लैथम -कॉन्वे के शतक से न्यूजीलैंड तीसरे टेस्ट में मजबूत:पहले दिन न्यूजीलैंड के 361 रन; आखिरी सेशन में इंग्लैंड की वापसी
इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच ट्रेंट ब्रिज में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट के पहले दिन न्यूजीलैंड ने मजबूत शुरुआत की। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम ने दिन का खेल खत्म होने तक 4 विकेट पर 361 रन बनाए। ओपनर डेवोन कॉन्वे (157) और कप्तान टॉम लैथम (151) ने पहले विकेट के लिए 317 रन जोड़कर टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। दोनों ने इसी साल माउंट माउंगानुई में वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले विकेट के लिए 323 रन की साझेदारी भी की थी, जो उनकी सर्वश्रेष्ठ ओपनिंग साझेदारी है। हालांकि, आखिरी सेशन में इंग्लैंड ने मैच में वापसी करते हुए 44 रन के भीतर 4 विकेट झटक दिए। स्टंप्स के समय क्रीज पर हेनरी निकोल्स और नाइटवॉचर विल ओ'रूर्के मौजूद थे। लैथम ने मार्टिन क्रो की बराबरी की लाथम का यह टेस्ट करियर का 17वां शतक है। इसके साथ ही उन्होंने न्यूजीलैंड के बल्लेबाज मार्टिन क्रो के टेस्ट शतकों की बराबरी कर ली। दूसरी ओर, कॉन्वे ने अपने टेस्ट करियर का आठवां शतक पूरा किया। चोटों से परेशान न्यूजीलैंड को टॉस जीतने से मिली बड़ी राहत मैच से ठीक पहले न्यूजीलैंड की टीम को दो बड़े झटके लगे थे। पिछले हफ्ते द ओवल टेस्ट में 11 विकेट लेकर प्लेयर ऑफ द मैच रहे तेज गेंदबाज मैट हेनरी (पैर की चोट) और पहली पारी में शतक लगाने वाले ग्लेन फिलिप्स (साइड स्ट्रेन) चोट के कारण मैच से बाहर हो गए। उनकी जगह मिचेल सैंटनर और बेन सियर्स को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। ऐसे में कप्तान टॉम लाथम ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का सही फैसला किया, जिससे टीम को इस झटके से उबरने और सपाट पिच पर बड़ा स्कोर बनाने का मौका मिल गया।, कॉन्वे और लैथम को मिले जीवनदान न्यूजीलैंड की बड़ी साझेदारी के दौरान इंग्लैंड ने कई मौके गंवाए। पारी के शुरुआती ओवरों में ही जोफ्रा आर्चर की गेंद पर स्लिप कॉर्डन में बदलाव के तुरंत बाद टॉम लाथम का कैच उसी खाली जगह से निकल गया। इसके बाद स्पिनर शोएब बशीर की गेंद पर 71 रन के स्कोर पर डेवोन कॉन्वे एलबीडब्ल्यू थे, लेकिन इंग्लैंड ने डीआरएस नहीं लिया। रिप्ले में गेंद सीधे स्टंप्स पर लगती दिखी। वहीं, 129 रन पर गस एटकिंसन की गेंद पर विकेटकीपर जेमी स्मिथ ने लाथम का लेग साइड पर आसान कैच छोड़ दिया। इन दोनों जीवनदानों का न्यूजीलैंड ने पूरा फायदा उठाया और कॉन्वे-लाथम ने पहले विकेट के लिए 317 रन की रिकॉर्ड साझेदारी कर डाली। आखिरी सेशन में इंग्लैंड की वापसी न्यूजीलैंड एक समय बिना किसी नुकसान के 317 रन बनाकर पूरी तरह हावी नजर आ रही थी, लेकिन दिन के अंतिम सेशन में इंग्लैंड ने शानदार वापसी की। कप्तान बेन स्टोक्स ने अपने 13वें ओवर में टॉम लाथम को आउट कर 317 रन की रिकॉर्ड ओपनिंग साझेदारी तोड़ी। इसके सिर्फ सात गेंद बाद जो रूट ने डेवोन कॉन्वे को लॉन्ग-ऑन पर कैच कराकर न्यूजीलैंड को दूसरा झटका दिया। इसके बाद इंग्लैंड ने दबाव बनाए रखा। दिन का खेल समाप्त होने से कुछ मिनट पहले गस एटकिंसन ने रचिन रवींद्र को पवेलियन भेजा, जबकि आखिरी ओवर में जोफ्रा आर्चर ने हेनरी निकोल्स (14) को विकेटकीपर के हाथों कैच कराकर न्यूजीलैंड का चौथा विकेट गिराया। इस तरह इंग्लैंड ने 44 रन के भीतर चार विकेट लेकर मुकाबले में दमदार वापसी की। हालांकि, मेजबान टीम के लिए चिंता की बात यह रही कि तेज गेंदबाज जोश टंग हैमस्ट्रिंग में परेशानी के कारण तीसरे सेशन में सिर्फ एक ओवर ही फेंक सके।
मूवी रिव्यूः वेलकम टू द जंगल:लॉजिक छुट्टी पर, लेकिन हंसी का ओवरडोज, सालों बाद रवीना-अक्षय की जोड़ी ने जीता दिल
स्टारकास्ट- अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, परेश रावल, जैकी श्रॉफ, रवीना टंडन, जैकलीन फर्नांडिस डायरेक्टर- अहमद खान रेटिंग- 3.5 स्टार्स अवधि- 2 घंटे 44 मिनट 'वेलकम टू द जंगल' का मकसद सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन करना है और फिल्म शुरुआत से ही यह बात साफ कर देती है, यहां लॉजिक भी छुट्टी पर है और हंसी ड्यूटी पर। करीब तीन दर्जन कलाकारों से सजी यह कॉमेडी हर कुछ मिनट बाद नया किरदार, कॉमेडी और बवाल लेकर आती है। कहानी कई बार तर्क से दूर जरूर जाती है, लेकिन अगर आप लॉजिक को थोड़ी देर के लिए किनारे रख दें (या पॉपकॉर्न के साथ निगल लें) तो अक्षय कुमार की कॉमिक टाइमिंग, रवीना टंडन के साथ उनकी केमिस्ट्री और बाकी कलाकारों की मस्ती आपको लगातार हंसाती रहती है। कैसी है फिल्म की कहानी? कहानी बड़े कारोबारी सिन्हा (जाकिर हुसैन) से शुरू होती है, जिसे पता चलता है कि सरकार बदलने के बाद उसका काला धन सरकारी एजेंसियों के रडार पर आने वाला है। उसका निजी सचिव दुबे (जॉनी लिवर) सलाह देता है कि पूरा पैसा एक फ्लॉप फिल्म बनाने में लगा दिया जाए, क्योंकि काला धन वहां खपाया जा सकता है I इसके बाद दो नाकाम निर्देशक देव और दास (राजपाल यादव और परेश रावल), फ्लॉप अभिनेता राजीव (अक्षय कुमार), कमजोर नजर वाला छायाकार (श्रेयस तलपड़े) और कई अजीबोगरीब कलाकारों के साथ फिल्म की शूटिंग शुरू हो जाती है। इसी बीच सिन्हा के घर पर छापा पड़ जाता है और उसकी पूरी अवैध संपत्ति जब्त हो जाती है। अब उसके पास आखिरी उम्मीद यही फिल्म बचती है। वह दुबे को आदेश देता है कि बिना किसी अतिरिक्त बजट के एक ही दिन में फिल्म पूरी करनी होगी, यानी ‘जुगाड़’ ही असली हीरो है। इसी मजबूरी में पूरी टीम बॉर्डर से लगे आजादगंज गांव पहुंचती है। यहां गांव वाले इन्हें भारतीय सेना समझ बैठते हैं क्योंकि वे आतंकी सरगना जतारा के अत्याचारों से परेशान हैं। इसके बाद फिल्म कॉमेडी से निकलकर हल्के भावनात्मक मोड़ भी लेती है। दूसरे हिस्से में कुछ दृश्य कॉमिक 'बजरंगी भाईजान' की याद भी दिलाते हैं। आखिरकार यह टीम गांव वालों को जतारा के आतंक से कैसे बचाती है, यही फिल्म का क्लाइमैक्स है, जहां लॉजिक थोड़ा और पीछे छूट जाता है, लेकिन मस्ती से हंसते-हंसते लोटपोट जरुर है । कैसी है कलाकारों की एक्टिंग? अक्षय कुमार अपने पुराने कॉमिक अवतार में लौटे हैं और पूरी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत भी वही हैं। खास बात यह है कि संवादों में कई बार उन्होंने खुद अपनी छवि का मजाक भी उड़ाया है और वही दृश्य सबसे ज्यादा हंसी लेकर आते हैं, जैसे वो खुद भी जानते हों कि यहां लॉजिक नहीं, टाइमिंग काम आएगी। रवीना टंडन का स्क्रीन टाइम भले कम हो, लेकिन जब भी वह पर्दे पर आती हैं, पूरा ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं। लंबे समय बाद अक्षय और रवीना को साथ देखना फिल्म का सबसे यादगार हिस्सा बन जाता है। सुनील शेट्टी और अरशद वारसी अपनी पुरानी छवि में खूब जमे हैं। 'आवारा पागल दीवाना' वाले अंदाज में सुनील शेट्टी फिर से मजा देते हैं। परेश रावल, जॉनी लीवर, फरीदा जलाल और किरण कुमार अपने छोटे छोटे किरदारों में भी जमकर हंसाते हैं। जैकी श्रॉफ खलनायक के रूप में प्रभाव छोड़ते हैं। दिशा पाटनी और जैकलीन फर्नांडिस फिल्म में ग्लैमर का तड़का लगाती हैं। डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष कैसा है? दिवंगत नीरज वोहरा की कहानी का विचार दिलचस्प है। निर्देशक अहमद खान की सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि उन्होंने इतने बड़े कलाकारों की फौज को संतुलित तरीके से संभाला है और लगभग हर कलाकार को चमकने का मौका दिया है। फिल्म के संवाद लगातार हंसाते हैं और कई कॉमिक पंच लंबे समय तक याद रहते हैं। हालांकि पहले हिस्से में कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जहां लगता है कि एडिटिंग भी शायद छुट्टी पर चली गई थी। दूसरे भाग में भी कुछ हिस्सों की एडिटिंग और बेहतर हो सकती थी। फिल्म थोड़ी और कसी होती तो मनोरंजन का स्तर और ऊपर पहुंच सकता था। छायांकन, एक्शन और लोकेशन कहानी के मुताबिक अच्छे हैं। हालांकि पहले हिस्से में कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जहां एडिटिंग थोड़ी और कसी जा सकती थी। दूसरे भाग में भी कुछ हिस्सों की एडिटिंग और बेहतर हो सकती थी। फिल्म थोड़ी और टाइट होती तो मनोरंजन का स्तर और ऊपर पहुंच सकता था। छायांकन, एक्शन और लोकेशन कहानी के मुताबिक अच्छे हैं। VFX ठीक ठाक ही है। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? फिल्म का संगीत कहानी के साथ चलता है, लेकिन ऐसा कोई गाना नहीं है जो सिनेमाघर से निकलने के बाद लंबे समय तक याद रह जाए। बैकग्राउंड संगीत कॉमेडी के माहौल को जरूर मजबूत करता है। फाइनल वर्डिक्ट- फिल्म देखें या नहीं? 'वेलकम टू द जंगल' ऐसी फिल्म नहीं है जिसमें हर सीन का तर्क तलाशा जाए, क्योंकि अगर आप ढूंढेंगे, तो शायद हंसी छूट जाएगी। यह उन दर्शकों के लिए बनी है जो परिवार या दोस्तों के साथ बैठकर खुलकर हंसना चाहते हैं। अक्षय कुमार का पुराना कॉमिक अंदाज, रवीना टंडन के साथ उनकी शानदार केमिस्ट्री और सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, परेश रावल, जॉनी लीवर, फरीदा जलाल जैसे कलाकार मिलकर फिल्म को मनोरंजक बना देते हैं।






















