26 जून से भारत-आयरलैंड टी20 सीरीज का आगाज, मैच टाइम में हुआ बड़ा बदलाव, जानें अब कितने बजे शुरू होंगे मुकाबले
क्रिकेट प्रेमियों को भारत बनाम आयरलैंड टी20 सीरीज के रोमांचक मुकाबले देखने में कोई परेशानी न हो, इसलिए मैच के बदले हुए समय का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। कहीं ऐसा न हो कि आप अपने तय समय पर टीवी या स्टेडियम के सामने बैठें और तब तक मैच का महत्वपूर्ण हिस्सा निकल चुका हो। भारतीय टीम आयरलैंड के दौरे पर दो टी20 मुकाबले खेलने जा रही है, और इस सीरीज में टीम काफी बदली हुई नजर आएगी, साथ ही मैच के समय में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है।
यह सीरीज 26 जून से शुरू होने जा रही है, जिसमें दो टी20 मैच खेले जाएंगे। पहला मुकाबला 26 जून, शुक्रवार को होगा, जिसके बाद दूसरा मैच 28 जून, रविवार को खेला जाएगा। इन मुकाबलों के लिए भारतीय टीम श्रेयस अय्यर की कप्तानी में आयरलैंड पहुंच चुकी है। इन मैचों के बाद भारतीय टीम इंग्लैंड के लिए रवाना होगी, जहां पांच टी20 मैचों की एक और महत्वपूर्ण सीरीज खेली जानी है। 2026 टी20 विश्व कप के बाद भारतीय टीम अब टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने के लिए मैदान पर उतर रही है, और इसे 2028 में होने वाले टी20 विश्व कप की तैयारियों के एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में भी देखा जा रहा है।
शाम 6 बजे शुरू होंगे भारत-आयरलैंड मुकाबले
दर्शकों की सुविधा के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि सीरीज के मैच भारतीय समयानुसार शाम सात बजे से शुरू नहीं होंगे। ये मुकाबले शाम छह बजे से ही शुरू हो जाएंगे। यानी, सामान्य से एक घंटा पहले। मैच से ठीक आधा घंटा पहले, यानी शाम साढ़े पांच बजे टॉस होगा। इसी वक्त यह भी स्पष्ट हो पाएगा कि क्या युवा वैभव सूर्यवंशी को अंतरराष्ट्रीय पदार्पण का मौका मिलेगा या उन्हें थोड़ा और इंतजार करना होगा। क्रिकेट आयरलैंड ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि भारत के खिलाफ दोनों टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच भारतीय समयानुसार शाम छह बजे से शुरू होंगे। समय में यह बदलाव भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया विमेंस टी20 वर्ल्ड कप मैच को देखते हुए जानबूझकर एक घंटा आगे किया गया है ताकि दर्शक दोनों महत्वपूर्ण मुकाबलों का लुत्फ उठा सकें। इसलिए, मैच के इस नए वक्त का खास ख्याल रखें।
टी20 सीरीज के लिए दोनों देशों की टीमें
आयरलैंड के खिलाफ इस टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम में कई नए और युवा चेहरे शामिल हैं। टीम इस प्रकार है: श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेट कीपर), ईशान किशन (विकेट कीपर), शिवम दुबे, तिलक वर्मा (उप-कप्तान), अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव, वैभव सूर्यवंशी, सूर्यांश शेडगे और प्रसिद्ध कृष्णा।
वहीं, मेजबान आयरलैंड की टीम भी भारत को कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनकी टीम इस प्रकार है: लोर्कन टकर (कप्तान), रॉस अडायर, बेंजामिन कैलिट्ज़, गैरेथ डेलानी, जॉर्ज डॉकरेल, स्टीफन डोहेनी, मैथ्यू हम्फ्रीज़, गेविन होए, मैथ्यू होलार्ड, लियाम मैकार्थी, जय मूंद्रा, हैरी टेक्टर, टिम टेक्टर और रूबेन विल्सन।
धर्मेंद्र प्रधान ने NCERT सिलेबस में आपातकाल पर अध्याय शामिल करने का समर्थन किया, कहा “आने वाली पीढ़ियों को हो जानकारी”
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एनसीईआरटी के सिलेबस में आपातकाल से संबंधित अध्याय शामिल किए जाने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को देश के इतिहास के ऐसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील अध्यायों की जानकारी होना जरूरी है, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति जागरूकता बढ़े और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो।
चंडीगढ़ में एएनआई से बातचीत के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने कहा “यह सही है। NCERT ने सही किया है। आने वाली पीढ़ियों को आपातकाल जैसे काले कारनामों को जानना और समझना चाहिए ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न आए। इसीलिए NCERT ने इसे विषय में लाया है और अच्छा काम किया है।”
पाठ्यक्रम में शामिल हुआ आपातकाल का अध्याय
बता दें कि एनसीईआरटी की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में वर्ष 1975 से 1977 के बीच लागू किए गए आपातकाल से जुड़े घटनाक्रम, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उसके प्रभाव और नागरिक अधिकारों पर पड़े असर का उल्लेख किया गया है। पाठ्यक्रम में इस दौर को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को संविधान, लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं के महत्व को समझने में मदद मिल सके।
नई किताब ‘Understanding Society: India and Beyond’ (ग्रेड 9, पार्ट 1) के अध्याय 6 में ‘लोकतंत्र की चुनौतियां’ (Challenges to Democracy) शीर्षक के अंतर्गत यह सेक्शन जोड़ा गया है। इसमें आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक प्रमुख चुनौती बताया गया है। पुस्तक में यह उल्लेख है कि आपातकाल के दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए। वहीं प्रेस सेंसरशिप बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों का भी संदर्भ दिया गया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने इस कदम का समर्थन किया
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि देश के इतिहास के सभी महत्वपूर्ण अध्यायों को निष्पक्ष रूप से पढ़ाया जाना चाहिए। उनके अनुसार आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा दौर है जिसे समझना नई पीढ़ी के लिए आवश्यक है ताकि लोकतांत्रिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संविधान की महत्ता के प्रति जागरूकता बनी रहे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा सिर्फ तथ्यों तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि विद्यार्थियों को इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं से सीख लेने का अवसर भी देना चाहिए। उनका कहना था कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए युवाओं को उन परिस्थितियों के बारे में जानना आवश्यक है, जब संवैधानिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों पर व्यापक प्रभाव पड़ा था।
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