भारत में 2.5 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप्स, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण 7 गुना और मोबाइल निर्माण 35 गुना बढ़ा: PM मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए भारत के भविष्य के विकास का एक व्यापक रोडमैप सामने रखा. उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री संसाधनों की खोज, स्टार्टअप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजिटल तकनीक आने वाले सालों में भारत की आर्थिक प्रगति के प्रमुख केंद्र होंगे. पीएम ने जोर देकर कहा कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने को लेकर देश को नई तकनीकों और आत्मनिर्भर संसाधनों पर तेजी से आगे बढ़ना होगा.
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने देश के तेजी से विकसित हो रहे नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि आज भारत में 2.5 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हैं, जो न केवल नए व्यवसाय खड़े कर रहे हैं बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने में लगे हैं.
तकनीकी विकास को समर्थन दिया
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप इंडिया पहल ने युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया है. नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपए के इनोवेशन फंड की भी घोषणा की है, जिसके माध्यम से नए विचारों, अनुसंधान और तकनीकी विकास को समर्थन दिया जाएगा.
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को केवल दुनिया का बाजार नहीं बनना है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नवाचार केंद्र बनना है. उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक तकनीकों को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाना चाहिए और देश को अगली पीढ़ी की संचार तकनीकों, विशेष रूप से 6जी, में नेतृत्व करना चाहिए.
एआई ने अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाई
उन्होंने घोषणा की कि सरकार अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी स्किल्स का प्रशिक्षण देगी, ताकि भारतीय युवा वैश्विक एआई अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें. प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया में क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर चर्चा हो रही है क्योंकि आधुनिक तकनीक का बड़ा हिस्सा इन खनिजों पर निर्भर करता है. उन्होंने बताया कि भारत ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन शुरू किया है और केंद्रीय बजट में क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर की भी घोषणा की गई है. इसके तहत भारत विभिन्न देशों के साथ समझौते कर रहा है और वैश्विक स्तर पर इस क्षेत्र में भारत पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है.
बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन बढ़ा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर निर्माण और डेटा सेंटर जैसी उभरती तकनीकों के कारण आने वाले समय में ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ने वाली है. उन्होंने कहा कि नई दुनिया को ऊर्जा के बिना चलाना संभव नहीं है और भारत को भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन बढ़ाना होगा.
ऊर्जा सुरक्षा को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में परमाणु ऊर्जा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी. उन्होंने बताया कि संसद द्वारा शांति अधिनियम पारित किए जाने के बाद इस क्षेत्र के लिए नए अवसर खुले हैं और भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
85,000 करोड़ रुपए आवंटित
प्रधानमंत्री ने समुद्री संसाधनों की खोज को लेकर भी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि सरकार समुद्र के भीतर मौजूद खनिज और ऊर्जा संसाधनों की खोज के लिए तेजी से काम कर रही है. पिछले वर्ष घोषित 'समुद्र मंथन' पहल को गति देने के लिए हाल ही में 85,000 करोड़ रुपए आवंटित करने का निर्णय लिया गया है.
उन्होंने कहा कि पहले देश के लगभग 99 प्रतिशत तटीय क्षेत्रों को संसाधन खोज के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र मान लिया गया था, लेकिन अब सरकार इस सोच को बदलते हुए समुद्री क्षेत्रों की विशाल संभावनाओं का उपयोग करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
1.75 करोड़ घरों तक सुविधा पहुंचाने का काम
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश में पाइप्ड नेचुरल गैस की सुविधा केवल 70 शहरों तक सीमित थी, जबकि आज यह बढ़कर 700 शहरों तक पहुंच चुकी है. पहले जहां केवल 20 से 22 लाख परिवारों तक पाइप्ड गैस पहुंची थी, वहीं अब लगभग 1.75 करोड़ घरों तक यह सुविधा पहुंचाने का काम चल रहा है.
उन्होंने बताया कि करीब 12 वर्ष पहले भारत की सौर ऊर्जा क्षमता केवल 2 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर 160 गीगावाट तक पहुंच चुकी है. उनके अनुसार, यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है.
मोबाइल फोन निर्माण 35 गुना बढ़ा
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में भारत के विनिर्माण और डिजिटल क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है. उनके अनुसार, देश में मोबाइल फोन निर्माण 35 गुना बढ़ा है, जबकि आधुनिक रेलवे कोचों का उत्पादन 21 गुना बढ़ चुका है. इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भी सात गुना विस्तार दर्ज किया गया है, जिससे भारत की घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत हुई है.
डिजिटल लेनदेन 100 गुना बढ़ चुके हैं
उन्होंने बताया कि देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं और उपभोक्ताओं की संख्या लगभग चार गुना बढ़ी है. इसी अवधि में पेटेंट की संख्या चार गुना हुई है, जबकि डिजिटल लेनदेन 100 गुना बढ़ चुके हैं, जो भारत के तेजी से डिजिटलीकरण को दर्शाता है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्किल इंडिया मिशन, राष्ट्रीय ड्रोन नीति, अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलना और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसी पहलों ने देश के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि नवाचार, तकनीक और आत्मनिर्भरता के सहारे भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा.
स्रोत-आईएएनएस
8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन में होगी बंपर बढ़ोतरी? ये हैं 5 ताजा अपडेट
8th Pay Commission: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवां वेतन आयोग सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है. हर दस साल में केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन की समीक्षा के लिए नया वेतन आयोग बनाती है. इस बार भी कर्मचारी और पेंशनर्स यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं कि उनकी सैलरी और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी. आयोग का गठन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में तीन नवंबर 2025 को किया गया था. आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए अठारह महीने का समय दिया गया है. इस समय सीमा के भीतर आयोग को सभी पहलुओं का अध्ययन करके सरकार को एक व्यापक रिपोर्ट सौंपनी होगी.
राज्यों में कर्मचारी यूनियनों के साथ चल रहा है संवाद
वर्तमान में आठवां वेतन आयोग अपने विचार विमर्श और परामर्श के दौर से गुजर रहा है. आयोग की टीम देश के अलग अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर रही है. इस दौरान कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जा रही हैं. आयोग का उद्देश्य सभी पक्षों की मांगों, समस्याओं और जमीनी हकीकत को गहराई से समझना है. आने वाले दिनों में चंडीगढ़, चेन्नई, पुडुचेरी और राजस्थान जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर ऐसी कई बैठकें तय की गई हैं. इन बैठकों में कर्मचारी नेता अपने सुझाव और मांग पत्र आयोग के सामने रख रहे हैं.
लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए मांगों का आकलन
वेतन आयोग इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और लोकतांत्रिक बनाने में जुटा है. आयोग चाहता है कि हर वर्ग के कर्मचारी और पेंशनभोगी को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिले. इसके तहत कर्मचारियों की सेवा शर्तों, महंगाई के असर, रहने के खर्च और मौजूदा वेतन विसंगतियों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है. यह परामर्श प्रक्रिया आने वाले कुछ महीनों तक लगातार चलेगी. सभी पक्षों से मिले सुझावों और आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करने के बाद ही आयोग अपनी अंतिम सिफारिशों का मसौदा तैयार करने का काम शुरू करेगा. इसके बाद यह विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी.
फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम वेतन पर क्या है स्थिति
केंद्रीय कर्मचारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है. सोशल मीडिया और विभिन्न चर्चाओं में तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि आयोग ने अभी तक किसी भी फिटमेंट फैक्टर या न्यूनतम वेतन पर अंतिम फैसला नहीं लिया है. न तो संशोधित पे मैट्रिक्स जारी हुआ है और न ही पेंशन संशोधन का कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने आया है. ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो हर वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर बढ़ता रहा है. छठे वेतन आयोग में यह एक दशमलव आठ छह था, जबकि सातवें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर दो दशमलव पांच सात किया गया था.
सरकार के फैसले और आगामी समय का इंतजार
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आठवें वेतन आयोग में सरकार किस फॉर्मूले और आर्थिक पैमाने को अपनाती है. आर्थिक स्थिति, राजकोषीय संतुलन और कर्मचारियों की जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए ही नया वेतन ढांचा तैयार किया जाएगा. आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार इस पर विचार करेगी और कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे लागू करने की तारीख तय होगी. तब तक कर्मचारियों और पेंशनर्स को किसी भी अफवाह पर ध्यान देने के बजाय आयोग और सरकार की आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करना चाहिए. यह बदलाव आने वाले वर्षों में सरकारी कर्मियों के जीवन स्तर को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा.
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