सिर्फ रोहित शर्मा नहीं बल्कि ये 41 क्रिकेटर्स भी पद्मश्री अवार्ड से हुए सम्मानित, क्या आपको पता हैं सभी खिलाड़ियों के नाम?
Cricketers Who Received Padma Shri Award : भारत के स्टार क्रिकेटर और पूर्व इंडियन कैप्टन रोहित शर्मा को बीते मंगलवार यानी 23 जून को पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया. शर्मा को उनके शानदार नेतृत्व और अद्भुत उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया है. उन्होंने अपनी कप्तानी में टीम इंडिया ने टी20 वर्ल्ड कप 2024 का खिताब दिलाया और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का चैंपियन भी भारत को बनाया. रोहित ने भारत को 2 ICC खिताब दिलाए. ऐसे में उन्हें पद्मश्री अवार्ड दिया गया. हिटमैन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया. इसके तस्वीरे और वीडियो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और रोहित शर्मा ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से शेयर की है.
23rd June bringing all kinds of magic ✨????????
— Rohit Sharma (@ImRo45) June 23, 2026
19 years ago, it began with an India cap.
Today, another proud chapter is added to the story. pic.twitter.com/WCiILcc7M3
आपको बता दें कि, रोहित शर्मा अकेले भारतीय क्रिकेटर नहीं है, जिन्हें पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया हो, बल्कि उनके अलावा 41 और ऐसे भारतीय क्रिकेटर्स है, जिन्हें पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया है. इस खिलाड़ियों को भी भारत के राष्ट्रपति से सम्मान मिल चुका है. तो आइए आज हम आपको इन सभी क्रिकेटर्स के बारे में बातने वाले हैं, जिन्हें पद्मश्री अवार्ड अवार्ड मिला है.
A highly prestigious honour for a great of the game ????
— BCCI (@BCCI) June 23, 2026
President of India, Smt Droupadi Murmuji @rashtrapatibhvn confers former #TeamIndia captain Rohit Sharma @ImRo45 with the Padma Shri award ????
pic.twitter.com/6EyffHr1A4
क्या है पद्मश्री अवार्ड और क्यों दिया जाता है?
पद्मश्री अवार्ड भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है. पद्मश्री अवॉर्ड भारत सरकार द्वारा भारतीय नागरिकों को दिया जाता है. ये उन भारतीय नागरिकों को मिलता है, जिन्होंने अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि, कला, शिक्षा, उद्योग, साहित्य, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन आदि में विशिष्ट योगदान दिया है. इस कड़ी में क्रिकेटर्स खेल के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देते हैं, जिसके लिए उन्हें पद्मश्री अवॉर्ड मिलता है.
किस क्रिकेटर को मिला था पहला पद्मश्री अवार्ड?
भारत में पहला पद्मश्री अवाॉर्ड क्रिकेटर विजय हजारे और जसू पटेल को मिला था. इन दोनों को 1960 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया था. उन समय इन दोनों भारतीय क्रिकेटर्स ने खेल के क्षेत्र में देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया था. उस समय इन दोनों को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा ने पद्मश्री अवॉर्ड से संयुक्त रूप से सम्मानित किया गया था.
| क्रमांक | क्रिकेटर | वर्ष |
|---|---|---|
| 1 | विजय हजारे | 1960 |
| 2 | जासू पटेल | 1960 |
| 3 | नारी ठेकेदार | 1962 |
| 4 | पॉली उमरीगर | 1962 |
| 5 | सैयद मुश्ताक अली | 1963 |
| 6 | एम. जे. गोपालन | 1964 |
| 7 | डी. बी. देवधर | 1965 |
| 8 | मंसूर अली खान पटौदी | 1967 |
| 9 | चंदू बोर्दे | 1969 |
| 10 | बिशन सिंह बेदी | 1970 |
| 11 | ई. ए. एस. प्रसन्ना | 1970 |
| 12 | गुंडप्पा विश्वनाथ | 1971 |
| 13 | बी. एस. चंद्रशेखर | 1972 |
| 14 | अजीत वाडेकर | 1972 |
| 15 | फारोख इंजीनियर | 1973 |
| 16 | पंकज रॉय | 1975 |
| 17 | सैयद किरमानी | 1982 |
| 18 | कपिल देव | 1982 |
| 19 | चुनी गोस्वामी | 1984 |
| 20 | मोहम्मद शाहिद | 1986 |
| 21 | दिलीप वेंगसरकर | 1987 |
| 22 | मोहम्मद अज़हरुद्दीन | 1988 |
| 23 | सचिन तेंदुलकर | 1999 |
| 24 | डायना एडुलजी | 2002 |
| 25 | श्रीनिवासराघवन वेंकटराघवन | 2003 |
| 26 | राहुल द्रविड़ | 2004 |
| 27 | सौरव गांगुली | 2004 |
| 28 | अनिल कुंबले | 2005 |
| 29 | एमएस धोनी | 2009 |
| 30 | हरभजन सिंह | 2009 |
| 31 | वीरेंद्र सहवाग | 2010 |
| 32 | वीवीएस लक्ष्मण | 2011 |
| 33 | झूलन गोस्वामी | 2012 |
| 34 | युवराज सिंह | 2014 |
| 35 | मिताली राज | 2015 |
| 36 | विराट कोहली | 2017 |
| 37 | गौतम गंभीर | 2019 |
| 38 | जहीर खान | 2020 |
| 39 | गुरचरण सिंह | 2023 |
| 40 | रविचंद्रन अश्विन | 2025 |
| 41 | रोहित शर्मा | 2026 |
| 42 | हरमनप्रीत कौर | 2026 |
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'ईरान घुटने टेकने को तैयार...', राष्ट्रपति ट्रंप ने किया चौंकाने वाला दावा
President Trump: अमेरिका ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर चल रही उठापटक के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप का दावा है कि ईरान हारने की कगार पर है। वह कुछ भी देने को राजी हो गया है।
अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौता को पूरा करने के लिए बातचीत का दौर चल रहा है। स्विट्जरलैंड की बातचीत के बाद ईरान की फ्रीज हुई संपति और बैन हटना शुरू हो गए हैं। हालांकि परमाणु और होर्मुज को लेकर दोनों देशों में स्पष्ट स्थिति नहीं बन पा रही है। इसकी वजह से शांति समझौते के टूटने का खतरा मंडराता रहता है। एक तरफ मामला शांति होता तो दूसरी राष्ट्रपति ट्रंप या ईरान फिर कोई विवादित बयानबाजी कर देते हैं। एक बार फिर ट्रंप ने विवादित दावा किया है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान बिल्कुल हारने की कगार पर है, घुटने टेकने को तैयार है, हमें लगभग कुछ भी देने को राजी है, और दशकों में पहली बार, अमेरिका और उसके राष्ट्रपति यानी मुझे का बहुत ज्यादा सम्मान कर रहा है।
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On Truth Social, US President Donald Trump posts, "So, I have Iran on the “ropes,” ready to go down for the fall, willing to give us practically anything, and for the first time in decades, respecting the hell out of the United States and its President, ME, and the U.S. Senate… pic.twitter.com/MXvMwhU5oQ
— ANI (@ANI) June 24, 2026
अमेरिका में पास प्रस्ताव पर भी जताई आपत्ति
और ऐसे में US सीनेट ने 'वॉर पावर्स एक्ट' पर एक ऐसे समय में बेकार वोटिंग करने का फैसला किया जिसका कोई मतलब नहीं है। इससे दुनिया में आतंकवाद को सबसे ज्यादा बढ़ावा देने वाले देश को यह संदेश गया कि अमेरिका को मेरा उनके खिलाफ किया जा रहा काम पसंद नहीं है और मुझे इसे रोकना चाहिए। ऐसा करके उन्होंने दुश्मन की मदद ही की है। चार रिपब्लिकन 'लूजर्स' (हारने वालों) ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया और ईरान ने मेरे लोगों से पूछा, "इस सबका क्या मतलब है?" इन सीनेटरों ने मेरा काम और मुश्किल कर दिया है, लेकिन मैं इसे किसी न किसी तरह पूरा करके ही रहूंगा, क्योंकि मैं हमेशा अपना काम पूरा करता हूं!
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क्यों विवादित है ट्रंप का बयान?
कई दिनों के युद्ध के बाद अमेरिका को सीधे युद्ध के बजाय वार्ता का रास्ता अपनाना पड़ा। इस्लामाबाद बैठक हो या स्विट्जरलैंड बैठक, ईरान अपनी शर्तों पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं है। ईरान की शर्तों को पूरा करते हुए अमेरिका ने पहले ईरान की संपति को फ्रीज करना शुरू कर दिया है और ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना शुरू कर दिया है। ऐसे में ट्रंप का यह बयान बचकाना और विवादित स्पष्ट होता है।
वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में उच्च-स्तरीय वार्ता चल रही है, जो अब तक सकारात्मक दिशा में बढ़ती दिख रही है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर ईरान ने अपनी ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ (जिसमें हिजबुल्लाह, हूती जैसे सहयोगी समूह शामिल हैं) के जरिए क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाया है। इस रणनीतिक स्थिति के कारण अमेरिका सीधे सैन्य टकराव से बचते हुए बातचीत और कूटनीतिक समाधान का रास्ता अपनाने पर जोर दे रहा है।
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