कम कीमत में Nothing का सिग्नेचर डिजाइन Phone 4b, ट्रांसपेरेंट डिजाइन, लॉन्च 7 जुलाई को
Nothing Phone (4b) 7 जुलाई को भारत में लॉन्च होगा. यह कंपनी की नई B Series का पहला स्मार्टफोन होगा. जानिए संभावित कीमत, डिजाइन, फीचर्स और क्या होगा इसमें खास.
उज्जैन के महाकाल मंदिर में ऐतिहासिक आय दर्ज, इस वर्ष 142 करोड़ रुपये के पार पहुंची कमाई
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ बढ़ती आय है। इस वित्तीय वर्ष में मंदिर समिति को कुल 142 करोड़ रुपये की आय हुई है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा बताया जा रहा है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा दान और लड्डू प्रसादी की बिक्री से आया है। मंदिर प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी के कारण यह आय हर साल नए स्तर पर पहुंच रही है।
वर्ष 2022 में श्री महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद से मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। जहां पहले प्रतिदिन लगभग 50 हजार श्रद्धालु पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या करीब 2 लाख तक पहुंच गई है। खास मौकों जैसे महाशिवरात्रि और शाही सवारी के दौरान यह आंकड़ा 6 से 7 लाख से भी ज्यादा हो जाता है। इसी बढ़ती भीड़ ने मंदिर की व्यवस्थाओं के साथ-साथ आर्थिक स्थिति को भी पूरी तरह बदल दिया है।
दान और प्रसादी से आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
मंदिर समिति को मिली कुल आय में 78 करोड़ रुपये सीधे दान से प्राप्त हुए हैं, जबकि 65 करोड़ रुपये लड्डू प्रसादी की बिक्री से आए हैं। दान की रकम भी कई अलग-अलग माध्यमों से आई है। दान पेटियों से करीब 62 करोड़ रुपये, नकद काउंटर से 5.5 करोड़ रुपये, ऑनलाइन माध्यम से 3.6 करोड़ रुपये, अन्न क्षेत्र से 3.38 करोड़ रुपये और गुप्त दान के रूप में 4.65 करोड़ रुपये की आय दर्ज की गई है।
इसके अलावा श्रद्धालुओं द्वारा सोना-चांदी जैसी बहुमूल्य वस्तुएं भी दान में दी गई हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि यह आय सिर्फ आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि बढ़ती आस्था और श्रद्धा का प्रतीक भी है। लड्डू प्रसादी की मांग में भी भारी बढ़ोतरी देखी गई है, क्योंकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु इसे प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं।
महाकाल मंदिर खर्च और प्रबंधन व्यवस्था
जहां एक तरफ मंदिर की आय में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ खर्च भी उसी गति से बढ़ रहा है। मंदिर परिसर में वर्तमान में करीब 306 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनके वेतन पर बड़ी राशि खर्च होती है। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, रखरखाव और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर भी लगातार खर्च किया जा रहा है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार हर महीने 5 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च चल रहा है। बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए नई व्यवस्थाएं भी लागू की जा रही हैं, ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारू बनी रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से न सिर्फ आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं, बल्कि उज्जैन शहर की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक असर पड़ा है। होटल, ट्रैवल और स्थानीय व्यापार में भी अच्छी तेजी देखी जा रही है।
महाकाल मंदिर का यह रिकॉर्ड यह दिखाता है कि धार्मिक पर्यटन किस तरह किसी शहर की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है। आने वाले समय में अगर यही रफ्तार बनी रहती है तो मंदिर की आय और श्रद्धालुओं की संख्या दोनों में और भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।




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