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Tungabhadra Water Dispute: दक्षिण भारत में एक बार फिर तुंगभद्रा जल विवाद शुरू हो गया है। तुंगभद्रा जल विवाद कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच नदी के पानी के बंटवारे को लेकर है। नई सिंचाई योजनाओं और बांध के पानी के इस्तेमाल को लेकर भी तीनों राज्यों में लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। यह विवाद कई दशकों से जारी है। एक फिर इस विवाद को तूल मिला है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने गत 24 जून को केंद्र सरकार से इस मामले में दखल देने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के साथ मिलकर ऐसा समाधान निकाले, जिससे तेलंगाना को तुंगभद्रा नदी के पानी में उसका उचित हिस्सा मिल सके। आइए विस्तार से समझते हैं आखिर तुंगभद्र जल विवाद है क्या?
क्या है तुंगभद्रा जल विवाद?
आखिर कब शुरू हुआ पूरा विवाद?
इस विवाद की शुरुआत साल 1861 में हुई, जब तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी ने कुरनूल-कुडप्पा नहर (KC Canal) बनाने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद मैसूर (अब कर्नाटक) और मद्रास के बीच नदी के पानी के इस्तेमाल को लेकर मतभेद शुरू हो गए। विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 अप्रैल 1969 को कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण बनाया। आज भी यह मामला समय-समय पर गाद जमा होने, पानी की कमी और आंध्र प्रदेश व तेलंगाना के बीच पानी के बंटवारे को लेकर चर्चा में रहता है।
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विवाद के प्रमुख कारण और मौजूदा स्थिति
राजोलीबांडा डायवर्जन स्कीम (RDS)
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच आरडीएस नहर के पानी को लेकर लंबे समय से विवाद है। तेलंगाना का कहना है कि उसे तय 15.9 टीएमसी पानी का पूरा हिस्सा नहीं मिल पाता, क्योंकि ऊपर के राज्यों में ज्यादा पानी रोक लिया जाता है या इस्तेमाल कर लिया जाता है।
अपर भद्रा परियोजना
कर्नाटक की अपर भद्रा परियोजना का आंध्र प्रदेश और तेलंगाना विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे तुंगभद्रा नदी का पानी ऊपर ही रोक लिया जाएगा, जिससे निचले इलाकों में पानी की कमी हो सकती है। इस मामले को लेकर आंध्र प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुकी है।
बांध में गाद जमा होना
तुंगभद्रा बांध में बड़ी मात्रा में गाद जमा हो गई है। इससे बांध की पानी जमा करने की क्षमता कम हो गई है और पानी के बंटवारे को लेकर राज्यों के बीच विवाद बढ़ गया है।
अब कहां आ रही दिक्कत?
नई परियोजनाओं पर विवाद
कर्नाटक की ऊपरी भद्रा परियोजना (Upper Bhadra Project) को लेकर आंध्र प्रदेश ने आपत्ति जताई है। आंध्र प्रदेश का कहना है कि इस परियोजना से पानी ऊपर ही रोक लिया जाएगा, जिससे नीचे के इलाकों और किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
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पानी की मात्रा कम होने का मुद्दा
तेलंगाना का आरोप है कि उसे तय 15.9 टीएमसी पानी का पूरा हिस्सा नहीं मिल रहा है। राज्य का कहना है कि नदी में पानी का बहाव कम होकर 5-6 टीएमसी तक रह गया है। वहीं, आंध्र प्रदेश पर ज्यादा पानी इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया जाता है, जिससे निचले इलाकों के जल स्तर पर असर पड़ता है।
बांध की मरम्मत और ऊंचाई को लेकर विवाद
राजोलीबांडा डायवर्जन स्कीम (RDS) की दीवारें और पाइपलाइनें खराब होने के कारण उनकी मरम्मत को लेकर विवाद है। आंध्र प्रदेश को आशंका है कि अगर दीवार की ऊंचाई बढ़ाई गई तो उसके हिस्से का पानी कम हो सकता है, इसलिए वह इसका विरोध करता है।
केंद्र सरकार का क्या है रुख?
तुंगभद्रा जल विवाद पर केंद्र सरकार का कहना है कि इस मामले का हल आपसी बातचीत और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल से निकाला जाना चाहिए। केंद्र के जल शक्ति मंत्रालय का मानना है कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर पानी के बंटवारे और बांध में जमा गाद (Silt) की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है, ताकि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक—तीनों राज्यों के किसानों को इसका फायदा मिल सके।
केंद्र का पक्ष और उठाए गए कदम
सक्रिय मध्यस्थता
केंद्र सरकार इस विवाद को सुलझाने के लिए तीनों राज्यों—तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक को साथ लाने की कोशिश कर रही है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में बैठकें आयोजित कर सभी पक्षों से बातचीत के जरिए व्यावहारिक समाधान निकालने पर जोर दिया जा रहा है।
सीडब्ल्यूसी (CWC) की भूमिका
केंद्र का मानना है कि तुंगभद्रा नदी के पानी का सही इस्तेमाल और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए तुंगभद्रा बोर्ड को केंद्रीय जल आयोग की मदद से और मजबूत किया जाना चाहिए।
गाद (Silt) की समस्या का समाधान
नदी और बांध में जमा गाद पानी के बहाव में बड़ी रुकावट बन रही है। केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर इस तकनीकी समस्या को दूर करने के उपायों पर काम कर रही है।
राजोलीबांडा डायवर्जन स्कीम (RDS)
केंद्र राज्यों से कह रहा है कि आरडीएस के तहत मिले पानी का बेहतर और पूरा इस्तेमाल किया जाए। फिलहाल तय 17.9 टीएमसी पानी में से बहुत कम मात्रा का ही उपयोग हो पा रहा है, जिसे बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
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