कोचिंग नहीं, बच्चों पर जबरन विषय थोपना तनाव की असली वजह : मनोचिकित्सक डॉ. एमएल अग्रवाल
नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। नीट-यूजी परीक्षा और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के कोटा दौरे और छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम को लेकर मनोचिकित्सकों ने मिश्रित प्रतिक्रियाएं दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, परीक्षा संबंधी तनाव और राजनीतिक गतिविधियों के प्रभाव को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।
कोटा के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. एमएल अग्रवाल ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, छात्रों में अवसाद और तनाव के कई छिपे हुए कारण होते हैं। उनके अनुसार, कोचिंग संस्थानों को अलग रख दिया जाए तो सबसे बड़ी समस्या विषयों के चयन से जुड़ी होती है। कई बार माता-पिता बच्चों की रुचि और क्षमता को नजरअंदाज कर उन पर ऐसे विषय थोप देते हैं, जिनमें उनकी दिलचस्पी नहीं होती। कुछ मामलों में शिक्षक भी छात्रों को एक निश्चित दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। जब किसी छात्र की इच्छा के विरुद्ध निर्णय लिए जाते हैं, तभी से तनाव और मानसिक दबाव की शुरुआत हो जाती है।
राहुल गांधी के कार्यक्रम पर टिप्पणी करते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा, भारतीय राजनीति में यह एक सामान्य प्रवृत्ति बन गई है कि विपक्ष सत्तारूढ़ दल की नीतियों और कदमों का विरोध करता है। जब कोई राजनीतिक दल सत्ता में होता है तो परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों पर अपेक्षाकृत कम चर्चा करता है, लेकिन विपक्ष में आने के बाद वही मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा से ठीक पहले आयोजित होने वाले ऐसे कार्यक्रम छात्रों का ध्यान भटका सकते हैं। कुछ छात्र इन आयोजनों से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि कुछ इससे दूरी बनाए रखेंगे। उन्होंने छात्रों, विशेषकर परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों, को ऐसे कार्यक्रमों से दूर रहने की सलाह दी।
दिल्ली के मनोचिकित्सक डॉ. राजीव मेहता ने कहा कि किसी भी रैली या कार्यक्रम की प्रासंगिकता उसके उद्देश्य पर निर्भर करती है। यदि उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना है तो ऐसा किसी भी समय किया जा सकता है। हालांकि यदि कार्यक्रम का मकसद परीक्षाओं को बाधित करना या रद्द कराने की मांग करना है, तो यह उचित नहीं माना जा सकता। यदि इसका उद्देश्य सरकार पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए दबाव बनाना है, तो इसे एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा सकता है।
जयपुर के मनोचिकित्सक डॉ. शिव गौतम ने भी परीक्षा से पहले राजनीतिक सभाओं के आयोजन पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में छात्रों का मनोबल गिरने नहीं देना चाहिए और राजनीतिक दलों को चुनावी या राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर छात्रों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने नीट-यूजी के दोबारा आयोजन पर कहा कि इससे छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव अवश्य बढ़ा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस बार पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए अधिक मजबूत और सुरक्षित व्यवस्था बनाने का प्रयास कर रही है, जिससे छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
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पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में तेजी से क्लीन एनर्जी अपनाने वाले देशों में शामिल: प्रह्लाद जोशी
नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है।
सरकार की ग्रीन एनर्जी और इंडस्ट्री में कार्बन उत्सर्जन कम करने की महत्वाकांक्षी कोशिशों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन देश को टिकाऊ और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की ओर ले जाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा आयोजित नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मजबूत करना: राज्य की नीतियों, हब और बुनियादी ढांचे के जरिए विषय पर आयोजित नेशनल वर्कशॉप में जोशी ने कहा कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने और ग्रीन हाइड्रोजन के विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने कहा कि 19,744 करोड़ रुपए के बजट के साथ 2023 में शुरू किए गए नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से भारत के ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, इस्तेमाल और निर्यात के लिए एक ग्लोबल हब बनने की उम्मीद है।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन स्कीम के तहत पारदर्शी सर्टिफिकेशन और नियमों के पालन को आसान बनाने के लिए एमएनआरई द्वारा तैयार किया गया ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल ऑफ इंडिया (जीएचसीआई) लॉन्च किया। इस पोर्टल से जवाबदेही बढ़ने और उभरते हुए ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार होने की उम्मीद है।
इस मिशन को आगे बढ़ाने में राज्यों से ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह करते हुए जोशी ने कहा कि छह राज्यों ने पहले ही खास ग्रीन हाइड्रोजन नीतियां घोषित कर दी हैं, जबकि सात अन्य राज्यों ने अपनी औद्योगिक और रिन्यूएबल एनर्जी नीतियों में हाइड्रोजन से जुड़े प्रावधान शामिल किए हैं। चार और राज्य अभी अपनी नीति के ढांचे को अंतिम रूप दे रहे हैं।
मंत्री ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग में हुई अहम प्रगति पर जोर देते हुए बताया कि 15 कंपनियों को हर साल 3,000 मेगावाट की घरेलू इलेक्ट्रोलाइज़र मैन्युफैक्चरिंग क्षमता स्थापित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दिए गए हैं। इस कदम का मकसद आयातित सप्लाई चेन पर भारत की निर्भरता को कम करना और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को मजबूत करना है।
रिफाइनरी सेक्टर में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (एनआरएल) को हर साल 30,000 मीट्रिक टन (एमटीपीए) ग्रीन हाइड्रोजन की सप्लाई के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिए गए हैं।
--आईएएनएस
पीएसके/डीकेपी
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