Gold Rate Today: सोने-चांदी के भाव में तेजी, 24 कैरेट गोल्ड ₹1,52,961 पर पहुंचा; चांदी ₹1,118 हुई महंगी
Gold Rate Today, 12 August 2026: सोने और चांदी की कीमतों में आज (12 अगस्त 2026) तेजी देखने को मिली है। IBJA के मुताबिक, आज 24 कैरेट (999) सोना ₹1,52,961 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो 11 अगस्त के ₹1,52,490 के मुकाबले ₹471 महंगा है।
वहीं, बुधवार को 22 कैरेट (916) सोने का भाव ₹1,40,112 प्रति 10 ग्राम के लेवल पर कारोबार कर रहा है है, जो एक दिन पहले ₹1,39,681 पर था। यानी 22 कैरेट गोल्ड आज ₹431 महंगा हुआ है। इसी तरह चांदी के भाव में भी तेजी देखने को मिली है। 999 शुद्धता वाली चांदी आज ₹2,35,398 प्रति किलोग्राम पर बिक रही है, जो कल के ₹2,34,280 प्रति किलोग्राम के मुकाबले ₹1,118 ज्यादा है। आइए अब देश के प्रमुख शहरों में 22 कैरेट गोल्ड के ताजा भाव जानते हैं।
प्रमुख शहरों में प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत (सोर्स- Goodreturns)
| शहर | 12 अगस्त के रेट | 11 अगस्त के रेट |
| दिल्ली | 1,42,100 | 1,42,350 |
| मुंबई | 1,41,950 | 1,42,200 |
| कोलकाता | 1,41,950 | 1,42,200 |
| चेन्नई | 1,42,000 | 1,42,500 |
| लखनऊ | 1,42,100 | 1,42,350 |
| भोपाल | 1,42,000 | 1,42,250 |
| रायपुर | 1,41,950 | 1,42,200 |
| अहमदाबाद | 1,42,000 | 1,42,250 |
| जयपुर | 1,42,100 | 1,42,350 |
ध्यान दें: IBJA के रेट 24K शुद्ध सोने (बुलियन) के मानक भाव होते हैं, जबकि शहरवार 22 कैरेट ज्वेलरी रेट स्थानीय टैक्स, मेकिंग चार्ज और बाजार की स्थिति के अनुसार अलग हो सकते हैं।
अलग-अलग शहरों में सोने के दाम क्यों होते हैं अलग? जानें 4 प्रमुख वजहें
सोने की कीमतें पूरे देश में एक जैसी नहीं होतीं। अलग-अलग शहरों में सोने के रेट में फर्क देखने को मिलता है। इसके पीछे कई व्यावहारिक और आर्थिक कारण जिम्मेदार होते हैं।
1. ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी खर्च
सोने को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाने में ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा पर खर्च आता है। जैसे-जैसे दूरी बढ़ती है, यह लागत भी बढ़ती जाती है, जिसका असर अंतिम कीमत पर पड़ता है।
2. खरीदारी की मात्रा (डिमांड फैक्टर)
दक्षिण भारत में सोने की खपत देश में सबसे ज्यादा होती है। यहां कुल मांग का लगभग 40% हिस्सा है। बड़ी खरीदारी के बावजूद स्थानीय बाजार में छूट सीमित रहती है, जिससे कीमतों में फर्क आता है।
3. ज्वेलरी एसोसिएशन की भूमिका
हर राज्य और शहर में ज्वेलरी एसोसिएशन स्थानीय मांग और आपूर्ति के आधार पर रेट तय करते हैं। इसी वजह से अलग-अलग शहरों में सोने के भाव अलग हो जाते हैं।
4. पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य
ज्वेलर्स ने सोना किस कीमत पर खरीदा है, यह भी बिक्री मूल्य तय करने में अहम भूमिका निभाता है। पुराना स्टॉक महंगा या सस्ता खरीदा गया हो तो उसका असर ग्राहकों को मिलने वाले रेट पर पड़ता है।
सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें खास ध्यान
1. सिर्फ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें
हमेशा BIS (Bureau of Indian Standards) हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है, जैसे अल्फान्यूमेरिक कोड (AZ4524)।
2. कीमत जरूर क्रॉस चेक करें
खरीदने से पहले सोने का भाव अलग-अलग स्रोतों जैसे IBJA (India Bullion and Jewellers Association) से जरूर जांचें। सोने की कीमत 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होती है।
100% Tariff on India: भारत समेत 5 देशों पर 100% टैरिफ लगाएगी अमेरिका, सीनेट में भी रूस प्रतिबंधक बिल पास
रूस से तेल और गैस का आयात करने वाले देशों पर शिकंजा कसने के लिए अमेरिकी संसद ने एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के प्रमुख खरीदार देशों पर कार्रवाई करने वाले एक सख्त बिल को 86-11 वोटों के भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। यूक्रेन युद्ध को परोक्ष रूप से बढ़ावा देने वाले व्यापारिक रिश्तों पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक का नाम बदलकर अब 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' कर दिया गया है।
100% तक टैरिफ का प्रावधान और शीर्ष 5 खरीदार देश
इस नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह विशेष अधिकार मिल जाएगा कि वे उन देशों के आयातों पर 100 प्रतिशत तक भारी टैरिफ लगा सकें, जो रूस से सबसे ज्यादा तेल और गैस खरीद रहे हैं। वर्तमान आंकड़ों के मुताबिक, चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया वर्तमान में रूस से ऊर्जा उत्पादों के शीर्ष पांच खरीदार हैं। यदि यह कानून पूरी तरह लागू होता है, तो इन देशों के साथ होने वाले व्यापारिक समीकरणों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
रूसी नेतृत्व और अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने की रणनीति
इस महत्वपूर्ण विधेयक को आगे बढ़ाने में दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल की मुख्य भूमिका रही है। कीव की यात्रा के बाद और ग्राहम के निधन के पश्चात दोनों पार्टियों के नेताओं ने उनकी विरासत का सम्मान करते हुए इस बिल को तेजी से आगे बढ़ाया।
इसका मुख्य उद्देश्य रूसी अर्थव्यवस्था को समर्थन दे रहे देशों को यह समझाना है कि वे या तो अमेरिका के साथ सामान्य व्यापार रखें या रूस से सस्ती ऊर्जा खरीदना जारी रखें। इसके साथ ही इसका लक्ष्य रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, बड़े उद्योगपतियों और प्रमुख वित्तीय संस्थानों को सीधे तौर पर प्रतिबंधित करना है।
ईरान से जुड़े प्रतिबंधों का विस्तार और समय-सीमा में वृद्धि
रूस के खिलाफ कड़े प्रावधानों के अलावा, इस व्यापक बिल में मध्य पूर्व से जुड़े प्रतिबंधों को भी शामिल किया गया है. इसके तहत 'ईरान सैंक्शन एक्ट ऑफ 1996' की समय सीमा को बढ़ाकर अब 2031 तक कर दिया गया है। इस विस्तार का मतलब है कि ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने या व्यापारिक संबंध रखने वाली विदेशी कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने के नियमों को और अधिक कड़ाई से लागू किया जाएगा।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अगली प्रक्रिया और राजनीतिक प्रतिक्रिया
सीनेट में 86 के मुकाबले 11 मतों से भारी समर्थन मिलने के बाद, अब यह बिल मंजूरी के लिए अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा। प्रतिनिधि सभा आगामी 31 अगस्त को अपनी अगली बैठक में इस पर विचार करेगी। वहां से पारित होने के बाद इसे अंतिम मुहर के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा जाएगा। हालांकि, कुछ डेमोक्रेट नेताओं ने चेतावनी दी है कि इस बिल से राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ से जुड़े अत्यधिक नए अधिकार मिल जाएंगे, जबकि व्हाइट हाउस पहले से ही अपनी व्यापार नीतियों में कड़े शुल्कों को प्राथमिकता दे रहा है।
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