिंसा होती थी तो वो बेहद डर जाती थीं. ऐसे मौकों पर उनका ध्यान अपने छोटे भाई की सुरक्षा पर होता था. हिमांशी के मुताबिक, वो भाई को लेकर घर से बाहर निकलती थीं और रास्ते में जो भी व्यक्ति मिलता, उससे मदद की गुहार लगाती थीं. वो लोगों से कहती थीं कि उनके घर चलकर उनकी मां को बचाएं. उन्होंने बताया कि कई बार उनकी मां बेहोश हो जाती थीं. हिमांशी ने ये भी दावा किया कि मारपीट के दौरान उनकी मां को गंभीर चोटें आईं और एक बार उनका हाथ तक टूट गया था.

बचपन में ही उठानी पड़ी बड़ी जिम्मेदारी

जिस उम्र में बच्चों को पढ़ाई, खेल और दोस्तों के साथ समय बिताने की चिंता होती है उस उम्र में हिमांशी को अपने छोटे भाई और मां की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहना पड़ता था. घर में होने वाली हिंसा का असर उनके मन पर गहरा पड़ा. रात के समय जब घर के बाकी लोग सो जाते थे, तब हिमांशी अकेले रोती थीं. उन्होंने बताया कि वो उस समय काफी डर और तनाव में रहती थीं. 

आज भी शोर और लड़ाई पसंद नहीं

हिमांशी ने बताया कि बचपन के उन अनुभवों का असर आज भी उनकी जिंदगी पर है. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने आसपास शांति और सुकून पसंद है. वो घर में ज्यादा शोर-शराबा या लड़ाई-झगड़ा बिल्कुल पसंद नहीं करतीं. बचपन में घर के अंदर जिस तरह का माहौल उन्होंने देखा, उसकी वजह से आज भी तेज आवाज, बहस या हिंसक माहौल उन्हें परेशान कर सकता है.

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