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Viral Video: भारतीय रेलवे स्टेशनों में महिला आरक्षित स्थानों पर पुरुषों का कब्जा? विदेशी पर्यटक का वीडियो वायरल

भारतीय ट्रेनों में महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराने के लिए स्पेशल लेडिस कोच लगाए जाते हैं। यही नहीं, रेलवे स्टेशनों पर भी महिलाओं के लिए वेटिंग रूम की व्यवस्था होती है। इसी कड़ी में रेलवे स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर भी महिलाओं के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था की जा रही है। लेकिन, कई लोगों की वजह से इन सुविधाओं के बावजूद महिलाओं को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई लोग लेडिस स्पेशल कोच में घुस आते हैं, वहीं लेडिस वेटिंग रूम में भी घुसने से परहेज नहीं करते। यही नहीं, परेशानी तब आती है, जब पुरुष प्लेटफॉर्म पर आरक्षित महिला स्थानों पर भी कब्जा करने से पीछे नहीं हटते। ऐसा ही एक अनुभव विदेशी महिला पर्यटक ने शेयर किया है, जो कि सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस वीडियो के वायरल होने से भारत में महिला आरक्षित स्थानों पर पुरुषों के कब्जे को लेकर देशव्यापी बहस भी शुरू हो चुकी है। 

@mary.amazonka नामक विदेशी पर्यटक एक भारतीय रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर दिखाई देती हैं। वे एक ऐसी जगह को दिखाते हैं, जो कि महिलाओं के बैठने के लिए आरक्षित किया गया है। वीडियो के माध्यम से बताया जाता है कि वहां स्पष्ट रूप से संकेत लगाए गए हैं कि यह स्थान केवल महिलाओं के लिए आरक्षित है। लेकिन एक व्यक्ति कथित तौर पर इस महिला प्रतीक्षा क्षेत्र में बैठा दिखाई देता है। खास बात है कि जब यह विदेशी पर्यटक वीडियो शूट कर रही होती है, तब शख्स उनकी तरफ देखता है, लेकिन फिर भी उस सीट से नहीं उठता है। ऐसे में ज्यादातर यूजर्स इसे लेकर नाराज हैं। कुछ यूजर्स का कहना है कि अगर रेलवे स्टेशन पर भी महिला आरक्षित स्थानों पर पुरुषों का कब्जा हो तो ट्रेनों के भीतर का आलम क्या होगा? लोग मांग कर रहे हैं कि महिला आरक्षित स्थानों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ रेलवे और आरपीएफ को सख्त से सख्त उठाने चाहिए।

रेलवे अधिकारी ने दिया ये सुझाव 

ज्यातातर यूजर्स ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं कई तंज भी कस रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि आपको भारत में ऐसी परेशानी उठानी आम बात है। दूसरे ने लिखा कि उनके भीतर महिला होगी, तभी महिला आरक्षित सीट पर बैठ गए। इस वायरल वीडियो पर एक रेलवे अधिकारी ने भी प्रतिक्रिया दी है। इस अधिकारी ने बताया कि महिलाओं के लिए आरक्षित क्षेत्रों में अनाधिकृत प्रवेश रेलवे अधिनियम का उल्लंघन है। यात्री तत्काल आरपीएफ कार्रवाई के लिए रेलमदद ऐप के माध्यम से ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट कर सकते हैं। उन्होंने लिखा कि संकेत मौजूद हैं, लेकिन शिकायत न होने के कारण ऐसे मामलों में कमी नहीं आती। अगर ऐसी नौबत आए तो शिकायत करने में देरी नहीं करनी चाहिए। 

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  Sports

David Warner के बाद Australia की सलामी जोड़ी पर संकट, Matt Renshaw लौटे और Labuschagne के लिए बढ़ी मुश्किलें

ऑस्ट्रेलिया की टीम को बांग्लादेश के खिलाफ घरेलू मैदान पर मिली शर्मनाक हार के बाद चयनकर्ताओं ने बड़ा फैसला लिया है। डार्विन में खेले गए पहले टेस्ट के बाद जैक वेदराल्ड को टीम से बाहर कर दिया गया है। अब उनकी जगह मैट रेनशॉ को अगले टेस्ट के लिए शुरुआती बल्लेबाज के तौर पर मौका मिलने की उम्मीद है।

जैक वेदराल्ड के लिए डार्विन टेस्ट की शुरुआत बेहद खराब रही थी। पहली गेंद पर उन्होंने ऑफ स्टंप से काफी बाहर जाती गेंद पर गलत शॉट खेलने की कोशिश की। इसके बाद अगली गेंद भी ज्यादा प्रभावी नहीं रही। तीसरी गेंद पर उन्होंने ऑफ स्टंप के करीब आई गेंद को काटने की कोशिश की, लेकिन गेंद बल्ले से लगकर विकेटों पर जा लगी। इस तरह छह मिनट से भी कम समय में उनकी पारी खत्म हो गई।

वेदराल्ड के लिए यह मुकाबला खास था क्योंकि डार्विन को उनकी घरेलू वापसी के लिए सही मंच माना जा रहा था। लेकिन वह मौके का फायदा नहीं उठा सके। छह टेस्ट में उनके नाम केवल एक अर्धशतक है और उनका बल्लेबाजी औसत 20.36 रहा है। ऐसे प्रदर्शन के बाद बांग्लादेश के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया की हार ने उनकी स्थिति और कमजोर कर दी।

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में अपने तेज गेंदबाजों के दम पर दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन बांग्लादेश के शीर्ष क्रम ने उन्हें काफी आसानी से खेला। इसी वजह से चयनकर्ताओं के सामने ऊपरी क्रम में बदलाव का दबाव बढ़ गया। माना जा रहा है कि अगर ऑस्ट्रेलिया डार्विन में हार से बच जाता तो वेदराल्ड को एक और मौका मिल सकता था।

अब मैट रेनशॉ के लिए वापसी का रास्ता खुल गया है। रेनशॉ ने पिछले घरेलू सत्र में क्वींसलैंड के लिए शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने शेफील्ड शील्ड में 46.09 की औसत से रन बनाए और दो शतक भी लगाए। इससे पहले वह ऑस्ट्रेलिया की एशेज टीम में वेदराल्ड से पीछे रह गए थे।

गौरतलब है कि रेनशॉ ने अब तक 14 टेस्ट खेले हैं और उनकी पिछली तीन टेस्ट पारियां मध्यक्रम में आई थीं। उनका आखिरी टेस्ट मैच 2023 की शुरुआत में दिल्ली में हुआ था। अब मैके में उन्हें फिर से पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी मिल सकती है। इससे पहले उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में भी सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभाई थी।

वॉर्नर के संन्यास के बाद से ऑस्ट्रेलिया अब तक नौ अलग-अलग सलामी बल्लेबाज आजमा चुका है। ऐसे में रेनशॉ के लिए यह मौका बेहद अहम है। उनके मार्गदर्शक उस्मान ख्वाजा भी लंबे अंतराल के बाद टेस्ट टीम में लौटकर सफल रहे थे और रेनशॉ उनसे प्रेरणा ले सकते हैं।

दूसरी ओर, मार्नस लाबुशेन पर भी दबाव बढ़ गया है। कोच और चयनकर्ता एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने उन्हें साफ संकेत दिया है कि टीम में जगह बनाए रखने के लिए उन्हें बड़ी पारियां खेलनी होंगी। डार्विन की दूसरी पारी में लाबुशेन ने 31 रन बनाए और तेज गेंदबाजों के खिलाफ उनका खेल बेहतर नजर आया, लेकिन मैकडोनाल्ड के मुताबिक यह पारी सिर्फ 31 रन तक ही सीमित रही।

लाबुशेन का टेस्ट औसत अब 44.16 तक गिर चुका है, जबकि एक समय उनका औसत 60 के आसपास था। तीन साल से टेस्ट शतक नहीं लगा पाने के कारण मैके में उनके प्रदर्शन पर खास नजर रहेगी। अगले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया का लक्ष्य श्रृंखला बराबर करना होगा, क्योंकि घरेलू मैदान पर बांग्लादेश से श्रृंखला हारना टीम के लिए एक और बड़ा झटका साबित हो सकता है।
Tue, 18 Aug 2026 22:18:05 +0530

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