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'इस्लाम कबूलने के लिए बनाया जा रहा था दबाव', हिमांशी खुराना का बड़ा खुलासा, आसिम रियाज ने पूजा-पाठ पर लगाई थी रोक

Himanshi Khurana on Conversion to Islam: ‘बिग बॉस 13’ फेम हिमांशी खुराना एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं. हिमांशी ने हाल ही में अपने पिछले रिश्ते और धर्म से जुड़े एक बेहद निजी अनुभव का खुलासा किया है. जी हां, पारस छाबड़ा के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान हिमांशी ने बताया कि एक समय वो अपने रिश्ते को बचाने के लिए धर्म बदलने के बारे में सोचने लगी थीं. हिमांशी ने बताया कि रिश्ते के दौरान उनकी धार्मिक मान्यताओं और पूजा-पाठ को लेकर भी आपत्ति जताई जाती थी. हालात यहां तक पहुंच गए थे कि उन पर मानसिक दबाव बनने लगा था और वो खुद से ऐसे सवाल पूछने लगी थीं, जिनके बारे में उन्होंने पहले कभी नहीं सोचा था.

‘मुझे कहा गया कि तुम ये चीजें नहीं कर सकतीं’

पारस छाबड़ा ने बातचीत के दौरान हिमांशी से पूछा कि क्या उनका कन्वर्जन होने वाला था. इस सवाल पर हिमांशी ने सीधे तौर पर किसी का नाम लिए बिना उस दौर का अनुभव साझा किया. हिमांशी ने बताया कि एक रात उनके सामने ऐसी बात रखी गई, जिसके बाद वो काफी परेशान हो गई थीं. उन्हें कहा गया था कि धर्म बदलने के बाद वो अपनी कुछ धार्मिक एक्टिविटीज नहीं कर पाएंगी. इस बात ने हिमांशी के मन में कई तरह के सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने बताया कि उस समय उनके दिमाग में ये विचार आया कि अगर वो धर्म बदलने वाली हैं, तो उससे पहले वो अपने सभी मंदिरों और चार धाम के दर्शन कर लेना चाहती हैं. उन्हें ऐसा महसूस होने लगा था जैसे वो अपनी पुरानी जिंदगी को अलविदा कह रही हों.

‘मैंने सोचा, पहले चार धाम और सारे मंदिर घूम लूं’

हिमांशी ने उस वक्त की अपनी मानसिक स्थिति के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें लगने लगा था कि धर्म बदलने के बाद वो शायद पहले की तरह अपनी धार्मिक मान्यताओं को नहीं जी पाएंगी. इसी वजह से उन्होंने मन में तय किया कि धर्म बदलने से पहले वो चार धाम और मंदिरों के दर्शन कर लेंगी. उनके मुताबिक, ये सोच उनके लिए बेहद भावुक और डराने वाला अनुभव था. वो अपने ही विश्वास और पहचान को लेकर कई सवालों में उलझ गई थीं. हिमांशी ने ये भी बताया कि वो दूसरे धर्म की अच्छी बातों को समझने और उनका सम्मान करने की कोशिश करती थीं, लेकिन उनके मन में अपनी पुरानी आस्था भी उतनी ही मजबूती से मौजूद थी.

‘मेरे अंदर से तो वही अपना वाला निकलेगा’

हिमांशी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बताया कि उनके मन में ये सवाल आने लगा था कि अगर वो किसी और धर्म की प्रार्थना करेंगी, तो क्या उनके मन से उनकी अपनी आस्था और ईश्वर का नाम निकलना बंद हो जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर वो किसी दूसरे भगवान के सामने भी सिर झुकाएंगी, तो उनके मुंह से अपने विश्वास का नाम अपने आप निकल सकता है. यही विचार उनके लिए एक बड़ा मानसिक संघर्ष बन गया था. हिमांशी के मुताबिक, वो दूसरे धर्म की अच्छी बातों को सुनती थीं और उन्हें स्वीकार भी करती थीं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं था कि उनकी अपनी धार्मिक पहचान खत्म हो गई थी.

‘मुझे दफनाया जाएगा या जलाया जाएगा?’

हिमांशी ने बताया कि इसी मानसिक संघर्ष के दौरान उनके दिमाग में एक बेहद गंभीर सवाल आया अगर वो धर्म बदलती हैं, तो भविष्य में उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया क्या होगी? उन्होंने खुद से सवाल किया कि उन्हें दफनाया जाएगा या जलाया जाएगा. हिमांशी के मुताबिक, ये सवाल उनके भीतर से आया था और यहीं से उन्हें महसूस हुआ कि वो किस तरह के मानसिक दबाव से गुजर रही थीं. उन्होंने इसे अपनी जिंदगी का एक टर्निंग पॉइंट बताया. उन्हें एहसास हुआ कि किसी रिश्ते की वजह से अपनी धार्मिक पहचान और आस्था को लेकर इस हद तक दबाव महसूस करना उनके लिए सही नहीं था.

धर्म बदलने के लिए तैयार हो गई थीं हिमांशी

हिमांशी के मुताबिक, एक समय ऐसा भी आया था जब वोधर्म बदलने के लिए तैयार हो गई थीं. रिश्ते को लेकर वो काफी सीरियस थीं और इसी वजह से उन्होंने अपने विश्वास से जुड़े कई सवालों को नजरअंदाज करने की कोशिश की. हालांकि बाद में उन्हें एहसास हुआ कि किसी भी रिश्ते में एक-दूसरे की धार्मिक मान्यताओं और निजी आस्था का सम्मान होना जरूरी है. उनके अनुसार, प्यार या रिश्ते के नाम पर किसी व्यक्ति पर धर्म बदलने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए. हिमांशी ने अपनी बात रखते हुए ये भी हिंट दिया कि हर व्यक्ति को अपनी धार्मिक पहचान और मान्यताओं के साथ जीने की स्वतंत्रता होनी चाहिए.

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ किसानों का दिल्ली कूच, खनौरी-दातासिंहवाला बॉर्डर सील, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

Farmers Protest: भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार समझौते (ट्रेड डील) के विरोध में देश के किसानों ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की तरफ कूच करने का बड़ा ऐलान किया है. इस विरोध प्रदर्शन की कमान पंजाब के प्रमुख किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के हाथों में है, जिनके नेतृत्व में यह 'किसान बचाओ पदयात्रा' शुरू की गई है. किसानों के इस मार्च को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हरियाणा प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है.

खनौरी-दातासिंहवाला बॉर्डर पर बढ़ाई गई सख्ती

किसानों के इस पैदल मार्च को रोकने के लिए जींद प्रशासन ने सीमा पर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम कर लिए हैं. एहतियात के तौर पर खनौरी-दातासिंहवाला बॉर्डर को पूरी तरह से सील कर दिया गया है. हरियाणा की तरफ जाने वाले रास्तों पर पुलिस बल की भारी तैनाती के साथ-साथ बड़े-बड़े कंटेनर, भारी-भरकम पत्थर और मजबूत बैरिकेडिंग खड़ी कर दी गई है. प्रशासन की मुख्य कोशिश यही है कि किसानों का जत्था हरियाणा सीमा में प्रवेश न कर सके और दिल्ली की ओर आगे न बढ़ पाए.

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29 अगस्त को जंतर-मंतर पहुंचने का है कार्यक्रम

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के बैनर तले आयोजित की जा रही यह 'किसान बचाओ पदयात्रा' दातासिंहवाला से आरंभ हुई है. किसानों का यह पैदल मार्च लगभग 228 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करते हुए 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर समाप्त होना तय किया गया है. भारत-अमेरिका ट्रेड डील को किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए यह आंदोलन छेड़ा गया है, जिसके चलते किसान संगठनों में खासा रोष देखने को मिल रहा है.

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प्रशासन की पैनी नजर और सुरक्षा प्रबंध

जैसे ही किसान नेताओं द्वारा इस पदयात्रा की घोषणा की गई, उसके बाद से ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग हरकत में आ गया. देर रात से ही सीमावर्ती इलाकों में सख्ती बढ़ा दी गई थी. आने-जाने वाले रास्तों को अवरुद्ध करने के साथ-साथ खुफिया तंत्र और पुलिस बल को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है. फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन का पूरा ध्यान बॉर्डर की स्थिति पर टिका हुआ है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके.

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