सीएम योगी ने शुरू की अनोखी योजना, पूर्वजों की याद में गांव होंगे विकास कार्य; लगेगी सम्मान पट्टिका
UP News: योगी सरकार राज्य में कई योजनाएं चला रही है. ऐसे में सीएम योगी ने एक ऐसी योजना का एलान किया है. जिससे लोग दशकों तक आपके पूर्वजों को याद रखेंगे. अगर आप भी गांव से जुड़े हुए हैं और वहां कुछ ऐसा काम कराना चाहते हैं, जो लंबे समय तक लोगों के काम आए और आपके पूर्वजों की याद भी जीवित रखे, तो मुख्यमंत्री मातृभूमि योजना आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है. क्योंकि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की इस पहल में प्रवासी या गांव से जुड़े इच्छुक लोग विकास कार्यों में आर्थिक सहयोग देकर गांव के विकास में अपनी भी भागीदारी निभा सकते हैं. इस योजना के तहत आपके पूर्वजों के नाम की भी सम्मान पट्टिका गांव में लगाई जाएगी.
सरकार करेगी मदद, 40 फीसदी देगी अंशदान
मुख्यमंत्री मातृभूमि योजना के तहत प्रस्तावित विकास कार्य की कुल लागत का 60 प्रतिशत हिस्सा संबंधित व्यक्ति को देना होता है. बाकी 40 प्रतिशत राशि उत्तर प्रदेश सरकार पंचायती राज विभाग के माध्यम से अनुदान के रूप में उपलब्ध कराती है. योजना का मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में जनभागीदारी बढ़ाकर जरूरी सुविधाओं और सार्वजनिक ढांचे को मजबूत करना है.
अपनी पसंद का करा सकते हैं विकास कार्य
योजना के तहत गांव में कई तरह के सार्वजनिक और सामुदायिक कार्य कराए जा सकते हैं. इनमें बारात घर, सामुदायिक भवन, डिजिटल लाइब्रेरी, ओपन जिम, खेल परिसर, तालाब का सुंदरीकरण, गांव का प्रवेश द्वार, अंत्येष्टि स्थल, बस स्टैंड और टीन शेड जैसे कार्य शामिल हैं. इसके अलावा चारागाह का विकास और सीसीटीवी-सर्विलांस सिस्टम लगाने जैसे काम भी योजना के दायरे में आते हैं. इन कार्यों को आवेदक अपने माता-पिता, पूर्वज या किसी अन्य परिजन की स्मृति में कराने का प्रस्ताव दे सकता है.
ऑनलाइन करना होगा आवेदन
योजना का लाभ लेने के लिए पंचायती राज विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन और पंजीकरण करना होता है. आवेदन के दौरान आवेदक को अपने पैतृक गांव, प्रस्तावित विकास कार्य और जिस व्यक्ति की स्मृति में कार्य कराया जाना है, उससे जुड़ी जानकारी देनी होती है. आवेदन प्राप्त होने के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय की ओर से प्रस्तावित स्थान का तकनीकी निरीक्षण कराया जाता है. इसके बाद संबंधित कार्य की अनुमानित लागत का एस्टीमेट तैयार किया जाता है.
पहले जमा करनी होगी 60 फीसदी रकम
एस्टीमेट तैयार होने के बाद आवेदक को निर्धारित खाते में परियोजना लागत की 60 प्रतिशत राशि जमा करनी होती है. इसके बाद सरकार की ओर से 40 प्रतिशत अनुदान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है. प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित विकास कार्य को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरा कराया जाता है.
पूर्वजों के नाम लगेगी सम्मान पट्टिका
इस योजना की खास बात यह है कि विकास कार्य पूरा होने के बाद दानदाता के पूर्वज या परिजन के नाम से सम्मान पट्टिका लगाए जाने का प्रावधान है. इससे गांव के विकास में आर्थिक सहयोग देने वाले व्यक्ति की भूमिका दर्ज होने के साथ उनके परिवार और पूर्वजों की स्मृति भी सार्वजनिक रूप से जुड़ी रहती है.
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गांव के विकास में बन सकते हैं भागीदार
मुख्यमंत्री मातृभूमि योजना के जरिए सरकार ग्रामीण विकास में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है. जो लोग अपने पैतृक गांव में सुविधाएं विकसित कराने के साथ अपने परिवार या पूर्वजों की याद को स्थायी रूप देना चाहते हैं, वे इस योजना से जुड़ सकते हैं. इच्छुक लोगों को ऑनलाइन आवेदन के बाद संबंधित जिला पंचायत राज कार्यालय से संपर्क कर आगे की प्रक्रिया की जानकारी लेनी होगी.
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वाराणसी एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा, एयर इंडिया के दो कर्मचारी गोली लगने से घायल
Varanasi Airport: वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मुंबई जाने वाली फ्लाइट के एक यात्री की पिस्टल से अचानक गोली चल गई. इस दुर्घटना में जमीन से टकराकर निकली गोली के छर्रे या निशान से पास ही मौजूद एयर इंडिया के दो कर्मचारी घायल हो गए. गनीमत यह रही कि दोनों की जान बाल-बाल बच गई और उनकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है.
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क्या है पूरी घटना?
मिली जानकारी के मुताबिक, आजमगढ़ का रहने वाला एक यात्री एयर इंडिया की उड़ान से मुंबई जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचा था. सुरक्षा मानकों और नियमों का पालन करते हुए यात्री ने यात्रा से पहले ही अपने पास मौजूद वैध पिस्टल और उसकी मैगजीन की जानकारी हवाई अड्डा प्राधिकरण को दे दी थी और इसे आधिकारिक तौर पर डिक्लेयर (घोषित) किया था. जब एयरपोर्ट पर हथियार और उसके कागजातों की जांच की जा रही थी, उसी दौरान अचानक पिस्टल से गोली चल गई. गोली पहले फर्श से टकराई और उसके बाद पास ही खड़े एक युवक के हाथ और एक महिला कर्मचारी की जांघ में जा लगी. घटना के तुरंत बाद हवाई अड्डा परिसर में हड़कंप मच गया.
घायलों का अस्पताल में इलाज जारी
गोली लगने से घायल हुए दोनों स्टाफ सदस्यों को तुरंत वाराणसी के हरहुआ स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है. हवाई अड्डे के निदेशक (डिफेन्स/डायरेक्टर) पुनीत गुप्ता ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जब दस्तावेजों और हथियार की चेकिंग की प्रक्रिया चल रही थी, उस वक्त हथियार का मालिक यात्री और एयरपोर्ट स्टाफ दोनों ही वहां मौजूद थे. उन्होंने स्पष्ट किया कि घायल हुए दोनों कर्मचारियों की हालत अब सामान्य है और वे खतरे से बाहर हैं.
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लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का संक्षिप्त इतिहास
उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित यह प्रमुख हवाई अड्डा अपनी ऐतिहासिक अहमियत रखता है. इस एयरपोर्ट की हवाई पट्टी का निर्माण ब्रिटिश काल के दौरान हुआ था, जबकि देश की आजादी के बाद यहां से नियमित कमर्शियल (व्यापारिक) उड़ानों का संचालन शुरू किया गया. साल 1953 में यहां पहला टर्मिनल बनकर तैयार हुआ था. इसके बाद, वर्ष 2005 में इस हवाई अड्डे का नाम बदलकर देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर रखा गया और साल 2010 में नए इंटीग्रेटेड टर्मिनल का भव्य उद्घाटन किया गया था. वर्तमान में इस एयरपोर्ट से देश के प्रमुख महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, अहमदाबाद, चेन्नई, पुणे, गाजियाबाद समेत कई सीधे फ्लाइट उपलब्ध है.
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