क्या भारतीय जॉब मार्केट का बदलेगा पूरा ढांचा, विश्व बैंक से मंजूर हुए 1.5 अरब डॉलर के कर्ज से कैसे बढ़ेगी युवाओं की ताकत?
भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू रोजगार बाजार को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने भारत सरकार की महत्वाकांक्षी सुधार नीतियों को गति देने के लिए 1.5 अरब डॉलर के भारी-भरकम वित्तीय पोषण को अपनी विधिक मंजूरी दे दी है। इस बेहद महत्वपूर्ण सहायता कार्यक्रम को आधिकारिक रूप से 'बूस्टिंग जॉब क्रिएशन इन द प्राइवेट सेक्टर डेवलपमेंट पॉलिसी फाइनेंसिंग' का नाम दिया गया है।
विश्व बैंक के इस बड़े वित्तीय कदम का मुख्य उद्देश्य भारत में बुनियादी संरचनात्मक बदलावों को मजबूती देना, प्राइवेट सेक्टर्स की हिस्सेदारी को कई गुना बढ़ाना और देश के अलग-अलग राज्यों में युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के नए विकल्प तैयार करना है।
अगले दो दशकों में कार्यबल में जुड़ेंगे 11 करोड़ युवा, श्रम बाजार में महिलाओं को मिलेगा पूरा मौका
विश्व बैंक के इस नीतिगत दस्तावेज़ में वैश्विक मंदी और अन्य चुनौतीपूर्ण अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद भारत अपनी मजबूत आंतरिक नीतियों के कारण विदेशी और संस्थागत पूंजी को लगातार आकर्षित कर रहा है। बैंक की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की जनसांख्यिकी इतनी मजबूत है कि अगले दो दशकों के भीतर देश के करीब 11 करोड़ नए और प्रतिभावान युवा मुख्य कार्यबल का हिस्सा बनने के लिए तैयार हो जाएंगे।
युवाओं की इस विशाल संख्या को ध्यान में रखते हुए इस पूरे आर्थिक पैकेज का फोकस उद्यमिता की राह में आने वाली पुरानी बाधाओं को पूरी तरह दूर करने पर रहेगा। इसके साथ ही, व्यापार और निवेश की प्रक्रियाओं को बेहद सरल बनाकर श्रम बाजार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा प्राइवेट कंपनियों के लिए आसान शर्तों पर पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
29 श्रम कानूनों को चार संहिताओं में बदलने का दिखा असर, साल 2047 के लक्ष्य को मिलेगा बड़ा सहारा
इस बड़े वित्तीय निवेश को भारत सरकार द्वारा पिछले कुछ समय में किए गए कड़े विधिक और नियामक सुधारों का सीधा परिणाम माना जा रहा है। गौरतलब है कि सरकार ने नवंबर 2025 में देश के पुराने पड़ चुके 29 जटिल श्रम कानूनों को आपस में मिलाकर चार बेहद सरल और आधुनिक 'श्रम संहिताएं' लागू की थीं।
विश्व बैंक के उपाध्यक्ष जोहान्स जट ने भारतीय आर्थिक नीति की तारीफ करते हुए स्पष्ट कहा है कि टैक्स प्रणाली के सरलीकरण, व्यापारिक एकीकरण और हालिया विनियामक बदलावों ने भारत को दुनिया में कारोबार सुगमता के मामले में बहुत आगे बढ़ा दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में नियमित वेतन पाने वाले रोजगार से जुड़े लोगों की संख्या साल 2017-18 के 45.2 करोड़ से बढ़कर साल 2023-24 में ही 60.4 करोड़ के पार पहुंच गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया सहयोग भारत सरकार के साल 2047 तक 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
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