Kal Ka Mausam: देश के 17 राज्यों में आंधी-तूफान के साथ बारिश की चेतावनी, देखें IMD का अलर्ट
Kal Ka Mausam: दक्षिण-पश्चिम मानसून ने महाराष्ट्र में दस्तक देते ही झमाझम बारिश की शुरुआत कर दी. मंगलवार रात मायानगरी मुंबई में भारी बारिश हुई. इसके साथ ही महाराष्ट्र के कई जिलों में बारिश हुई. इसके साथ ही उत्तर और पूर्वी भारत की तरफ बढ़ रहे मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है. इस बीच मौसम विभाग ने गुरुवार (25 जून) को देश के कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है.
मौसम विभाग के मुताबिक, कल यानी गुरुवार को देश के 17 राज्यों में झमाझम बारिश होगी. इस दौरान आंधी-तूफान आने का भी संभावना है. इससे पहले पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश के चलते कई राज्यों में तापमान में गिरावट देखने को मिली, लेकिन अब पारा फिर से चढ़ने लगा है. ऐसे में मौसम विभाग ने गुरुवार को 17 राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी कर गर्मी से राहत देने की खबर दी है. हालांकि इस दौरान कुछ स्थानों पर मौसम साफ रहेगा और लू चलने का भी अलर्ट जारी किया है.
जानें कल कहां कैसे रहेगा मौसम का मिजाज?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक कल यानी गुरुवार को उत्तर प्रदेश, बिहार समेत 17 राज्यों में भारी बारिश और आंधी का नया अलर्ट जारी किया गया है. इस दौरान 80 से 85 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी. जबकि महाराष्ट्र में फिलहाल अगले दो दिनों तक भारी बारिश और आंधी आने की चेतावनी जारी की गई है. मौसम विभाग के मुताबिक, उधर उत्तरी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे बांग्लादेश के तटीय इलाकों में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है.
इन राज्यों में भारी बारिश होने की आशंका
मौसम विभाग के मुताबिक, 25 जून को देश के 17 राज्यों भारी बारिश के साथ आंधी-तूफान आने का अनुमान है. इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, झारखंड, छत्तीसगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, सिक्किम, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल शामिल हैं. इन सभी जिलों में कल यानी गुरुवार को तेज आंधी और मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. इस दौरान कुछ राज्यों में ओलावृष्टि भी हो सकती है. ऐसे में समुद्री इलाकों में मछुआरों और किसानों को सावधान रहने की चेतावनी जारी की गई है.
कल कैसा रहेगा दिल्ली में मौसम?
अगर राजधानी दिल्ली के मौसम की बात करें तो यहां गुरुवार (25 जून) को मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. जबकि इस दौरान 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी आने आने की भी संभावना है.
'पासपोर्ट जरूरी, लेकिन यह नागरिकता का प्रमाण नहीं,' विदेश मंत्रालय ने बताया ट्रेवल दस्तावेज
भारत में आमतौर पर यह धारणा बनी हुई है कि पासपोर्ट किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का सबसे बड़ा प्रमाण होता है. हालांकि विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हालिया बयान ने इस विषय पर नई चर्चा छेड़ दी है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुविधाजनक बनाना है, न कि नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण प्रदान करना.
रिकॉर्ड स्तर पर जारी हुए पासपोर्ट
विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान देश में पासपोर्ट और उससे संबंधित सेवाओं की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई. इस अवधि में लगभग 1.5 करोड़ पासपोर्ट और संबंधित सेवाएं प्रदान की गईं, जिनमें करीब 1.39 करोड़ नए या नवीनीकृत पासपोर्ट शामिल रहे.
मंत्रालय का दावा है कि पासपोर्ट सेवाओं को पहले की तुलना में अधिक तेज और सुगम बनाया गया है. पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश मामलों में पासपोर्ट जारी करने में केवल छह कार्यदिवस लगते हैं. वहीं पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) और डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK) में आवेदन प्रक्रिया 45 मिनट से भी कम समय में पूरी हो जाती है.
देशभर में बढ़ा पासपोर्ट सेवा नेटवर्क
सरकार ने पिछले एक दशक में पासपोर्ट सेवाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया है. जहां लगभग दस वर्ष पहले देश में केवल 77 पासपोर्ट केंद्र संचालित थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 545 तक पहुंच चुकी है. यह विस्तार नागरिकों को उनके नजदीकी क्षेत्रों में बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
मंत्रालय ने यह भी बताया कि बीते वर्ष 10 नए डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले गए थे और चालू वर्ष में भी 10 नए केंद्र शुरू करने की योजना है.
भारतीय पासपोर्ट की बढ़ती वैश्विक पहुंच
भारतीय नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा भी पहले की तुलना में अधिक आसान हुई है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में 27 देश भारतीय नागरिकों को वीजा-फ्री प्रवेश की सुविधा देते हैं. वर्ष 2019 में यह संख्या केवल 16 थी.
इसके अलावा 47 देशों में भारतीयों को ‘वीजा ऑन अराइवल’ की सुविधा उपलब्ध है, जबकि 66 देश भारतीय पासपोर्ट धारकों को ई-वीजा जारी करते हैं. कई यूरोपीय देशों के साथ हुए मोबिलिटी एग्रीमेंट छात्रों, शिक्षाविदों, व्यवसायियों और पर्यटकों की आवाजाही को आसान बनाने में मदद कर रहे हैं.
नागरिकता और पासपोर्ट में क्या है अंतर?
हालांकि पासपोर्ट एक महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज है, लेकिन नागरिकता से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाएं अलग हैं. भारतीय नागरिकता अधिनियम के तहत केवल पासपोर्ट, आधार कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र होने भर से हर स्थिति में नागरिकता साबित नहीं होती.
विशेष रूप से 1 जुलाई 1987 के बाद जन्म लेने वाले व्यक्तियों के लिए नागरिकता का दावा करने हेतु यह साबित करना आवश्यक हो सकता है कि उनके माता-पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक था. इसलिए कई मामलों में माता-पिता की नागरिकता से जुड़े दस्तावेज भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
अदालतों ने भी स्पष्ट किया है कानूनी पक्ष
नागरिकता संबंधी मामलों में अदालतें भी कई बार यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि केवल दस्तावेजों के आधार पर नागरिकता का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता. वर्ष 2013 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक मामले में कहा था कि नागरिकता साबित करने के लिए कानूनी शर्तों को पूरा करना आवश्यक है. अदालत ने यह भी माना कि यदि कानून माता-पिता की नागरिकता का प्रमाण मांगता है तो उसे प्रस्तुत करना जरूरी होगा.
क्या कहता है जन्म आधारित नागरिकता का नियम?
भारतीय कानून के अनुसार 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्म लेने वाला व्यक्ति स्वतः भारतीय नागरिक माना जाता है. लेकिन 1 जुलाई 1987 के बाद जन्म लेने वालों के लिए नियम बदल गए. ऐसे मामलों में नागरिकता का दावा करने के लिए माता-पिता में से कम से कम एक का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है.
यही वजह है कि पासपोर्ट महत्वपूर्ण दस्तावेज होने के बावजूद नागरिकता का अंतिम और स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना जाता. नागरिकता का निर्धारण भारतीय कानूनों में निर्धारित शर्तों और पात्रता के आधार पर किया जाता है.
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