Explainer: कितने तरीकों से क्रिकेट में दी जाती है नो बॉल? इसके लिए आईसीसी ने बनाए कौन-कौन से नियम
No ball Rules in Cricket : क्रिकेट का खेल आज के समय में काफी तेज हो गया है. जब क्रिकेट की शुरुआत हुई थी, तब इस गेम को काफी स्लो गेम माना जाता था. रेड बॉल फॉर्मेट के साथ क्रिकेट की शुरुआत हुई थी. तब टेस्ट क्रिकेट बहुत स्लो होता था. आज के समय में टी20 क्रिकेट ने पूरे गेम को बदल दिया है. अब फटाफट क्रिकेट का टेस्ट क्रिकेट पर भी ऐसा असर पड़ रहा है, कि गेम बहुत तेज हो गया है. टेस्ट को भी अब टी20 की तरह टीमें खेलने लगी है. क्रिकेट के स्लो से फास्ट होने के साथ-साथ कई नियम भी बदल गए हैं.
क्रिकेट का खेल समय के साथ जैसे-जैसे आगे बढ़ा वैसे-वैसे नियम भी बदलते चले गए. उन्हीं में से एक है क्रिकेट में नो बॉल का नियम. नो बॉल का नियम समय के साथ साथ कई बार अपडेट होता चला गया. अब नो बॉल सिर्फ एक या दो तरीकों से नहीं दी जाती है. बल्कि कई तरीकों से दी जाती है. आज के युग में कम से कम 10 तरीकों से नो बॉल दी जाती है. अगर आपको इस 10 नियमों के बारे में नहीं पता है तो, आज हम आपको नो बॉल के सभी नियमों के बारे में बातने वाले हैं.
कितने तरीकों से क्रिकेट में दी जाती है नो बॉल?
क्रिकेट में नो बॉल देने का कोई एक तरीका नहीं है. क्रिकेट के मैदान पर कम से कम 10 तरीकों से नो बॉल दी जाती है. इनके अलावा भी क्रिकेट के मैदान पर नो बॉल दिए के कई तरीक हैं. आइए उन सभी तरीकों को विस्तार में समझते हैं.
1 - फ्रंट फुट नो बॉल
क्रिकेट के मैदान पर सबसे ज्यादा नो बॉल फ्रंट फुट नो बॉल के जरिए दी जाती हैं. इसमें पूरी तरह से गेंदबाजी की गलती होती है, जिसके तहत नो बॉल दी जाती है. इस केस में गेंदबाज का अगला पैर क्रीज (पॉपिंग क्रीज) से आगे निकल जाती है. इस स्थिति में अंपायर द्वारा नो बॉल दी जाती है.
2 - बैक फुट नो बॉल
क्रिकेट में बैक फुट नो बॉल भी दी जाती है. इस मामले में गेंदबाजी जब बॉल डालने के लिए आता है तो, उनका लैंडिंग पैर रिटर्न क्रीज के अंदर नहीं रहता है. इस स्थिति में जब बॉल डालते समय गेंदबाज का पिछला पैर रिटर्न क्रीज के अंदर नहीं होता तो अंपायर के द्वारा नो बॉल दी जाती है.
3 - कमर से ऊपर फुल टॉस
क्रिकेट मैच के दौरान कमर के ऊपर की फुट टॉस बॉल को भी नो बॉल दिया जाता है. इसमें गेंदबाज जब बॉल करता है उस समय वो बल्लेबाजों को कमर के ऊपर फुल टॉस बॉल डाल देता है. यानी कि अगर गेंद बिना टप्पा खाए बल्लेबाज की कमर के ऊपर जाती है. तो उससे बल्लेबाज को खतरा भी होता है. ऐसे में उसे अंपायर नो बॉल देता है.
4 - खतरनाक शॉर्ट पिच गेंद
मैच के दौरान अगर गेंदबाज बॉलिंग करते समय बल्लेबाज को खतरनाक शॉर्ट पिच बॉल भी डालता है तो उसे भी अंपायर के द्वारा नो बॉल दिया जा सकता है. गेंदबाज के द्वारा डाली गई गेंद इतनी उछाल वाली हो कि बल्लेबाज के लिए खतरनाक मानी जाए. उस केस में अंपायर अपनी विकेक और सोच के अनुसार इसे नो बॉल दे सकता है.
5 - थ्रो बॉल करना
क्रिकेट के मैदान पर नो बॉल तब भी दी जा सकती है, जब गेंदबाज बॉल को थ्रो करके बल्लेबाज को फेंके. इसे आसान भाषा में भट्टा बॉल या चकरी बॉल भी बोल सकते हैं. क्रिकेट नियमों के अनुसार इसमें गेंदबाज अपना हाथ को बॉलिंग करते समय पूरा नहीं घुमाता है. उनका एक्शन नियमों के अनुरूप नहीं होता बल्कि वो बॉल को थ्रो करता है. ऐसे स्थिति में अंपायर नो बॉल दे सकता है.
Remember when umpires called Murali's leg spin a no-ball? It felt so unfair. But his captain backed him up, and they went on to win the 1996 World Cup!???? pic.twitter.com/gQN57K4phX
— OldMonkOfCricket (@OldMonkOfCric) June 20, 2026
6 - विकेट के गलत साइड से गेंदबाजी
क्रिकेट के मैच के दौरान कोई गेंदबाजी अगर ओवर द विकेट गेंदबाजी कर रहा है और वो बगैर अंपायर को बताए राउड द विकेट गेंदबाजी करने लग जाता है तो इस स्थिति में अंपयार उसकी बॉल को नो बॉल करारा दे सकता है. गेंदबाज अंपायर की अनुमति के बिना विकेट के गलत तरफ (गलत साइड) से गेंद डालता है. तो इसका खामियाजा उसे नो बॉल के रूप में भुगतना पड़ सकता है.
7 - बॉल का पिच से बाहर गिरना
क्रिकेट के नियमों के अनुसार गेंदबाज अगर बॉलिंग कर रहा है तो उसे पिच के ऊपर ही गेंदबाजी करनी है. गेंदबाजी अगर बॉलिंग करते हुए 22 गज की पिच के बाहर बॉल डालता है, तो अंपायर उसकी बॉल को नो बॉल दे सकता है. इस केस में बॉल बल्लेबाज तक पहुंचने से पहले पिच के बाहर (ऑफ साइड या लेग साइड) गिर जाती है, तब उस स्थिति में उसे नो बॉल दिया जाता है.
8 - फील्डिंग नियमों का उल्लंघन
क्रिकेट में फील्डिंग के नियमों का उल्लंघन करने पर भी नो बॉल देने का प्रवधान होता है. क्रिकेट में पावर प्ले और उसके बाद 30 गज के दायरे के बाहर लिमिटिड प्लेयर रखने की इजाजत होती है. तय संख्या से ज्यादा फील्डर अगर बाहर या अंदर होते हैं तो उस स्थिति में अंपायर नो बॉल दे सकता है. बता दें कि, निर्धारित संख्या से अधिक फील्डर पिच के किसी एक तरफ खड़े हों या फील्डिंग पोजिशनिंग खेल के नियमों का उल्लंघन करती हो तो, अंपायर नो बॉल दे सकता है.
9 - विकेटकीपर की गलती
क्रिकेट मैच के दौरान नो बॉल विकेटकीपर की गलती की वजह से भी दी जा सकती है. मैच के दौरान अगर विकेटकीपर गेंद बल्ले या बल्लेबाज तक पहुंचने से पहले स्टंप्स के आगे आ जाता है या उसे स्टंप्स के आगे से रोक लेता है. तो इस केस में अंपायर नो बॉल दे सकता है.
10 - गेंद का दो बार उछलना या लुढ़कना
क्रिकेट के मैदान पर अगर गेंदबाज बॉल को बल्लेबाज तक 2 टप्पों में पहुंचाता है या फिर गेंद को लुढ़काकर डालता है यानी कि अंडर आर्म बॉल करता है. तो इस स्थिति में बॉल को अंपायर नो बॉल घोषित कर सकता है. गेंद बल्लेबाज तक पहुंचने से पहले दो या अधिक बार टप्पा खाए या गेंद पिच पर लुढ़कते हुए पहुंचे तब इस स्थिति में नो बॉल दी जाती है.
नो बॉल के लिए आईसीसी के नियम
आईसीसी के नो बॉल के लिए बनाए गए नियमों के अनुसार, गेंदबाज द्वारा नो बॉल डालने पर बल्लेबाजी टीम को 1 अतिरिक्त रन मिल जाता है. नो बॉल को लीगल डिलिवरी नहीं माना जाती है. उसके बाद एक और अतिरिक्त गेंद डालनी पड़ती है. इसके साथ ही नो बॉल के बाद वाली यानी अगली गेंद फ्री हिट होती है. आईसीसी के नियमों के अनुसार फ्री हिट बॉल का नियम केवल सीमित ओवर क्रिकेट यानी वनडे और टी20 में ही होता है. टेस्ट क्रिकेट में फ्री हिट का नियम लागू नहीं होता है.
इस फ्री हिट गेंद पर बल्लेबाज आउट नहीं होता है. वो बोल्ड और कैच आउट हुआ तो नॉटआउट ही माना जाता है. हालांकि फ्री हिट पर अगर बल्लेबाज रन आउट होता है, तब उसे आउट माना जाएगा. नो बॉल के बाद मिलने वाली फ्री हिट पर बल्लेबाज सिर्फ रन आउट, हिट द बॉल ट्वाइस, ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड जैसे कुछ तरीकों से ही आउट होता है.
नो बॉल से जुड़े नियम प्रमुख रूप से आईसीसी के नियम 21 में दिए गए हैं. इसें खतरनाक गेंदों और गेंदबाजी से जुड़े कुछ प्रावधान हैं, जो नियम 41 (Unfair Play) में भी शामिल हैं. उनके तहत ही नो बॉल दी जाती है.
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महाकाल मंदिर श्रावण 2026: उज्जैन में नई दर्शन व्यवस्था, दो गेट से मिलेगा आसान प्रवेश
श्रावण मास के दौरान हर साल उज्जैन में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार प्रशासन ने पहले से ज्यादा तैयारी की है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में अब भक्तों को दो अलग-अलग रास्तों से प्रवेश दिया जाएगा। एक एंट्री श्री महाकाल महालोक से और दूसरा नया गेट हरसिद्धि चौराहा से तैयार किया गया है।
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भीड़ एक ही जगह पर इकट्ठा नहीं होगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि सामान्य दिनों में 3 से 4 लाख और वीकेंड पर 5 से 7 लाख श्रद्धालु पहुंच सकते हैं। इसी वजह से प्रशासन ने पहले से ही रास्तों को व्यवस्थित कर दिया है। मंदिर प्रशासन का दावा है कि अब श्रद्धालुओं को लगभग 40 मिनट के अंदर दर्शन मिल सकेंगे, जो पहले काफी ज्यादा समय लेता था।
उज्जैन श्रावण भीड़ नियंत्रण योजना 2026
श्रावण-भाद्रपद मास के दौरान भीड़ को कंट्रोल करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए उज्जैन प्रशासन ने खास प्लान तैयार किया है। हरसिद्धि चौराहा से एंट्री शुरू कर दी गई है ताकि भक्तों का फ्लो बराबर बना रहे।
दर्शन मार्ग पर कई सुविधाएं भी बढ़ाई गई हैं जैसे लड्डू प्रसाद काउंटर, शीघ्र दर्शन टिकट काउंटर, पूछताछ केंद्र और खोया-पाया केंद्र। यह सभी व्यवस्थाएं विक्रम टीले के आसपास बनाई गई हैं ताकि भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो। प्रशासन का कहना है कि इस बार पूरा फोकस भीड़ को अलग-अलग हिस्सों में बांटने पर है, ताकि किसी एक गेट या मार्ग पर दबाव न बने। इससे न सिर्फ सुरक्षा बेहतर होगी, बल्कि बुजुर्ग और बच्चों को भी आसानी होगी।
महाकाल सवारी 2026 और भस्म आरती टाइमिंग
श्रावण मास में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की सबसे खास पहचान भगवान महाकाल की सवारी होती है। इस बार 3 अगस्त से 7 सितंबर तक कुल 6 सवारियां निकाली जाएंगी, जिसमें अंतिम सवारी राजसी स्वरूप में होगी। हर सोमवार को महाकाल की सवारी शहर में निकलेगी, जिसे देखने के लिए लाखों लोग उमड़ते हैं।
इसके साथ ही मंदिर में भस्म आरती का समय भी बदला गया है। श्रावण में रविवार को रात 2:30 बजे मंदिर के पट खोले जाएंगे, जबकि बाकी दिनों में 3 बजे पट खुलेंगे। आम दिनों में यह समय सुबह 4 बजे होता है, लेकिन श्रावण में भक्तों की संख्या को देखते हुए इसे जल्दी किया गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलेगा और भीड़ भी संतुलित रहेगी।
उज्जैन में यह पूरी व्यवस्था न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि एक बड़े मैनेजमेंट मॉडल के रूप में भी देखी जा रही है, जहां लाखों लोगों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराना प्राथमिकता है।
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