आयरलैंड के से मिली ऐतिहासिक हार पर क्या बोले कप्तान श्रेयस अय्यर? जानें किसे ठहराया दोषी
IND vs IRE: भारत को पहली बार टी20 इंटरनेशनल में आयरलैंड के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा है. श्रेयस अय्यर की डेब्यू कप्तानी में टीम इंडिया आयरलैंड के खिलाफ ऑलआउट हो गई है. इस जीत के साथ आयरलैंड ने 2 टी20I मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है. श्रेयस अय्यर ने इस ऐतिहासिक हार के बाद बयान दिया है, चलिए जानते हैं कि अय्यर ने क्या कहा है...
आयरलैंड से पहली हार के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने दिया बड़ा बयान
मुझे लगता है कि शुरुआत में गेंदबाज अच्छी गेंदबाजी कर रहे थे. उन्हें गेंद को स्विंग कराने में मदद मिल रही थी और उन्होंने कुछ विकेट भी लिए. इसलिए हमें बहुत अच्छी शुरुआत मिली, लेकिन बीच में हम अपनी योजना पर ठीक से अमल नहीं कर पाए. हमने उन्हें सीधे मैदान की तरफ शॉट खेलने दिए, जहां हमें पता है कि बाउंड्री छोटी है. लेकिन हां, जब हमें ओवरों को कसकर रखना था, तब गेंदबाजों ने शानदार काम किया. इसलिए मुझे लगता है कि जिस तरह की शुरुआत हमें मिली थी, उसे देखते हुए 140 का स्कोर पीछा करने के लिए बहुत अच्छा होता. फिर भी, यहां का अनुभव बहुत अच्छा रहा, हमें इन हालात में खेलने का मौका मिला, पिच के बारे में अच्छी जानकारी मिली और हां, कप्तान के तौर पर यह एक शानदार शुरुआत रही.
लंबे ब्रेक के बाद लय बिगड़ने के बारे में और अगले मैच से पहले की तैयारी के बारे में पूछे जाने पर श्रेयस अय्यर ने कहा, "जी हां, बिल्कुल. हम बीते हुए कल को भूल जाएंगे. इस मैच से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला है और हम अगले मैच में पूरी ताकत के साथ उतरेंगे.
Explainer: पाइप एक्सपोर्ट में जबरदस्त तेजी के बावजूद भारत का स्टील इंपोर्ट क्यों बढ़ रहा है? समझें पूरा गणित
India Steel Import Rise: भारत में स्टील आयात में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अब निर्माण, ऑटोमोबाइल या उपभोक्ता उपकरण उद्योग नहीं रह गए हैं. इसकी जगह अब स्टील पाइप बनाने वाली कंपनियां इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण बनकर उभरी हैं. दरअसल, पश्चिम एशिया के कई देशों में तेल, गैस और पानी की पाइपलाइन बिछाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया जा रहा है. इसका सीधा फायदा भारतीय स्टील पाइप निर्माताओं को मिल रहा है, जिन्हें लगातार नए निर्यात ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं. हालांकि इन ऑर्डरों को पूरा करने के लिए कंपनियों को विशेष ग्रेड के स्टील का आयात भी करना पड़ रहा है. यही वजह है कि एक तरफ भारतीय स्टील पाइप का निर्यात बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ कच्चे माल के रूप में स्टील का आयात भी तेजी से बढ़ रहा है.
क्यों बढ़ रही है भारतीय पाइप कंपनियों की मांग
पश्चिम एशिया में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है. कई देश तेल और गैस की सप्लाई को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करना चाहते हैं. इसके अलावा सऊदी अरब पानी की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है. इसमें समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाले डीसैलिनेशन प्लांट और पानी वितरण पाइपलाइन परियोजनाएं शामिल हैं. इन परियोजनाओं के चलते भारतीय कंपनियों को बड़ी संख्या में स्टील पाइप की आपूर्ति के ऑर्डर मिल रहे हैं.
वेलस्पन कॉर्प के प्रबंध निदेशक विपुल माथुर ने हाल ही में कंपनी की आय समीक्षा के दौरान कहा कि अमेरिका और पश्चिम एशिया से कंपनी को मजबूत कारोबारी अवसर मिल रहे हैं. वहीं जिंदल सॉ के प्रेसिडेंट और ट्रेजरी प्रमुख विनय गुप्ता का कहना है कि आने वाले समय में तेल, गैस और पानी की पाइपलाइन परियोजनाओं में भारी निवेश देखने को मिलेगा. इसमें पुरानी पाइपलाइन बदलने के साथ नई पाइपलाइन भी बिछाई जाएंगी. इस वजह से भारतीय पाइप कंपनियों के पास काम की कोई कमी नहीं है.
निर्यात बढ़ने पर स्टील आयात क्यों बढ़ रहा है
स्टील पाइप बनाने के लिए सामान्य स्टील पर्याप्त नहीं होता. इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले विशेष ग्रेड के स्टील की जरूरत होती है, जिसका उपयोग खास तौर पर तेल और गैस पाइपलाइन परियोजनाओं में किया जाता है. भारत में इस तरह के कई विशेष ग्रेड के स्टील का उत्पादन या तो नहीं होता या फिर उन्हें अभी तक अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों से आवश्यक गुणवत्ता प्रमाणन नहीं मिला है. इसलिए भारतीय कंपनियां चीन, जापान और दक्षिण कोरिया से इन विशेष ग्रेड के स्टील का आयात करती हैं.
कमोडिटी मार्केट इंटेलिजेंस कंपनी बिगमिंट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ध्रुव गोयल के अनुसार, पाइप निर्माताओं को निर्यात ऑर्डर पूरे करने के लिए विदेशी स्टील पर निर्भर रहना पड़ता है. यही कारण है कि स्टील पाइप के निर्यात में बढ़ोतरी के साथ स्टील आयात भी बढ़ रहा है. भारतीय कंपनियां बाहर से माल मंगाकर उसे तैयार उत्पाद में बदल रही हैं.
एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम का मिल रहा फायदा
भारत के पश्चिमी तट पर स्थित कई पाइप निर्माता एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत स्टील आयात कर रहे हैं. इस योजना के तहत निर्यात के लिए तैयार किए जाने वाले उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का आयात बिना सीमा शुल्क के किया जा सकता है. इस योजना का लाभ उठाकर कंपनियां विदेशों से विशेष स्टील मंगाती हैं, उससे पाइप तैयार करती हैं और फिर उन्हें पश्चिम एशिया सहित अन्य देशों की पाइपलाइन परियोजनाओं के लिए निर्यात करती हैं. इससे कंपनियों की लागत कम होती है और वे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर पाती हैं.
कितना बढ़ा भारत का स्टील आयात?
वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती दो महीनों में भारत का तैयार स्टील आयात पिछले साल की तुलना में 45 प्रतिशत बढ़कर 13.68 लाख टन पहुंच गया. वहीं इसी अवधि में तैयार स्टील का निर्यात 27.4 प्रतिशत बढ़कर 9.77 लाख टन रहा. इससे साफ है कि भारत अभी भी तैयार स्टील का शुद्ध आयातक बना हुआ है. अप्रैल में स्टील आयात में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जबकि मई में यह बढ़कर 63 प्रतिशत तक पहुंच गई.
ब्रोकरेज फर्म एलारा सिक्योरिटीज का अनुमान है कि आने वाले समय में भी चीन से स्टील निर्यात और भारत का स्टील आयात ऊंचे स्तर पर बना रहेगा. इसकी सबसे बड़ी वजह भारतीय पाइप कंपनियों को लगातार मिल रहे निर्यात ऑर्डर हैं.
स्टील उद्योग पर क्या होगा असर?
इस पूरे घटनाक्रम का असर स्टील उद्योग के अलग-अलग क्षेत्रों पर अलग तरीके से पड़ेगा. स्टील पाइप बनाने वाली कंपनियों के लिए यह समय बेहद अनुकूल माना जा रहा है. पश्चिम एशिया और उत्तर अमेरिका में पाइपलाइन परियोजनाओं की संख्या बढ़ने से इन कंपनियों की आय और कारोबार में तेजी आने की संभावना है. वेलस्पन कॉर्प और जिंदल सॉ जैसी कंपनियां सऊदी अरब सहित पश्चिम एशिया के कई देशों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं ताकि इस बढ़ती मांग का पूरा लाभ उठाया जा सके.
घरेलू बाजार में बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धा
दूसरी ओर, स्टील बनाने वाली अन्य कंपनियों के सामने चुनौतियां बनी रह सकती हैं. चीन से लगातार स्टील की आपूर्ति और भारत में बढ़ते आयात के कारण घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है. इससे स्टील की कीमतों पर भी दबाव पड़ने की आशंका है. इसके अलावा मानसून के दौरान निर्माण गतिविधियां धीमी होने से स्टील की घरेलू मांग भी कुछ समय के लिए कमजोर रह सकती है. एलारा सिक्योरिटीज के विश्लेषक रवि सोधा का मानना है कि जिन स्टील कंपनियों की लागत कम है और जिनका कारोबार फ्लैट स्टील उत्पादों में अधिक है, वे आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं.
अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन हासिल करना जूरूरी
पश्चिम एशिया में तेल, गैस और पानी की पाइपलाइन परियोजनाओं में तेजी भारत के स्टील पाइप उद्योग के लिए बड़ा अवसर बनकर सामने आई है. हालांकि, इन ऑर्डरों को पूरा करने के लिए विशेष गुणवत्ता वाले स्टील का आयात करना आवश्यक है. ऐसे में भारत में स्टील आयात बढ़ रहा है, लेकिन यह बढ़ोतरी घरेलू मांग के कारण नहीं बल्कि निर्यात आधारित उत्पादन की वजह से हो रही है. आने वाले वर्षों में यदि भारत विशेष ग्रेड के स्टील का घरेलू उत्पादन बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन हासिल करने में सफल होता है, तो आयात पर निर्भरता कम होने के साथ स्टील उद्योग को और अधिक मजबूती मिल सकती है.
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