Odisha Flood: 95 हजार से अधिक लोग सुरक्षित निकाले गए, 6 जिलों में स्थिति गंभीर
ओडिशा के छह जिलों में शनिवार को बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी रही। पिछले 24 घंटों में भारी बारिश के कारण राज्य सरकार ने निचले इलाकों से 95 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार बाढ़ से बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज, क्योंझर और केंद्रपाड़ा जिलों के 52 प्रखंडों के 503 गांवों में लगभग 2.70 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इन जिलों में बैतरणी, ब्राह्मणी, जालका और बुधबलंगा नदियों तथा उनकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि उत्तरी ओडिशा में बारिश जारी रहने के बीच राज्य प्रशासन ने बचाव और राहत कार्यों को तेज कर दिया है।
आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि कुल 95,206 लोगों को 226 राहत शिविरों में पहुंचाया गया है, जहां पका हुआ भोजन, सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता, रोशनी और चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की गई है। पुजारी ने कहा कि संबंधित जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों (डीईओसी) के साथ समन्वय करके स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि मयूरभंज, बालासोर, भद्रक, जाजपुर और क्योंझर जिलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में बचाव, राहत और आपातकालीन कार्यों के लिए 118 प्रतिक्रिया दल तैनात किए हैं। मंत्री ने कहा कि सभी नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है और संवेदनशील स्थानों पर एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। इस बीच, मौसम विभाग ने शाम के बुलेटिन में कहा कि दक्षिण-पूर्वी झारखंड और आसपास के क्षेत्रों के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र अब कमजोर पड़ गया है।
इसमें कहा गया है कि हालांकि, अगले 48 घंटों के दौरान उत्तर बंगाल की खाड़ी के ऊपर निम्न दबाव का एक और क्षेत्र बनने का अनुमान है।
Jharkhand exam row: रांची में भर्ती धांधली के खिलाफ छात्रों की Tiranga Yatra, 20 को घेराव
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने शनिवार को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रांची में ‘तिरंगा यात्रा’ निकाली और 20 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास का घेराव करने की घोषणा की। प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि रविवार को राज्य के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाए जाएंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ झामुमो-कांग्रेस गठबंधन उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई करने में विफल रहा है। छात्रों के आंदोलन का शनिवार को 22वां दिन है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रांची में निकाली गई तिरंगा यात्रा में हजारों छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी शामिल हुए।
इनमें दो ऐसे प्रदर्शनकारी भी शामिल थे जो व्हीलचेयर पर हैं और अनशन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और रिफॉर्म की मांग कर रहे हैं। जेएसएससी-जेपीएससी रिफॉर्म मंच के नेता रविंद्र पासवान ने कहा, ‘‘हम 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।
हम मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हैं, क्योंकि झामुमो और कांग्रेस दोनों हमारे साथ राजनीति कर रहे हैं। अगर मुख्यमंत्री उनकी बात नहीं सुन रहे हैं तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी को झामुमो नीत गठबंधन से समर्थन वापस लेना चाहिए।’’ प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगें पूरी नहीं करती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। उनकी प्रमुख मांगों में जिन परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी मिली है, उन्हें रद्द करना और भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराना शामिल है।
छात्रों ने अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति से कराने की मांग की है। जेएसएससी-जेपीएससी रिफॉर्म मंच ने संदिग्ध मानी जा रही जेएसएससी-सीजीएल और कुछ जेपीएससी परीक्षाओं को रद्द करने की भी मांग की है। प्रदर्शनकारियों ने झारखंड के छात्रों से 20 अगस्त को प्रस्तावित घेराव में शामिल होने के लिए रांची पहुंचने की अपील की।
उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। छात्र नेताओं ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने छात्रों का समर्थन किया था, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने मांग की कि यदि झामुमो सरकार उनकी चिंताओं पर कार्रवाई नहीं करती है तो कांग्रेस को अपना समर्थन वापस लेना चाहिए।
तिरंगा यात्रा की शुरुआत रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से हुई, जहां छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। यात्रा अल्बर्ट एक्का चौक पर समाप्त हुई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारे लगाए।
जेएलकेएम नेता देवेंद्र मांझी, जो पिछले 14 दिनों से अनशन पर हैं, ने आरोप लगाया कि वह मार्च में शामिल नहीं हों इसके लिए पुलिस ने उन्हें सदर अस्पताल से बाहर निकलने से रोका। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी प्रसारित हुए, जिनमें कथित तौर पर मांझी और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प देखी गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता और हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
जेएसएससी-जेपीएससी रिफॉर्म मंच ने कहा, “स्वतंत्रता का अर्थ केवल अंग्रेजों से आजादी नहीं है, बल्कि अवसरों की असमानता, भ्रष्टाचार और अन्याय से मुक्ति भी है।” मंच ने युवाओं से अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने की अपील की। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक चंपई सोरेन ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए उसे “तानाशाह सरकार” बताया और पूछा कि वह कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की सिफारिश करने से क्यों बच रही है। जमशेदपुर के भुइयांडीह में पत्रकारों से बातचीत में चंपई सोरेन ने कहा कि सैकड़ों छात्र अपने घरों से दूर स्वतंत्रता दिवस पर भी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में रहने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा, “अगर आप नौकरी बेचने वाले गिरोह का हिस्सा नहीं हैं तो सीबीआई जांच की सिफारिश करने में क्या परेशानी है?” वहीं, राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाने की बात कही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में कहा कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों ने नौकरी के इच्छुक युवाओं की पूरी पीढ़ी के भरोसे को प्रभावित किया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ प्रभाव और पद की परवाह किए बिना कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बिना प्रमाण किसी को दोषी घोषित करने के प्रति भी सतर्क किया और कहा कि न्याय तथ्यों पर आधारित होना चाहिए।
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