राखी सावंत करना चाहती हैं आमिर खान से शादी? एक्टर की तीसरी मैरिज को लेकर ड्रामा क्वीन ने कह डाली बड़ी बात
Rakhi Sawant on Aamir Khan Third Marriage: बॉलीवुड के 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' आमिर खान इन दिनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में हैं. लंबे समय से उनकी गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट के साथ रिश्ते की खबरें सुर्खियों में बनी हुई हैं. इसी बीच आमिर की शादी को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं. ऐसे में अब इस पूरे मामले में बॉलीवुड की 'ड्रामा क्वीन' राखी सावंत ने भी अपने अंदाज में रिएक्ट किया है. जी हां, हाल ही में मुंबई में पैपराजी से बातचीत के दौरान राखी सावंत ने आमिर खान की शादी को लेकर कई मजाकिया टिप्पणियां कीं. उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.
राखी सावंत ने किया मजाकिया कमेंट
मुंबई में स्पॉट हुईं राखी सावंत से जब पैपराजी ने आमिर खान की शादी को लेकर सवाल किया तो उन्होंने अपने अनोखे अंदाज में मजाक करते हुए कहा, "ये आमिर खान सर की बीवियां क्यों नहीं टिकती यार? आमिर सर, सारे रिकॉर्ड तो आपने ही तोड़ दिए हैं. कितनी शादियां करते हो, कितने तलाक लेते हो, कितने बच्चे हैं. वैसे ठीक है, देश का वंश बढ़ना चाहिए. बढ़ाओ... बढ़ाओ. लेकिन ये आखिरी शादी है या इसके बाद चौथी भी होगी? अगर चौथी शादी होगी तो उसके लिए मैं तैयार हूं." राखी का ये बयान पूरी तरह मजाकिया अंदाज में था, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर खूब चर्चा हो रही है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
राखी सावंत का ये वीडियो सामने आते ही इंटरनेट पर वायरल हो गया. फैंस ने भी इस पर मजेदार कमैंट्स करना शुरू कर दिया है. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, "राखी, तीन-चार शादियां तो तुम भी कर चुकी हो. तुम्हारे पति भी कहां टिके?" वहीं दूसरे यूजर्स ने इसे राखी का फनी अंदाज बताते हुए वीडियो पर हंसने वाले इमोजी शेयर किए. कुछ लोगों ने आमिर खान की निजी जिंदगी को लेकर भी अपनी राय रखी.
आमिर खान की पर्सनल लाइफ रही चर्चा में
आमिर खान की निजी जिंदगी हमेशा से चर्चा का विषय रही है. उन्होंने पहली शादी रीना दत्ता से साल 1986 में की थी. इस शादी से उनके दो बच्चे जुनैद खान और इरा खान हैं. करीब 16 साल साथ रहने के बाद साल 2002 में दोनों का तलाक हो गया. इसके बाद आमिर खान ने साल 2005 में फिल्ममेकर किरण राव से दूसरी शादी की. इस रिश्ते से उनके बेटे आजाद राव खान का जन्म हुआ. हालांकि, शादी के लगभग 16 साल बाद साल 2021 में आमिर और किरण राव ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया. दोनों ने साफ किया था कि वो बेटे की परवरिश मिलकर करेंगे और अच्छे दोस्त बने रहेंगे.
फिल्मों में भी बीजी हैं आमिर खान
अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में रहने के साथ-साथ आमिर खान अपने आने वाले फिल्मी प्रोजेक्ट्स में भी व्यस्त हैं. फैंस लंबे समय से उनकी अगली फिल्मों का इंतजार कर रहे हैं और एक्टर जल्द ही नए प्रोजेक्ट्स के साथ बड़े पर्दे पर नजर आने वाले हैं. फिलहाल, आमिर खान की कथित शादी की चर्चाओं के बीच राखी सावंत का मजाकिया बयान इंटरनेट पर लोगों का खूब मनोरंजन कर रहा है. हालांकि, फैंस आमिर खान जल्द ही गौरी से शादी से करने जा रहे हैं, जिसका फैंस को बेसब्री से इंतजार है.
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Explainer: आखिर कौन थी रामायण की राक्षसी त्रिजटा? जिसने पहले ही देख लिया था लंका के विनाश का सपना, सुंदर की चौपाई में है वर्णन
रामायण में कई ऐसे पात्र हैं जिनकी भूमिका भले ही छोटी दिखाई देती हो, लेकिन उनका महत्व बेहद गहरा है. इन्हीं पात्रों में एक नाम त्रिजटा का भी है. त्रिजटा राक्षस कुल में जन्मी थीं, लेकिन उनके विचार, आचरण और भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा उन्हें अन्य राक्षसों से अलग बनाती है. जब माता सीता अशोक वाटिका में रावण की कैद में थीं, तब चारों ओर राक्षसियों का पहरा था. अधिकांश राक्षसियां सीता को डराने और रावण की बात मानने के लिए दबाव बनाती थीं, लेकिन त्रिजटा ने हमेशा उनका साथ दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने एक ऐसा स्वप्न देखा जिसने लंका के भविष्य और रावण के अंत की स्पष्ट भविष्यवाणी कर दी थी. इस स्वप्न का उल्लेख सुंदरकांड में मिलता है और इसे रामायण के सबसे महत्वपूर्ण प्रसंगों में से एक माना जाता है.
कौन थी त्रिजटा?
त्रिजटा लंका की एक वृद्ध और बुद्धिमान राक्षसी थीं. कई धार्मिक ग्रंथों और लोकमान्यताओं के अनुसार वे विभीषण की पुत्री या उनके परिवार से संबंधित मानी जाती हैं. हालांकि, वाल्मीकि रामायण में उनके पारिवारिक संबंधों का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता. त्रिजटा का स्वभाव अत्यंत शांत, विवेकपूर्ण और धर्मप्रिय था. वे राक्षस कुल में रहते हुए भी अधर्म का समर्थन नहीं करती थीं. माता सीता के प्रति उनके मन में करुणा और सम्मान था. यही कारण है कि जब अन्य राक्षसियां सीता को भयभीत करती थीं, तब त्रिजटा उन्हें धैर्य रखने और श्रीराम पर विश्वास बनाए रखने की सलाह देती थीं.
अशोक वाटिका में त्रिजटा की भूमिका
रावण जब माता सीता को अपने महल में ले जाने में असफल रहा तो उसने उन्हें अशोक वाटिका में बंदी बनाकर राक्षसियों की निगरानी में रख दिया. रावण ने राक्षसियों को आदेश दिया था कि वे किसी भी तरह सीता को डराकर उसकी बात मानने के लिए मजबूर करें. कई राक्षसियां उन्हें तरह-तरह की धमकियां देती थीं, लेकिन त्रिजटा का व्यवहार बिल्कुल अलग था. वे सीता माता को सांत्वना देती थीं और विश्वास दिलाती थीं कि श्रीराम अवश्य आएंगे और उन्हें इस संकट से मुक्त कराएंगे. इस प्रकार त्रिजटा उस कठिन समय में सीता के लिए आशा की किरण बनीं.
त्रिजटा ने कैसा सपना देखा था?
सुंदरकांड में वर्णन मिलता है कि एक रात त्रिजटा ने अत्यंत अद्भुत और भविष्यसूचक स्वप्न देखा. उन्होंने देखा कि भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने दिव्य वस्त्र धारण किए हुए हैं. दोनों एक दिव्य विमान पर सवार होकर लंका पहुंचे हैं. माता सीता श्रीराम के साथ सम्मानपूर्वक बैठी हैं. रावण के वस्त्र फटे हुए हैं और वह अत्यंत दुखी और पराजित दिखाई दे रहा है. लंका चारों ओर से जल रही है. वानर सेना पूरे नगर में विजय प्राप्त कर चुकी है. विभीषण को लंका का राजा बनाया जा रहा है. त्रिजटा समझ गईं कि यह कोई सामान्य स्वप्न नहीं बल्कि भविष्य का संकेत है.
सुंदरकांड की चौपाइयों में मिलता है उल्लेख
जब अन्य राक्षसियां सीता को डराने का प्रयास कर रही थीं, तब त्रिजटा ने उन्हें अपना स्वप्न सुनाया और चेतावनी दी कि यदि वे सीता का अपमान करेंगी तो उनका भी विनाश निश्चित है. उन्होंने कहा कि यह सपना साफ संकेट दे रहा है कि श्रीराम की विजय होगी और रावण का अंत निश्चित है. लंका का विनाश होगा.
सीता माता सम्मानपूर्वक अपने पति के साथ लौटेंगी. त्रिजटा की बात सुनकर कई राक्षसियां भयभीत हो गईं और उन्होंने सीता को परेशान करना बंद कर दिया.
क्या सच हुआ त्रिजटा का सपना?
रामायण की आगे की कथा बिल्कुल उसी दिशा में बढ़ती है, जैसा त्रिजटा ने अपने स्वप्न में देखा था. हनुमान जी लंका पहुंचे. अशोक वाटिका में माता सीता से मिले. लंका का एक बड़ा भाग अग्नि में जल गया. श्रीराम ने समुद्र पर सेतु बनाकर लंका पर चढ़ाई की. रावण का वध हुआ इसके बाद विभीषण लंका के नए राजा बने फिर माता सीता की मुक्त हो गई. इस प्रकार त्रिजटा का पूरा सपना सत्य सिद्ध हुआ.
क्या था त्रिजटा के सपने का अर्थ?
धार्मिक विद्वानों के अनुसार त्रिजटा का स्वप्न केवल भविष्यवाणी नहीं था बल्कि धर्म और अधर्म के संघर्ष का प्रतीक भी था. इस स्वप्न का संदेश था कि अन्याय चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः उसकी हार निश्चित है. सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है. भगवान अपने भक्तों की रक्षा जरूर करते हैं. कठिन परिस्थितियों में भी आशा नहीं छोड़नी चाहिए.
राक्षसी होकर भी क्यों बनीं आदर्श पात्र?
रामायण हमें यह भी सिखाती है कि किसी व्यक्ति का मूल्य केवल उसके जन्म या कुल से नहीं, बल्कि उसके कर्म और विचारों से होता है. त्रिजटा राक्षस कुल में जन्मी थीं, लेकिन उन्होंने अधर्म का समर्थन नहीं किया. निर्दोष सीता का साथ दिया. सत्य का पक्ष लिया. भविष्य के संकेत को समझकर दूसरों को सावधान किया. भगवान श्रीराम की विजय पर विश्वास बनाए रखा. यही कारण है कि उन्हें रामायण के सबसे सम्मानित सहायक पात्रों में गिना जाता है.
क्या त्रिजटा का उल्लेख केवल वाल्मीकि रामायण में ही मिलता है?
त्रिजटा का वर्णन मुख्य रूप से वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड में मिलता है. इसके अलावा रामचरितमानस, विभिन्न क्षेत्रीय रामायणों और लोककथाओं में भी उनके चरित्र का उल्लेख मिलता है. अलग-अलग परंपराओं में उनके बारे में कुछ विवरण भिन्न हो सकते हैं, लेकिन सभी में उन्हें एक धर्मनिष्ठ, बुद्धिमान और सीता की हितैषी राक्षसी के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है.
रामायण की कथा में त्रिजटा का चरित्र
रामायण की कथा में त्रिजटा का चरित्र यह साबित करता है कि सत्य और धर्म का प्रकाश किसी भी स्थान पर जन्म ले सकता है. राक्षसी कुल में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने अधर्म का साथ नहीं दिया, बल्कि माता सीता को साहस दिया और लंका के विनाश की भविष्यवाणी कर सबको चेताया. उनका स्वप्न केवल एक भविष्यवाणी नहीं था, बल्कि यह संदेश भी था कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब धर्म की विजय निश्चित होती है. इसी कारण त्रिजटा का नाम रामायण के उन अमर पात्रों में लिया जाता है, जिनकी भूमिका छोटी होते हुए भी पूरी कथा की दिशा और संदेश को गहराई प्रदान करती है.
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