Hakainde Hichilema दोबारा Zambia के राष्ट्रपति बने, 61.4 प्रतिशत वोट पाकर दर्ज की जीत
जाम्बिया के निर्वाचन आयोग ने मंगलवार सुबह घोषणा की कि राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा पांच साल के दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से निर्वाचित हुए हैं। हिचिलेमा को गत बृहस्पतिवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव का स्पष्ट विजेता घोषित किया गया। इसके लिए किसी ‘रन-ऑफ’ (दोबारा मतदान) की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि मतदान के दौरान डाले गए 50 लाख वोट में से 61.4 प्रतिशत वोट हिचिलेमा के पक्ष में पड़े।
इस चुनाव पर सबकी नजरें टिकी थीं। चुनाव में पिछले शुक्रवार को मतों की गिनती रोक दी गई थी और कुछ घंटों बाद कड़ी सुरक्षा के बीच इसे फिर से शुरू किया गया क्योंकि निर्वाचन आयोग ने बताया था कि कुछ मतदान केंद्र के अधिकारियों पर हमले हुए थे और मत पत्र चोरी हो गए थे। सरकार ने यह भी पुष्टि की कि चुनाव की रात विपक्ष के कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार किया गया था; पुलिस ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने का आरोप लगाया था।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, हिचिलेमा ने 29,65,326 वोट हासिल किए और उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी विपक्षी नेता ब्रायन मुंडुबिले को 18,56,217 वोट मिले जो कुल मतों का लगभग 38 प्रतिशत था। आयोग की अध्यक्ष म्वांगला जालौमिस ने कहा, ‘‘मैं 18 अगस्त, 2026 को हिचिलेमा हाकाइंडे एस को जाम्बिया गणराज्य का नवनिर्वाचित राष्ट्रपति घोषित करती हूं।’’ हिचिलेमा ने मंगलवार को जारी एक बयान में नतीजों का स्वागत किया और दोबारा चुने जाने के लिए जाम्बिया के लोगों का धन्यवाद किया, साथ ही उन लोगों तक भी अपनी बात पहुंचाई जिन्होंने विपक्ष को वोट दिया था। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘जिन नागरिकों ने हमारे विरोधियों के विचारों को पसंद किया, हम उनके लिए भी काम करना जारी रखेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जाम्बिया के हर नागरिक को उस विकास का लाभ मिले जो हम कर रहे हैं।’’ विपक्षी नेता मुंडुबिले की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई।
मुंडुबिले ने पहले कहा था कि पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा था। इसे उन्होंने अपने ऊपर जानलेवा हमला करार दिया था।
Donald Trump ने भारत के चुनावी मॉडल की तारीफ कर America में फोटो ID अनिवार्य करने की वकालत की
सागर कुलकर्णी वाशिंगटन, 18 अगस्त अमेरिका में कड़े चुनावी कानूनों की पैरवी करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चुनाव प्रणाली की सराहना की और कहा कि भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी चुनावों में मतदाता की पहचान की कमी को लेकर सवाल उठाया है। ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारत में हाल में हुए आम चुनावों में 64.6 करोड़ से अधिक लोगों ने मतदान किया और एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने डाक मतपत्र के जरिए मतदान किया। ट्रंप ने कहा कि भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने इस महीने की शुरुआत में उनके प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत की थी और पूछा था कि अमेरिका में वैध फोटो पहचान पत्र के बिना चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये टिप्पणियां ‘सेव अमेरिका एक्ट’ के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से कीं। इस कानून के तहत अमेरिकियों को मतदान के लिए पंजीकरण कराते समय नागरिकता का प्रमाण देना अनिवार्य होगा, पूरे देश में मतदाता पहचान पत्र की आवश्यकता लागू की जाएगी और डाक के जरिए मतदान को काफी हद तक सीमित किया जाएगा। ट्रंप ने पोस्ट किया, ‘‘इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हमारे प्रशासन से पूछा - वैध फोटो पहचान पत्र के बिना अमेरिका में चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं?’’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘भारत के पिछले चुनाव में 64.6 करोड़ मतदाता थे।
एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने डाक के जरिए मतदान किया और प्रत्येक मतदाता के पास एक वैध फोटो पहचान दस्तावेज होना जरूरी था।’’ उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘हमें अब ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पारित करने की जरूरत है।’’ ट्रंप ‘सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी’ (सेव) अमेरिका एक्ट को पारित कराने पर लगातार जोर दे रहे हैं। उनका दावा है कि यह कदम चुनावी धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में मदद करेगा। हालांकि, इस मुद्दे पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों में मतभेद हैं।
अमेरिकी सीनेट ने इस महीने की शुरुआत में पांच सप्ताह के अवकाश के लिए स्थगित होने से पहले इस कानून को पारित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ की वेबसाइट पर इस एक्ट से संबंधित एक तथ्य-पत्र में यह भी कहा गया है कि भारत और ब्राजील पहले ही मतदाता पहचान पत्रों को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ चुके हैं, जबकि अमेरिका में मतदाता स्वयं द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर अपनी पात्रता की पुष्टि करते हैं। इस विधेयक में पुरुषों को महिलाओं के खेलों में प्रतिस्पर्धा करने से स्थायी रूप से प्रतिबंधित करने और बच्चों के लिए ट्रांसजेंडर म्यूटिलेशन सर्जरी (लिंग परिवर्तन संबंधी शल्य चिकित्सा) पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है।
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