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सिंदूर लगाते समय गलत उंगलियों का प्रयोग पड़ सकता है भारी! जानें सही नियम

Hindu Marriage Beliefs: भारतीय परंपराओं में सिंदूर का महत्व बहुत खास माना जाता है. यह सिर्फ एक श्रृंगार का सामान नहीं है. इसे विवाहित स्त्रियों की पहचान का प्रतीक भी कहते हैं. महिलाओं के लिए यह सुहाग, प्रेम और वैवाहिक जीवन का प्रतीक कहलाता है. मंदिरों में देवी-देवताओं से लेकर घर में भी सिंदूर का प्रयोग होता है. यह कोई नया ट्रेंड नहीं है बल्कि सदियों से चली आ रही एक रीत है. ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि हमें सिंदूर को हमेशा सही उंगली से ही लगाना चाहिए. 

सिंदूर का धार्मिक महत्व क्या है?

सिंदूर को हिंदू धर्म में सौभाग्य, अखंड सुहाग और ऊर्जा का प्रतीक कहते हैं. माता लक्ष्मी और पार्वती से सिंदूर का गहरा संबंध माना जाता है. विवाहित स्त्री की मांग में सिंदूर भरने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है. यह पति की लंबी आयु का आशीर्वाद भी देती है. 

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने शिव जी के लिए और माता लक्ष्मी ने सीता स्वरूप में प्रभु श्रीराम के नाम का सिंदूर मांग में भरा था. इसे गृहलक्ष्मी से जोड़कर भी देखा जाता है. सिंदूर का रंग लाल होता है. इसलिए, यह ऊर्जा और शक्ति का भी प्रतिनिधि माना जाता है. ज्योतिषीय दृष्टिकोण में मांग के सिंदूर का मानसिक शांति और बीपी से जोड़कर भी देखा जाता है. कहते हैं कि इससे तनाव कम होता है और बीपी नियंत्रित रहता है.

किस उंगली से सिंदूर लगाना चाहिए?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्योतिष में बताया गया है कि मांग में सिंदूर भरने के लिए सबसे शुभ अनामिका उंगली होती है. इसे रिंग फिंगर भी कहते हैं. इस उंगली का संबंध सूर्य ग्रह और शुक्र ग्रह से होता है. सूर्य, जो आत्मविश्वास, सम्मान, ऊर्जा और सकारात्मकता का कारक होता है. वहीं, शुक्र ग्रह को प्रेम और रोमांस के साथ-साथ लग्जरी का प्रतीक माना जाता है. इस उंगली से सिंदूर लगाने से जीवन में संतुलन और सम्मान होता है. धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा करने में भी इसी उंगली का प्रयोग होता है.

कौन-कौन सी उंगलियों से सिंदूर नहीं लगाते?

1.तर्जनी उंगली- इस उंगली को इंडेक्स फिंगर भी कहते हैं. इस उंगली का संबंध गुरु ग्रह से होता है. गुरु को ज्ञान, आध्यात्म और विवेक का प्रतीक कहते हैं. ज्योतिष शास्त्र में इस उंगली को आदेश और क्रोध का प्रतीक माना जाता है. इसलिए, तर्जनी उंगला का इस्तेमाल सिंदूर लगाने के लिए नहीं किया जाता है. इस उंगली से सिंदूर लगाते हैं तो आज ही रोक दे यह काम.

2.मध्यमा उंगली- हाथ की मध्यमा उंगली का संबंध न्यायप्रिय राशि शनि ग्रह का होता है. यह उंगली शनिदेव का प्रतिनिधित्व करती है. इस ग्रह का संबंध कर्म, अनुशासन, जिम्मेदारियों और सत्य से होता है. इसे ऊर्जा का गंभीर प्रतीक माना जाता है. यही कारण है कि मांगलिक और शुभ कार्यों में सिंदूर लगाने के लिए इस उंगली का आमतौर पर प्रयोग नहीं किया जाता है.

3.कनिष्ठा उंगली- हाथ की सबसे छोटी उंगली यानी कनिष्ठा उंगली का संबंध बुध ग्रह से होता है. बुध को बुद्धि, संवाद और समझदारी से संबंधित माना जाता है. आध्यात्मिक मान्यताओं में इसे भावना और संतुलन की क्षमता से जोड़ा जाता है. मगर पारंपरिक सिंदूर लगाने के नियमों में इस उंगली का इस्तेमाल कम ही देखा जाता है.

4.अंगूठा- हाथ के अंगूठे का संबंध शुक्र ग्रह से होता है. शुक्र ग्रह इच्छाशक्ति के प्रतीक होते हैं. हालांकि, इस उंगली से सिंदूर नहीं लगाया जाता है लेकिन विशेष प्रकार की साधनाओं में अंगूठे से ही सिंदूर लगाते हैं. खासतौर पर तंत्र साधना में. पुरुषों के माथे पर सिंदूर लगाने के लिए भी अंगूठे का प्रयोग होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस उंगली को विजय का प्रतीक भी कहते हैं. 

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होर्मुज पार करके भारत पहुंचा 'दिशा' जहाज, देश को मिलेगी 62370 मीट्रिक टन LNG

LNG Vessel Disha: ईरान-अमेरिका शांति समझौते के बाद भारत के लिए पहली खुशखबरी है। LNGC दिशा जहाज आज सुबह गुजरात के दहेज पोर्ट पहुंचा। जहाज में 62370 मीट्रिक टन एलएनजी लदी है। भरूच पोर्ट अथॉरिटी ने बताया कि जहाज को पेट्रोनेट LNG जेटी पर लंगर डाला गया है। 

दरअसल, अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद पहला टैंकर भारत पहुंच चुका है। शुक्रवार सुबह एलएनजी टैंकर दिशा गुजरात के पोर्ट पहुंचा। भरुच पोर्ट के दहेज एलएनजी टर्मिनल पर जहाज को लगाया गया। 'दिशा' 15 जून को होर्मुज जलडमरूमध्य से निकला था। अब गुजरात के दहेज बंदरगाह पहुंच गया है।

मार्च में कतर से चला था दिशा

भारत का एलएनजी (LNG) वाहक जहाज 'दिशा' अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में बनी अस्थिर स्थिति के कारण फंस गया था। कतर से 62,370 टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लेकर मार्च की शुरुआत में रवाना हुआ यह जहाज करीब तीन महीने तक आगे नहीं बढ़ सका। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होने के बाद हालात सामान्य हुए और जहाज को सुरक्षित रास्ता मिल गया।  

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52 की उम्र में दुनिया को चौंकाया, 78 देशों को दी टक्कर, अलवर की सुमन ने वर्ल्ड योगासन में जीता सिल्वर

Suman Yadav Success Story: अलवर की 52 वर्षीय सुमन यादव ने पहली बार आयोजित वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है. उन्होंने 45 से 55 वर्ष आयु वर्ग में 20 देशों के खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन किया. सुमन एक सरकारी स्कूल में पीटीआई शिक्षिका हैं और उन्होंने 2015 में योग की शुरुआत की थी. समय के साथ उनकी रुचि बढ़ी और उन्होंने लगातार राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की. उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित किया है कि उम्र कभी भी सपनों की राह में बाधा नहीं बनती. Fri, 19 Jun 2026 12:29:00 +0530

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