Shani Pradosh Vrat: निर्जला एकादशी के बाद जून के महीने में शनि प्रदोष व्रत भी रखा जाने वाला है. प्रदोष व्रत की सनातन धर्म में खास मान्यता होती है. ऐसे में इस दिन उपवास करा भी लाभकारी होता है. यह दिन महादेव को समर्पित होता है. दरअसल, जिस दिन प्रदोष पड़ता है, उसे उस दिन के अनुसार नाम दिया जाता है. शनिवार को होने की वजह से इसे शनि प्रदोष का व्रत कहते हैं. इस बार 27 जून 2026 को शनि प्रदोष का व्रत रखा जा रहा है. आइए जानते हैं इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त, प्रदोष व्रत का महत्व और किन मंत्रों का जाप करना फायदेमंद होता है.
प्रदोष व्रत का महिमा
ज्योतिषाचार्य पंडित हरीगोपाल शर्मा के अनुसार, सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव को समर्पित दिन माना जाता है. इस दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है. यह दिन उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए बेहद खास होता है. प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि की संध्या बेला, जिसे प्रदोष काल कहा जाता है, भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इस समय श्रद्धापूर्वक शिव पूजन, अभिषेक और मंत्र जाप करने से समस्त पापों से मुक्ति मिल जाती है. इस दिन व्रत करने से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है. इस दिन सुख-समृद्धि तथा जीवन में तरक्की की कामना करते हैं. जब शनिवार के दिन प्रदोष का व्रत पड़ता है तो अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए व्रत करते हैं.
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शनि प्रदोष व्रत 2026 की तिथि
द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 26 जून को रात 10 बजकर 21 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगी. वहीं, इस तिथि का समापन 28 जून को देर रात 12 बजकर 42 मिनट पर होगी फिर पूर्णिमा तिथि लग जाएगी. उदया तिथि के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत 27 जून को रखा जाएगा. इसलिए, यह शनिवार के कारण शनिप्रदोष व्रत बन जाता है.
शनि प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, शनि प्रदोष के दिन साध्य, शुभ और रवि योग का निर्माण हो रहा है. इस दिन साध्य योग सुबह 09:02 मिनट तक रहेगा. इसके बाद शुभ योग शुरू हो जाएगा. इसके बाद शाम 6:41 मिनट से रवि योग शुरू हो जाएगा, जो अगले दिन 28 जून 5:49 मिनट.
शनि प्रदोष व्रत में कैसे करें पूजा?
शनि प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें.
इसके बाद शनि प्रदोष पर दिन भर व्रत रखें और भगवान शिव और माता-पार्वती का नाम जप करें.
प्रदोष के दिन शाम के समय यानी प्रदोष काल में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा पूरे विधि-विधान से करें.
पूजा में शिवलिंग पर जलाभिषेक करें, गंगाजल, दूध, दही, शहद और गन्ने का रस चढ़ाएं.
इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प, आक, भस्म और भांग चढ़ाएं.
अब शिवजी का पूजन करते हुए ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें. प्रदोष व्रत के दिन शिव पंचाक्षर और प्रदोष कथा जरूर सुने.
शनि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
शनि प्रदोष व्रत करने से भोलेनाथ के साथ-साथ शनिदेव का आशीर्वाद भी मिलता है. शनि प्रदोष का व्रत रखने से मौजूदा शनि के संबंधित दोषों, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रकोप से राहत मिलती है. शनि प्रदोष व्रत करने से सुख-शांति और धन संपदा में बढ़ोतरी होती है और भगवान शिव की विशेष कृपा मिलती है.
प्रदोष व्रत में करें इन मंत्रों का जाप
पंचाक्षरी मंत्र (सर्वश्रेष्ठ शिव मंत्र)
ऊं नम: शिवाय. इस मंत्र का 108 बार जाप करें.
महामृत्युंजय मंत्र
ऊं त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
शिव गायत्री मंत्र:
ऊं तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
शिव ध्यान मंत्र
करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं व।
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्॥
विहितमविहितं वा सर्वमेतत् क्षमस्व।
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥
शनि प्रदोष व्रत के दिन करने वाले उपाय
- काले तिल और जल मिलाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करें.
- पूजा के दौरान शिवलिंग पर बेलपत्र और शमी के पत्ते अर्पित करें. इस उपाय को करने से शनि की साढ़ेसाती के प्रकोप से बचने में मदद मिलती है.
- सरसों के तेल का दीपक शाम को जरूर जलाएं.
- शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर सात परिक्रमा करें.
शनि प्रदोष व्रत में क्या करें और क्या न करें?
शनि प्रदोष व्रत में सूर्यास्त के डेढ़ घंटे पहले और बाद के समय में पूजा करें. यही प्रदोष काल होता है.
शनि प्रदोष व्रत के दिन लोहे से बनी वस्तुओं का दान करना चाहिए जैसे काले तिल, काला वस्त्र और सरसों तेल.
प्रदोष व्रत के दिन सात्विकता अपनाएं.
क्या न करें?
शनि प्रदोष व्रत पर अहंकार और विवादों से बचें.
तामसिक भोजन से परहेज करें.
इस दिन लोहे का दान करें, उसे खरीदे नहीं.
बाल और नाखून न काटें.
शनि प्रदोष का पारण कब होगा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन किया जाता है. इसलिए, शनि प्रदोष व्रत का पारण 28 जून को किया जाएगा. प्रदोष व्रत का पारण करने के लिए शुभ मुहूर्त इस दिन सुबह 5 बजकर 49 मिनट के बाद किया जा सकता है.
किन लोगों को यह व्रत करना चाहिए?
- जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष हो.
- साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो.
- नौकरी और कारोबार में बाधाएं आ रही हों.
- वैवाहिक जीवन या आर्थिक समस्याएं हों.
- संतान सुख और स्वास्थ्य की कामना करने वाले श्रद्धालु को.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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