कांग्रेस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर पलटवार किया। पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने इसे हताशा की पक्की निशानी बताया। रमेश ने कहा कि मोदी ने पहले अपने विरोधियों को “अर्बन नक्सल कहा था और अब उन्हें “दिमागी नक्सल” कह रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को पॉलिटिकल साइंस में “गालियां देने में माहिर” (मास्टर एब्यूज़र) भी बताया। रमेश ने X पर एक पोस्ट में कहा, “पहले उन्होंने अपने विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहा। अब वे उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे हैं। यह उनकी हताशा की पक्की निशानी है।
उन्होंने आगे कहा कि यह "एक अलग बात" है कि प्रधानमंत्री ने आखिरकार वही किया, जिसकी मांग या वकालत उन लोगों ने की थी, जिन्हें उन्होंने अर्बन नक्सल या दिमागी नक्सल कहा था। लगातार 13वीं बार देश को स्वतंत्रता दिवस पर संबोधित करते हुए मोदी ने दावा किया कि देश से हथियारबंद नक्सलवाद खत्म हो गया है, लेकिन उन्होंने सतर्कता कम न करने की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि भले ही हथियारबंद नक्सलियों को जंगलों से खदेड़ दिया गया हो, लेकिन "दिमागी नक्सली" अभी भी हिंसा और अशांति फैलाने और "समाज को गलत रास्ते पर ले जाने" के मौके तलाश रहे हैं। मोदी ने कहा कि ऐसे "बौद्धिक नक्सलियों" की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की ज़रूरत है।
मोदी पर महिला आरक्षण को लेकर लालकिले से ‘‘बेईमानी भरा दावा’’ करने का आरोप लगाया और कहा कि मोदी सरकार की ‘‘दोहरी एवं पाखंडी’’ नीति के कारण यह आरक्षण 2024 के लोकसभा चुनाव से लागू नहीं किया जा सका। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री को पता होना चाहिए कि संसद ने सितंबर, 2023 में सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि कानून 2024 के चुनावों से प्रभावी न हो पाए। कांग्रेस महासचिव ने दावा किया कि यह अधिनियम 16 अप्रैल 2026 की देर शाम ‘‘जल्दबाजी में और चुपचाप’’ अधिसूचित किया गया।
रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को यह भी याद रखना चाहिए कि महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान संविधान में 1993 में पारित 73वें और 74वें संशोधनों के माध्यम से किया गया था और इसे लागू कराने में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सोच एवं दृढ़ संकल्प की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के मुद्दे पर लगातार अपने रुख पर कायम रही है और मौजूदा लोकसभा सदस्यों की संख्या के भीतर 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की मांग करती रही है।
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