जनता दल यूनाइटेड की राष्ट्रीय परिषद की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हो गई है। इस बैठक में सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और उमेश कुशवाहा को बिहार प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी गई है। बैठक के बाद मंत्री मदन सहनी ने मीडिया को बताया कि उमेश कुशवाहा प्रदेश अध्यक्ष के पद पर काम करते रहेंगे।
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नीतीश कुमार करेंगे बिहार का दौरा
मदन सहनी ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद नीतीश कुमार जल्द ही पूरे बिहार के दौरे पर निकलेंगे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य राज्य के अलग-अलग इलाकों में जाकर सरकार और पार्टी संगठन के कामकाज की समीक्षा करना है। इसके साथ ही, वे सीधे आम जनता से बातचीत करेंगे, उनकी समस्याओं को सुनेंगे और उनके सुझाव भी लेंगे।
निशांत की सक्रियता से जेडीयू कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार का निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाना सभी कार्यकर्ताओं के लिए बेहद खुशी की बात है। इस बैठक में नीतीश कुमार के बेटे और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे कार्यकर्ताओं का जोश दोगुना हो गया है।
पिताजी के 20 सालों के कामों को जनता तक पहुंचाना है
बैठक में शामिल हुए स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा, "हमने प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उमेश कुशवाहा के नाम का समर्थन किया है। जेडीयू एक समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष पार्टी है, जो कार्यकर्ताओं के दम पर चलती है। हमारा लक्ष्य पार्टी को और मजबूत करना है और पिछले 20 सालों में पिताजी द्वारा किए गए विकास कार्यों को राज्य के कोने-कोने तक पहुंचाना है।"
निशांत कुमार जेडीयू के भविष्य हैं
निशांत कुमार की राजनीति में इस सक्रियता का पार्टी नेताओं ने खुलकर स्वागत किया है। राज्य सरकार में मंत्री लेशी सिंह ने बताया कि बैठक के पहले सत्र में राज्य परिषद और दूसरे सत्र में राष्ट्रीय परिषद ने नीतीश कुमार के नाम को मंजूरी दी। उन्होंने निशांत कुमार की तारीफ करते हुए कहा, "नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करना हमारे लिए गर्व की बात है। निशांत कुमार हमारी पार्टी के भविष्य हैं और उनके सक्रिय होने से जेडीयू आगे चलकर और ज्यादा मजबूत होगी।"
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उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने तीखा तंज कसा है। उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर दान घोटाले की जांच कर रही एसआईटी को सचेत करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "एसआईटी सावधान रहे... कहीं जांच रिपोर्ट ही चोरी न हो जाए। फिर वे कहेंगे, 15 दिन और इंतजार कीजिए।" सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सरकार असल में सबूतों को छिपाने के लिए जांच का समय आगे बढ़ा रही है।
राम मंदिर घोटाले की जांच के लिए 3 सदस्यीय एसआईटी गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान निधि के दुरुपयोग और गड़बड़ियों की जांच के लिए तीन सदस्यीय हाई-लेवल एसआईटी का गठन किया है। इस जांच टीम की अगुवाई लखनऊ के संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं, जबकि आईजीपी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को इसका सदस्य बनाया गया है। टीम को 7 दिन के भीतर शुरुआती और 15 दिनों में फाइनल रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है।
आरोपी कर्मचारी के घर छापा, गोबर के ढेर में छिपाई नकदी बरामद
इस मामले में शनिवार को एसआईटी ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मंदिर में चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारी लव कुश मिश्रा को हिरासत में ले लिया है। जांच के दौरान जब रुदौली के मीनापुर फगौली गांव में स्थित उसके घर पर छापेमारी की गई, तो वहां से करीब 10 लाख रुपये कैश बरामद हुए। हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी ने कुछ रकम अलमारी में रखी थी, तो कुछ नकदी को घर के बाहर गोबर के ढेर में दबाकर छिपाया हुआ था। फिलहाल पैसों के सोर्स को लेकर पूछताछ जारी है।
सीएम योगी ने क्या कहा था?
इस पूरे विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरोसा दिलाया था कि एसआईटी जांच में सब कुछ साफ हो जाएगा। सीएम योगी ने कहा, "राम मंदिर के लिए देश ने 500 सालों का लंबा इंतजार किया है, तो इस जांच के लिए लोग 15 दिन और इंतजार कर लें।" इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग कभी राम भक्तों पर गोलियां चलवाते थे और 'जय श्री राम' बोलने पर लाठियां भांजते थे, वे आज हमें उपदेश दे रहे हैं। सीएम ने जनता से अपील की है कि अगर किसी के पास इस मामले से जुड़ा कोई भी सबूत हो, तो वह सीधे एसआईटी को सौंप सकता है। सीएम के इसी बयान पर यादव ने तंज कसा।
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