Dhurandhar Viral Exam paper: आदित्य धर की ब्लॉकबस्टर फिल्म धुरंधर और धुरंधर: द रिवेंज का क्रेज फैंस के बीच सिर चढ़कर बोल रहा है। हर तरफ फिल्म का चर्चा है और अब ये केवल सिनेमाघरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि क्लासरूम तक पहुंच गई है। हाल ही में एक अकाउंट्स एग्जाम पेपर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें फिल्म के मशहूर किरदारों के नाम शामिल किए गए हैं।
एग्जाम पेपर में छाया धुरंधर का क्रेज
वायरल हो रहे इस पेपर में रणवीर सिंह के किरदार ‘हमज़ा अली माजरी’ और अक्षय खन्ना के ‘रहमान डकैत’ जैसे नामों का इस्तेमाल सवालों में किया गया है। इसके अलावा आर. माधवन के किरदार ‘अजय सान्याल’ सहित ‘जमील जमाली’, ‘एसपी चौधरी’ और ‘यालिना जमाली’ जैसे नाम भी पेपर का हिस्सा बने।
dhurandhar exam question paper
इस अनोखे एग्जाम पेपर ने छात्रों के बीच पढ़ाई को थोड़ा दिलचस्प बना दिया। आमतौर पर जहां सवालों में सामान्य नामों का इस्तेमाल होता है, वहीं फिल्मी किरदारों के जरिए सवाल तैयार करना छात्रों के लिए नया और मजेदार अनुभव साबित हुआ। यही वजह है कि यह पेपर देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गया।
सोशल मीडिया पर लोगों ने ली चुटकी
सोशल मीडिया पर यूजर्स इस क्रिएटिव आइडिया की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि इस तरह के प्रयोग पढ़ाई के माहौल को हल्का बनाते हैं और छात्रों का ध्यान बेहतर तरीके से आकर्षित करते हैं। वहीं कुछ यूजर्स ने इसे “जीनियस आइडिया” बताते हुए शिक्षा में ऐसे बदलावों की जरूरत पर जोर दिया।
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'धुरंधर 2' ने 1000 करोड़ का किया कलेक्शन
गौरतलब है कि धुरंधर के पहले पार्ट के बाद से ही इसके किरदारों की जबरदस्त लोकप्रियता बनी हुई है। 19 मार्च को इसका दूसरा पार्ट- धुरंधर: द रिवेंज रिलीज हुआ जिसने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन किया। फिल्म ने जवान, पठान, कल्कि जैसी बड़ी फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ते हुए दुनियाभर में 1000 करोड़ रुपए से अधिक का कलेक्शन किया।
तेजी से बढ़ती वैश्विक जनसंख्या, जलवायु परिवर्तन, कृषि योग्य भूमि में निरंतर कमी और स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती मांग ने मानव सभ्यता के सामने एक जटिल चुनौती खड़ी कर दी है, क्या एक ही भूमि से भोजन भी उगाया जा सकता है और ऊर्जा भी उत्पन्न की जा सकती है? लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि कृषि और सौर ऊर्जा परियोजनाएँ एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी हैं, क्योंकि दोनों के लिए भूमि की आवश्यकता होती है। किंतु विज्ञान ने इस द्वंद्व का एक अभिनव समाधान प्रस्तुत किया है, जिसे एग्रो-वोल्टिक्स या एग्री-सोलर प्रणाली कहा जाता है। यह ऐसी वैज्ञानिक अवधारणा है, जिसमें एक ही खेत पर फसल उत्पादन और सौर ऊर्जा उत्पादन दोनों साथ-साथ किए जाते हैं। परिणामस्वरूप वही भूमि एक साथ अन्न, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण, तीनों की आवश्यकताओं की पूर्ति करती है। यही कारण है कि आज एग्रो-वोल्टिक्स को भविष्य की सतत कृषि और हरित ऊर्जा का एकीकृत मॉडल माना जा रहा है।
एग्रो-वोल्टिक्स के पीछे कार्य करने वाला वैज्ञानिक दर्शन जीवविज्ञान और भौतिकी के अत्यंत सूक्ष्म एवं अंतर-संबंधी सिद्धांतों पर आधारित है। साधारणतया यह माना जाता है कि पौधों को जितनी अधिक सूर्य की रोशनी मिलेगी, वे उतनी ही तेजी से वृद्धि करेंगे, परंतु वनस्पति विज्ञान के गहरे अध्ययन इस भ्रांति का निवारण करते हैं। जब सूर्य का प्रकाश और तापमान एक निश्चित सीमा से अधिक हो जाता है, तो अधिकांश पौधों में 'फोटो-इनहिबिशन' यानी प्रकाश-संश्लेषण में बाधा की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। तीव्र ऊष्मा के कारण पौधों की पत्तियाँ अपनी रक्षा के लिए रंध्रों को बंद कर लेती हैं, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण रुक जाता है और पौधों का विकास अवरुद्ध हो जाता है। सोलर पैनलों को जब एक वैज्ञानिक कोण और पारभासी दूरी पर स्थापित किया जाता है, तो वे नीचे उगाई जाने वाली फसलों के लिए एक रक्षात्मक छत्र का कार्य करते हैं। यह आंशिक छाया पौधों को भीषण ताप-लहरों, चिलचिलाती धूप, अत्यधिक वाष्पोत्सर्जन और ओलावृष्टि जैसे मौसमी जोखिमों से बचाती है। परिणामस्वरूप, खेत के धरातल पर एक अनुकूल सूक्ष्म-जलवायु निर्मित होती है, जहाँ मिट्टी की नमी लंबे समय तक संरक्षित रहती है। वैज्ञानिक अध्ययनों से यह सिद्ध हो चुका है कि एग्रो-वोल्टिक्स प्रणालियों के अंतर्गत कृषि में सिंचाई जल की खपत में तीस से चालीस प्रतिशत तक की अभूतपूर्व कमी आती है, जो भूजल के गिरते स्तर से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए एक जीवनदायिनी क्रांति से कम नहीं है।
इस अंतर-विषयक प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसका सह-जैविक और परस्पर पूरक होना है, जहाँ कृषि और सौर पैनल एक-दूसरे की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं। जहाँ एक ओर सोलर पैनल फसलों को अत्यधिक ऊष्मा से बचाकर उनकी पैदावार और गुणवत्ता की रक्षा करते हैं, वहीं दूसरी ओर फसलों के श्वसन और मिट्टी से निकलने वाली स्वाभाविक नमी से निर्मित सूक्ष्म-वातावरण ऊपर स्थित सोलर पैनलों के तापमान को नियंत्रित रखता है। सिलिकॉन-आधारित सौर पैनलों की यह तकनीकी विडंबना है कि जैसे-जैसे उनका तापमान बढ़ता है, उनकी बिजली उत्पादन करने की दक्षता घटने लगती है। नीचे फसलों की हरियाली और वाष्पोत्सर्जन प्रक्रिया के कारण सोलर पैनलों का धरातलीय तापमान पाँच से दस डिग्री सेल्सियस तक कम बना रहता है, जिससे उनकी विद्युत उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाती है। विज्ञान और प्रकृति का यह अनूठा तालमेल न केवल ऊर्जा उत्पादन की दर को बढ़ाता है, बल्कि पैनलों की परिचालन अवधि को भी लंबा करता है।
सामाजिक और आर्थिक धरातल पर, एग्रो-वोल्टिक्स भारतीय कृषि की सबसे बड़ी कमजोरी—आय की अनिश्चितता—पर सीधा प्रहार करता है। सदियों से भारतीय किसान मानसून की अनिश्चितता, चक्रवात, सूखा और बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच अनिश्चितता का जीवन जीने को मजबूर रहा है। एग्रो-वोल्टिक्स प्रणाली किसान को केवल 'अन्नदाता' के दायरे से निकालकर एक सशक्त 'ऊर्जादाता' के रूप में स्थापित करती है। सोलर पैनलों से उत्पादित अधिशेष बिजली को राज्य के विद्युत ग्रिडों को बेचकर या नेट-मीटरिंग नीतियों के तहत जमा करके किसान एक सुनिश्चित, मासिक और वर्षभर चलने वाली वित्तीय आय प्राप्त कर सकता है। यह सुनिश्चित आय प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल बर्बाद होने की स्थिति में किसान के लिए एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच का कार्य करती है। इसके अतिरिक्त, खेत में ही उत्पादित इस हरित ऊर्जा का उपयोग सिंचाई पंपों को चलाने, सौर चालित शीतगृहों (कोल्ड स्टोरेज) के संचालन और स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग में किया जा सकता है। इससे महंगे डीजल और अनिश्चित ग्रिड बिजली पर किसान की निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो जाती है, जिससे खेती की परिचालन लागत में भारी कमी आती है और किसान का शुद्ध लाभांश कई गुना बढ़ जाता है।
एग्रो-वोल्टिक्स की सफलता का मुख्य आधार उपयुक्त फसलों का चयन और सुदृढ़ इंजीनियरिंग संरचना है। इस तकनीक के तहत सोलर पैनलों को भूमि से कम से कम आठ से दस फीट की ऊँचाई पर इस प्रकार स्थापित किया जाता है कि उनके नीचे ट्रैक्टर, कल्टीवेटर और अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों का संचालन बिना किसी बाधा के हो सके। प्रकाश-छाया के इस संयोजन में आंशिक छाया को पसंद करने वाली फसलें जैसे टमाटर, मिर्च, बैंगन, आलू, गाजर, पत्तेदार सब्जियाँ, हल्दी, अदरक, और विविध औषधीय पौधे अत्यंत उत्कृष्ट पैदावार देते हैं। शुष्क और अर्ध-शुष्क इलाकों में केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान जैसे अग्रणी संस्थानों द्वारा किए गए व्यापक अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि यह तकनीक न केवल बंजर और कम उपजाऊ भूमि को पुनः कृषि योग्य बनाने की अपार क्षमता रखती है, बल्कि मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया को रोकने और क्षरित भू-भागों के पारिस्थितिक पुनरुद्धार में भी निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
यद्यपि एग्रो-वोल्टिक्स के लाभ अपरिमित हैं, फिर भी इसके व्यापक प्रसार के मार्ग में कुछ व्यावहारिक और नीतिगत चुनौतियाँ विद्यमान हैं। इस प्रणाली को स्थापित करने के लिए आवश्यक उच्च प्रारंभिक पूंजीगत लागत, उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव और स्थानीय स्तर पर कुशल श्रम की कमी इसके तीव्र अपनाने में मुख्य बाधाएँ हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए एक बहुआयामी और दीर्घकालिक राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता है। सरकार को प्राथमिकता के आधार पर एग्रो-वोल्टिक्स के लिए विशेष सब्सिडी योजनाएँ, रियायती बैंक ऋण, और आसान वित्तीय संरचनाएँ उपलब्ध करानी चाहिए। साथ ही, कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से किसानों को क्षेत्रीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार सही फसल पैटर्न और सौर संरचना के चयन हेतु निरंतर प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
निष्कर्षतः, एग्रो-वोल्टिक्स केवल एक नवीन कृषि पद्धति या ऊर्जा उत्पादन का माध्यम भर नहीं है, बल्कि यह इक्कीसवीं सदी की एक अनिवार्य आवश्यकता और दूरदर्शी दृष्टिकोण है। यह एक साथ तीन बड़े वैश्विक संकटों यथा- खाद्य असुरक्षा, ऊर्जा की बढ़ती माँग और पर्यावरण क्षरण का अति-वैज्ञानिक और टिकाऊ समाधान प्रदान करती है। जब देश का कृषक वर्ग एक ही खेत से खाद्यान्न और स्वच्छ ऊर्जा का दोहरा उत्पादन करेगा, तब न केवल ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ मजबूत होगी, बल्कि भारत कार्बन उत्सर्जन को कम करने और हरित ऊर्जा के वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने में दुनिया का नेतृत्व करेगा। एग्रो-वोल्टिक्स का यह वैज्ञानिक मॉडल निसंदेह एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और पर्यावरण-अनुकूल भविष्य की मजबूत नीव रखने में पूरी तरह सक्षम है।
India vs Sri Lanka, Day-3: भारत और श्रीलंका के बीच गॉल टेस्ट मैच का आज तीसरा दिन है. खेल के दूसरे दिन टीम इंडिया ने 462 रन बनाने के बाद मेजबान टीम को 284 रन पर समेट दिया. इस तरह टीम इंडिया को पहली पारी में 178 रनों की बड़ी बढ़त मिली है. वहीं, तीसरे दिन के खेल में मेहमान टीम की कोशिश होगी कि वह श्रीलंका के सामने एक बड़ा टारगेट दे. Tue, 18 Aug 2026 09:39:29 +0530