Viral Videos: भारत-पाकिस्तान मैच के बाद दोस्ती में बढ़ी दूरी, फिर भी साथ; भारतीय और पाकिस्तानी रूममेट्स की नोंकझोंक का वीडियो वायरल
आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप.... श्रीलंका के कोलंबो में बीते रविवार यानी 15 फरवरी को भारत से मिली करारी शिकस्त के बाद पाकिस्तानी अभी तक सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। पाकिस्तानी क्रिकेट प्रेमी टीवी तोड़कर या पाक क्रिकेटरों के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। इस बीच ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय और पाकिस्तानी रूममेट्स का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह वीडियो देखकर क्रिकेट के सच्चे प्रेमी इन दोनों से सबक सीखने की बात कह रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो की शुरुआत एक किचन से होती है। यहां पाकिस्तानी ट्रेनी विमान इंजीनियर अली रजा शांति से रोटियां बनाते नजर आ रहे हैं। कुछ देर बाद भारतीय गायक यूसुफ सुलेमानी आते हैं और भारत की जीत से उत्साहित नजर आते हैं। वे पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के प्रदर्शन को लेकर अली रजा को चिढ़ाने लगते हैं। वे नाटकीय अंदाज में कहते हैं 'साहिबजादा फरहान' फिर खिलखिलाकर हंसते हैं। उनका इशारा शून्य पर आउट पाकिस्तानी बल्लेबाज की तरफ होता है।
यूसुफ सुलेमानी की इस व्यंग्यात्मक टिप्पणी पर अली रजा भी चिढ़ते नजर आते हैं, लेकिन स्पष्ट रूप से पता चलता है कि वे नाटक कर रहे थे। बनावटी झुंझलाहट दिखाकर कैमरे में देखते हुए कहते हैं, देखा आप लोगों को? पाकिस्तान के भारत से मैच हारने के बाद किसी भारतीय के साथ रहने की यही समस्या होती है।
मैच ने हमें अलग किया
अली राजा और यूसुफ ने इस वीडियो को शेयर करते हुए जो कैप्शन लिखा, वह अपने आप बड़ा संदेश देता है। लिखा कि मैच ने अलग कर दिया, लेकिन किराय ने एकजुट भी कर दिया है। इस वीडियो को सच्ची दोस्ती और सौहार्द का प्रतीक माना जा रहा है। कई दर्शकों ने भारत पाकिस्तान के हाई वोल्टेज मैच के बावजूद दोनों के बीच हल्का फुल्का सौहार्दपूर्ण हास्य बनाए रखा।
यूजर्स ने दी मिलीजुली प्रतिक्रियाएं
इस वीडियो पर इंस्टाग्राम यूजर्स की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ज्यादातर यूजर्स इस वीडियो की सराहना कर संदेश दे रहे हैं कि खेल को खेल की तरह लेना चाहिए। एक यूजर ने लिखा, अगर राजनीति और चरमपंथियों को सत्ता से बाहर कर दिया जाए तो यह वास्तव में अच्छा होगा। एक यूजर ने लिखा, उम्मीद है कि रोटियां जली नहीं होंगी। वहीं तीसरे यूजर ने लिखा, तुम्हारे पास रोटी बनाने की शानदार कला है। इसी प्रकार ऐसे ही कमेंट कर इस वीडियो की सराहना कर रहे हैं।
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सुबह उठकर स्नान के बाद भगवान को दीप जलाने से मिलते हैं ये अचूक लाभ, जानें इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
Ghar me deep jalane ka mahatva: सनातन संस्कृति में दीपक जलाने को बेहद पवित्र और शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सुबह और शाम के समय घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है। मान्यता है कि दीपक की लौ में देवी-देवता का वास होता है, जो घर में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आते हैं।
धार्मिक ग्रंथों में दीप प्रज्वलन का महत्व
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, दीपक को प्रकाश और ज्ञान का प्रतीक माना गया है। ऐसा विश्वास है कि दीप जलाने से घर का अंधकार यानी अज्ञानता दूर होती है और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। पूजा के दौरान दीप प्रज्वलित करने से देवी-लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में कभी भी अन्न-धन की कमी नहीं होती। इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि दीपक जलाने से पूजा-पाठ के दौरान होने वाली हर तरह की कमियां पूरी हो जाती हैं।
दीप जलाने का सही समय और नियम
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, सुबह स्नान करने के बाद पूजा के वक्त दीपक जलाना सबसे उत्तम माना जाता है। दीपक हमेशा भगवान की मूर्ति के ठीक सामने रखना चाहिए। यदि आप घी का दीपक जला रहे हैं, तो उसे हमेशा अपने बाएं हाथ की ओर रखना चाहिए, जबकि तेल का दीपक दाहिनी ओर रखना शुभ माना जाता है। दीपक जलाते समय साफ-सुथरे वस्त्र पहनने चाहिए और मन को शांत रखना चाहिए।
दीपक जलाने के वैज्ञानिक और मानसिक लाभ
धार्मिक महत्व के साथ-साथ सुबह दीप जलाने के कई मानसिक और व्यावहारिक लाभ भी माने जाते हैं। सुबह के शांत वातावरण में दीपक की लौ को देखने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक तनाव कम होता है। इसके अलावा, घी या कपूर के जलने से आसपास का वातावरण शुद्ध होता है और हवा में मौजूद हानिकारक सूक्ष्म जीव भी नष्ट होते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के बीच में कभी भी दीपक बुझना नहीं चाहिए, इसे अशुभ माना जाता है। इसके अलावा खंडित (टूटे हुए) दीपक का इस्तेमाल पूजा में बिल्कुल नहीं करना चाहिए। हमेशा साफ और साबुत दीये का ही चयन करें। दीपक में बत्ती की दिशा का भी ध्यान रखना चाहिए, जैसे कि भगवान की आराधना के लिए गोल बत्ती या लंबी बत्ती का नियम अपनी परंपरा के अनुसार निभाया जाता है।
आज भी घरों में जीवित है यह प्राचीन परंपरा
आधुनिकता के इस दौर में भले ही लोगों की जीवनशैली बदल गई हो, लेकिन आज भी देश के करोड़ों घरों में सुबह की शुरुआत भगवान के सामने दीप प्रज्वलित करके ही होती है। यह परंपरा न केवल हमारी आस्था को मजबूत करती है, बल्कि हमारे मन में दिव्यता और शांति का भाव भी जागृत करती है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं की जाती है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। किसी भी उपाय या धार्मिक कर्मकांड को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विद्वान या पंडित से सलाह अवश्य लें।
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