Indore News : को-ऑपरेटिव बैंक में लाखों रुपये की धोखाधड़ी, दो कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
इंदौर के भंवरकुआं थाना क्षेत्र स्थित एक को-ऑपरेटिव बैंक में लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। फरियादी का आरोप है कि जालसाजों ने 22 लाख रुपये का ओडी लोन स्वीकृत कराया और रुपये निकालकर हड़प लिए। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर दो आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है
मामले की जानकारी देते हुए एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह ने बताया कि फरियादी नवीन सोनी का ट्रांसपोर्ट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की ट्रांसपोर्ट नगर शाखा में खाता है जब उन्होंने अपने ओडी लोन खाते का स्टेटमेंट निकलवाया तो पता चला कि 21 अप्रैल को उनके नाम पर 22 लाख रुपये का ओडी लोन स्वीकृत किया गया है।
खाताधारक के साथ 22 लाख की धोखाधड़ी
नवीन ने कहा कि उन्होंने न तो इस लोन के लिए आवेदन किया, न कोई चेक जारी किया और न ही उन्हें इस राशि की जानकारी थी। शिकायत में कहा गया कि ये किसी का षड्यंत्र है और इसमें बैंक स्टाफ की मिलीभगत हो सकती है, नवीन ने आरोप लगाया कि बैंक कर्मचारी संतोष श्रीवास्तव और आशीष अग्रवाल पर मिलीभगत कर फर्जी तरीके से लोन स्वीकृत कराया और राशि का गबन कर लिया।
दो आरोपियों पर पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है, पुलिस का कहना है कि नवीन सोनी के बैंक स्टेटमेंट के आधार पर जाँच की जाएगी और मालूम किया जायेगा कि आरोपियों ने धोखाधड़ी केवल नवीन सोनी के साथ ही की है या किसी अन्य खाताधारक को भी निशाना बनाया है।
कर्नाटक MLC चुनाव: भाजपा को बड़ा झटका, निष्कासित विधायकों ने कांग्रेस को दिया वोट, हो गया खेला
कर्नाटक में विधान परिषद की सात सीटों पर चुनाव हो रहा है। इस प्रक्रिया के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी के दो निष्कासित विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
भाजपा से निष्कासित विधायक एसटी सोमशेखर और शिवराम हेब्बार ने खुले तौर पर कांग्रेस प्रत्याशी को अपना वोट दिया। मतदान के दौरान ये दोनों विधायक मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ एक तस्वीर में भी नजर आए हैं, जो इस घटनाक्रम को और भी महत्वपूर्ण बना देता है। माना जा रहा है कि इन भाजपा विधायकों की क्रॉस-वोटिंग कांग्रेस को विधान परिषद में पांचवीं सीट हासिल करने के लिए जरूरी संख्या जुटाने में निर्णायक मदद करेगी।
मुख्यमंत्री बनने के बाद डीके शिवकुमार के लिए पहली बड़ी चुनावी परीक्षा
यह चुनावी लड़ाई सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए पहली बड़ी चुनौती है, खासकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के पदभार संभालने के बाद। कर्नाटक में कुछ दिनों पहले ही सत्ता परिवर्तन हुआ है और डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला है। सीएम पद संभालने के बाद सत्ताधारी कांग्रेस के लिए यह पहला चुनावी मुकाबला है, जहां उसे अपनी ताकत साबित करनी है। विधान सौध में सुबह नौ बजे शुरू हुआ मतदान आज शाम चार बजे तक चलेगा। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, मतगणना आज शाम पांच बजे से शुरू होगी और देर शाम तक परिणाम भी जारी कर दिए जाएंगे, जिससे तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।
विधान परिषद की एक सीट जीतने के लिए 28 वोट जरूरी
जीत के आंकड़ों की बात करें तो, प्रत्येक उम्मीदवार को विधान परिषद में सीट जीतने के लिए कम से कम 28 वोटों की आवश्यकता है। विधानसभा में अपने संख्या बल के आधार पर कांग्रेस आसानी से छह में से चार सीटें जीत सकती है, जबकि मुख्य विपक्षी दल भाजपा दो सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है। हालांकि, सातवीं सीट के लिए मुकाबला बेहद कड़ा है। इस सीट पर कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं, लेकिन दोनों में से किसी भी पार्टी के पास अकेले दम पर यह सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है। ऐसे में, सत्तारूढ़ कांग्रेस निर्दलीय विधायकों और भाजपा से निष्कासित इन विधायकों की मदद से कुल सात में से पांच सीटें जीतने की जुगत में है, जो उसके लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
चुनावी मैदान में कांग्रेस की ओर से टी. कामकनूर, पी वी मोहन, बी.के. हरिप्रसाद (जो प्रदेश अध्यक्ष भी हैं), शिवन्ना बी.एस. और विनय कार्तिक प्रकाश जैसे पांच प्रत्याशी शामिल हैं। वहीं, भाजपा ने लिंगराज पाटिल और रघु आर को मैदान में उतारा है, जबकि जद(एस) से गोविंदराजू किस्मत आजमा रहे हैं।
MLC चुनाव के लिए कर्नाटक विधानसभा के समीकरण
कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा में मौजूदा स्थिति देखें तो सत्तारूढ़ कांग्रेस के पास 134 विधायक हैं। भाजपा के 62 और जद(एस) के 18 विधायक हैं। इनके अलावा, कल्याण राज्य प्रगति पक्ष और सर्वोदय कर्नाटक पक्ष का एक-एक विधायक है। दो निर्दलीय, तीन असंबद्ध सदस्य और एक अध्यक्ष भी विधानसभा का हिस्सा हैं, जबकि दो सीटें वर्तमान में खाली हैं। मतदान के बीच भाजपा के दो विधायकों का सीएम के साथ गलबहियां करना और कांग्रेस को वोट देना निश्चित तौर पर भाजपा के लिए चिंता का सबब है और यह राज्य की राजनीतिक दिशा में कुछ अलग संदेश दे रहा है, जो नतीजों पर गहरा असर डाल सकता है।
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