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केप वर्दे ने ग्रुप एच में अपने तीनों मैच ड्रॉ कराए जिससे वह स्पेन के बाद दूसरे स्थान पर रहकर आगे बढ़ने में सफल रहा। इस ग्रुप में उरुग्वे और सऊदी अरब दो-दो अंक ही हासिल कर पाए और वह टूर्नामेंट से बाहर हो गए।
Shani Pradosh Vrat 2026: आज शाम भूलकर भी न चूकें ये शुभ मुहूर्त, भगवान शिव-शनिदेव की कृपा से दूर होंगे सारे कष्ट
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने वाला व्रत माना जाता है। जब यह पावन व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तब इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है और इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ शनिदेव की पूजा करने से जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं और शनि दोषों से राहत मिलती है।
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के आधार पर 27 जून 2026, शनिवार को शनि प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। इस दिन प्रदोष काल का विशेष महत्व माना गया है। शाम 7:20 बजे से रात 9:29 बजे तक का समय पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। मान्यता है कि इस दौरान श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का पूजन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
शनि प्रदोष व्रत की पूजा के लिए सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को शुद्ध करें। इसके बाद शिवलिंग का जल, गंगाजल और दूध से अभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र, सफेद पुष्प और फल अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें तथा शिव चालीसा या शिव स्तुति का पाठ करें। अंत में घी का दीपक जलाकर आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
इस दिन शनिदेव की पूजा का भी विशेष महत्व है। श्रद्धालु सरसों का तेल अर्पित कर सकते हैं, तिल का दान कर सकते हैं और पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जला सकते हैं। ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करने से शनि की अशुभता कम होने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है।
धार्मिक दृष्टि से शनि प्रदोष व्रत उन लोगों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है जो शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या अन्य ज्योतिषीय बाधाओं से प्रभावित हैं। कहा जाता है कि नियमपूर्वक व्रत और पूजा करने से मानसिक तनाव कम होता है, कार्यों में सफलता मिलने लगती है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस पावन दिन क्रोध, झूठ, विवाद और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता, दान-पुण्य और सात्विक आचरण को विशेष महत्व दिया गया है। श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई पूजा भगवान शिव और शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम मानी जाती है।
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