'हिंदू-मुस्लिम की शादी मुश्किल होती है...', विंदू को फरहा संग इंटरफेथ मैरिज करने पर दारा सिंह ने किया था आगाह
Vindu Dara Singh on His Father: एक्टर विंदू दारा सिंह इन दिनों अपनी दूसरी पत्नी दीना उमारोवा के साथ खुशहाल शादीशुदा जीवन जी रहे हैं. हालांकि उनकी निजी जिंदगी का एक ऐसा चेप्टर भी रहा है, जिसकी चर्चा आज भी होती है. विंदू की पहली शादी बॉलीवुड एक्ट्रेस फरहा नाज से हुई थी, जो मशहूर एक्ट्रेस तब्बू की बड़ी बहन हैं. दोनों ने साल 1996 में इंटरफेथ (हिंदू-मुस्लिम) शादी की थी, लेकिन करीब छह साल बाद 2002 में उनका तलाक हो गया.
अब कई साल बाद विंदू दारा सिंह ने अपनी पहली शादी, तलाक और पिता दारा सिंह की सलाह को लेकर खुलकर बात की है. उन्होंने बताया कि उनके पिता ने शादी से पहले ही उन्हें इंटरफेथ मैरिज की चुनौतियों के बारे में चेतावनी दी थी. उस समय उन्होंने पिता की बात को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन आज पीछे मुड़कर देखते हैं तो महसूस होता है कि उनकी बात में काफी सच्चाई थी.
पिता दारा सिंह ने पहले ही कर दिया था सावधान
विंदू दारा सिंह ने हाल ही में 'कड़क' को दिए इंटरव्यू में बताया कि जब उन्होंने पिता से फरहा नाज से शादी करने की इच्छा जताई थी, तब दारा सिंह ने उन्हें समझाने की कोशिश की थी. उन्होंने कहा था कि हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों की शादी निभाना आसान नहीं होता और अक्सर समय के साथ कई तरह की चुनौतियां सामने आती हैं. विंदू के मुताबिक, उनके पिता ने उनसे कहा था कि इस फैसले पर अच्छी तरह सोच लें क्योंकि कई बार ऐसी शादियां आखिर में मुश्किलों का सामना करती हैं. लेकिन उस वक्त उन्हें पूरा विश्वास था कि उनके रिश्ते में ऐसा कुछ नहीं होगा.
सभी धर्मों में विश्वास रखते थे दारा सिंह
विंदू ने साफ किया कि उनके पिता कभी भी धर्म के आधार पर लोगों में भेदभाव नहीं करते थे. उनका मानना था कि सभी धर्म बराबर हैं और हर इंसान का सम्मान होना चाहिए. उन्होंने बताया कि दारा सिंह हमेशा कहते थे कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी भाई-भाई हैं. इसलिए उनकी सलाह किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं थी, बल्कि वो सिर्फ वैवाहिक जीवन में आने वाली प्रैक्टिकल चुनौतियों को लेकर उन्हें आगाह कर रहे थे.
'पिता सही थे, लेकिन मुझे कोई पछतावा नहीं'
विंदू दारा सिंह ने स्वीकार किया कि आज उन्हें महसूस होता है कि उनके पिता का अनुभव सही था. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें अपनी पहली शादी का कोई पछतावा नहीं है क्योंकि उसी रिश्ते से उन्हें उनका बेटा फतेह मिला, जो उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा है. उन्होंने कहा कि अगर उस शादी से उन्हें फतेह जैसा बेटा मिला है, तो वो उस रिश्ते को लेकर कभी अफसोस नहीं कर सकते. उनके लिए उनका बेटा किसी भी चीज से बढ़कर है और वह उससे बेहद प्यार करते हैं.
'माता-पिता की सलाह को हल्के में नहीं लेना चाहिए'
इंटरव्यू में विंदू ने युवाओं को भी एक अहम मैसेज दिया. उन्होंने कहा कि अक्सर बच्चे सोचते हैं कि माता-पिता पुरानी सोच के हैं और उन्हें मॉडर्न रिश्तों की समझ नहीं है. लेकिन असलियत ये है कि माता-पिता जीवन के लंबे अनुभव के आधार पर सलाह देते हैं. विंदू ने कहा कि कई बार माता-पिता की चेतावनी या सलाह को भगवान का संकेत समझना चाहिए, क्योंकि वो अपने बच्चों का बुरा कभी नहीं चाहते.
शादी टूटने की वजह पर भी की खुलकर बात
जब विंदू दारा सिंह से पूछा गया कि क्या उनकी शादी टूटने की सबसे बड़ी वजह धर्म था, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब दिया कि 'बिल्कुल'. उन्होंने बताया कि शादी के शुरुआती वर्षों में धर्म उनके रिश्ते के बीच कभी नहीं आया. दोनों सामान्य तरीके से जीवन बिता रहे थे और धार्मिक मतभेद जैसी कोई समस्या नहीं थी. लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलने लगीं.
'फरहा अचानक बहुत ज्यादा धार्मिक हो गई थीं'
विंदू के मुताबिक, रिश्ते में असली बदलाव तब आया जब फरहा नाज अचानक पहले की तुलना में काफी ज्यादा धार्मिक हो गईं. उन्होंने कहा कि उनके परिवार में पहले कभी बहुत ज्यादा धार्मिक माहौल नहीं रहा था, इसलिए इस बदलाव ने दोनों के बीच कई तरह के मतभेद पैदा कर दिए. उनका कहना था कि जब किसी रिश्ते में अचानक लाइफस्टाइल और सोच में इतना बड़ा बदलाव आता है, तो उसे संभालना मुश्किल हो जाता है. उनके अनुसार यही उनकी शादी टूटने का सबसे बड़ा कारण बना.
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