Explainer: आजादी की पहली सुबह लोगों को पता ही नहीं था क्या होती है स्वतंत्रता? आजाद भारत का निकाल रहे थे अजीबो-गरीब मतलब
भारत आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. हर साल की तरह इस बार भी देश के प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से तिरंघा फहराया और देश को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं. देश भर के स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी और निजी संस्थानों पर शान से ध्वजारोहण किया जाता है. ध्वजारोहण देखना आज भले ही एक सहज और नॉर्मल चीज हो गई है लेकिन 15 अगस्त 1947 को चीजें इतनी सहज नहीं थीं. उस दिन तिरंगा देखना लाखों भारतीयों के लिए आजादी को अपनी आंखों से महसूस करने जैसा था.
हमें आज पढ़ाई, नौकरी, कारोबार, यात्रा और अपने पसंद की जिंदगी जीने का अधिकार है. हम चुनाव भी लड़ सकते हैं और अपने पसंद की सरकार भी चुन सकते हैं. कानून के दायरे में रहते हुए हम अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन भारत 80 साल पहले तक ब्रिटिश शासन के अधीन था. लोगों के अधिकार सीमित थे. खास बात है कि भारतीय को भारत में ही कोई भी फैसला लेने की आजादी नहीं थी.
आखिर देश की आजादी की पहली सुबह कैसी थी? क्या आप जानते हैं अगर नहीं तो आइये आपको लेकर चलते हैं 15 अगस्त 1947 में…
15 अगस्त 1947 की सुबह यानी आजाद भारत की पहली सुबह काफी ज्यादा ऐतिहासिक थी. दिल्ली में हजारों नहीं बल्कि लाखों लोग जुटे हुए थे. आजादी का जश्न मनाने के लिए सभी सड़कों पर थे. प्रसिद्ध लेखक राजेंद्र लाल हांडा ने अपनी किताब 'दिल्ली में दस वर्ष' में उस वक्त का आंखों देखा हाल दर्ज किया. उनके अनुसार, 14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि में दिल्ली में अभूतपूर्व जनसमूह इकट्ठा हुआ था. आधी रात को पंडित जवाहरलाल नेहरू संविधान सभा से निकले तो उनके पीछे ही भीड़ चल पड़ी थी.
ये खबर भी पढ़ें- Explainer: 80 साल में बदल गया भारत, अब पाक से युद्ध हुआ तो टैंक नहीं ये 5 हथियार तय करेंगे नतीजे
लोगों के आंखों में खुशी के आंसू
14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि में जब देश आजाद हुआ तो ये सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं था बल्कि उस गुलामी के अंत का प्रतीक था, जिसमें कई पीढ़ियां गुजर चुकी थीं. 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम्' की धुनों के बीच लोगों की आंखों में खुशी के आंसू थे. हालांकि, इस खुशी के बीच विभाजन की पीड़ा दिखाई दी. हालांकि, जैसे ही राष्ट्रगान में पंजाब और सिंध का नाम आया, वैसे ही लोगों के चेहरे पर एक तनाव दिखाई दिया. सबके आंखों के सामने बंटवारे और हिंसा की तस्वीरें सामने आ गई.
15 अगस्त की सुबह उगा सूरज कुछ अलग था. आज लोगों की आंखों में एक चमक थी. ये चमक थी आजाद होने की. पंडित नेहरू कुछ देर बाद लाल किले पर पहुंचे. उन्होंने किले पर लगे यूनियन जैक की जगह भारत का तिरंगा फहराया. दिल्ली गेट से लेकर कश्मीरी गेट और जामा मस्जिद तक सिर्फ लोग ही लोग दिखाई दे रहे थे. पूरा इलाका खाली होने में घंटों लग गए थे. उस वक्त की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम में कम से कम 10 लाख लोग शामिल हुए थे.
ये खबर भी पढ़ें- Explainer: आजादी के 80 साल में भारत की 5 बड़ी रणनीतिक गलतियां, जिनका असर आज भी दिखता है
10 दिवाली एक साथ मनाने जैसा जश्न
उस दौर की घटनाओं पर आधारित किताब 'फ्रीडम एट मिडनाइट' में लेखक डोमिनिक लैपीयरे और लैरी कॉलिन्स ने कहा कि 14 अगस्त से ही गांवों और शहरों में जश्न शुरू हो गया था. लोग साइकिल, कार, बस, तांगा, बैलगाड़ी, रिक्शा, हाथी और घोड़ों पर सवार पर दिल्ली आ रहे थे. कई लोग पैदल भी अपने-अपने गांवों से दिल्ली आ रहे थे. सबने नए-नए कपड़े पहने हुए थे. एक-दूसरे को बधाई दी जा रही थी. मुंह मीठा करवा रहे थे. पूरा माहौल ऐसा था- मानो देश में एक साथ 10 दिवाली मनाई जा रही है. बच्चों को बताया जा रहा था कि अंग्रेजों ने देश छोड़ दिया है. भारत आजाद हो चुका है.
आजादी का मतलब ही लोगों को पता नहीं था
देश की आजादी क्या होती है, असल में यह किसी को पता ही नहीं था. 'फ्रीडम एट मिडनाइट' में बताया कि गांवों से आए लोग अपने-अपने हिसाब से बच्चों को आजादी का मतलब समझा रहे थे. कोई कह रहा था कि अब हमारे पास ज्यादा पशु होंगे. कोई समझ रहा था कि आजादी के बाद उनके खेतों से अधिक फसल होगी तो कोई गायों से अधिक दूध आने को आजादी सोच रहा था.
ये खबर भी पढ़ें- PM मोदी ने लाल किले से क्यों गिनाए डिफेंस, मोबाइल और डिजिटल क्रांति के आंकड़े? जानिए कितना बदला भारत
लाल किले पर तिरंगा फहरना- सपने के सच होने जैसा
लाल किले से जैसे ही यूनियन जैक का झंडा उतरा, उसके बाद देशभर के सरकारी दफ्तरों और सैन्य प्रतिष्ठानों से यूनियन जैका का झंडा उतारा गया. उसकी जगह तिरंगा फहराया गया. ये दृश्य हर उस व्यक्ति के लिए कोई सपना सच होने की तरह था, जिसने वर्षों तक विदेशी शासन और उसके दमन को झेला था.
सम्मान-स्वतंत्र भारत का प्रतीक का तिरंगा
आज हम आसानी से तिरंगा अपने हाथ में लेकर चल सकते हैं. हालांकि, 1947 में तिरंगा अपने हाथों में लेकर चलना आसान नहीं था. उस वक्त तिरंगा सिर्फ एक झंडा नहीं था बल्कि सम्मान, स्वाभिमान, स्वतंत्र भारत और अधिकार का प्रतीक था. आज हम जब अपने तिरंगे को देखें तो हमें आजादी की उस पहली सुबह को याद करना चाहिए, जब लाखों भारतीयों ने पहली बार सचमुच इसे महसूस किया था कि हम आजाद हैं.
ये खबर भी पढ़ें- Independence Day 2026: क्रिकेट पर कैसे पड़ी बंटवारे की मार? भारतीय प्लेयर्स पाकिस्तान के लिए खेलने पर क्यों हुए मोहताज
लगातार 13वीं बार पीएम मोदी ने देश को किया संबोधित
पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर लाल किले की प्राचीर पर ध्वजारोहण किया और देश को 13वीं बार संबोधित किया. आज लाल किले से उन्होंने तकरीबन 75 से 76 मिनट का भाषण दिया है. इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस का आयोजन बेहद खास रहा क्योंकि भारत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष भी मना रहा है. कार्यक्रम में आजादी के बाद पहली बार वंदे मातरम का गायन हुआ.
A memorable Independence Day at the Red Fort! This day reminds us of the courage and sacrifice of those who gave us freedom. At the same time, it is a day to renew our commitment to building a Viksit Bharat.
— Narendra Modi (@narendramodi) August 15, 2026
May the Tricolour always inspire us to rise above every challenge,… pic.twitter.com/GMNW6nc1YD
स्वतंत्रता दिवस पर CM धामी ने फहराया तिरंगा, गिनाईं सरकार की उपलब्धियां, युवाओं और विकास के लिए 7 बड़े ऐलान
CM Dhami: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में ध्वजारोहण किया। इस दौरान उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और वीर बलिदानियों को नमन करते हुए प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। समारोह की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन से हुई और इसके बाद राष्ट्रगान हुआ।
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि सरकार संकट की इस घड़ी में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों तक जल्द राहत पहुंचाने, घायलों को बेहतर इलाज देने और क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों, पेयजल व बिजली की व्यवस्था को जल्द ठीक करने पर सरकार का फोकस है।
2035 तक विकसित उत्तराखंड का लक्ष्य
सीएम धामी ने कहा कि सरकार ने 2035 तक विकसित उत्तराखंड बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सड़क, रेल और रोपवे कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और कई रोपवे परियोजनाओं से राज्य की कनेक्टिविटी बेहतर होने की बात उन्होंने कही।
उन्होंने कहा कि केदारनाथ-बदरीनाथ पुनर्निर्माण, मंदिर माला मिशन, ऋषिकेश-हरिद्वार कॉरिडोर और शीतकालीन यात्रा जैसी योजनाओं से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल रहा है। उत्तराखंड अब धार्मिक पर्यटन के साथ वेलनेस, एडवेंचर टूरिज्म, फिल्म शूटिंग और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी आगे बढ़ रहा है।
युवाओं के लिए रोजगार और स्किल पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में काम कर रही है। स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर और 200 करोड़ रुपये के वेंचर फंड की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ के तहत सरकारी स्कूलों की कक्षा 11 और 12 के प्रतिभाशाली छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग देने की घोषणा भी बताई। पहले चरण में 10 हजार छात्रों को इसका लाभ मिलेगा।
खेल और महिलाओं-किसानों के लिए भी योजनाएं
सीएम ने बताया कि उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय खेलों में 103 पदक जीते। अब 8 शहरों में 23 खेल अकादमियां स्थापित करने की योजना है। महिला सशक्तिकरण के तहत 3 लाख से ज्यादा महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। किसानों को ब्याज मुक्त ऋण और कृषि उपकरणों पर सब्सिडी जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने राज्य की अर्थव्यवस्था में भी बढ़ोतरी का दावा किया। उनके अनुसार पिछले एक साल में राज्य की GSDP में 7.23 प्रतिशत वृद्धि हुई और प्रति व्यक्ति आय में 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। पिछले पांच वर्षों में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं।
सीएम धामी के 7 बड़े ऐलान
स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास और युवाओं से जुड़े 7 महत्वपूर्ण ऐलान किए। इनमें चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में विशेष औद्योगिक पार्क, प्रदेश में पहला युवा आयोग और सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं, पूर्व सैनिकों व अग्निवीरों के लिए स्वरोजगार सहायता शामिल है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना में राज्यांश 50 हजार से बढ़ाकर 75 हजार रुपये करने, 18 से 30 साल के युवाओं के लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार एवं उद्यमिता प्रोत्साहन योजना शुरू करने और IIT-IIM के सहयोग से मुफ्त उद्यमिता व कौशल प्रशिक्षण देने की घोषणा की गई। सरकार उद्यम शुरू करने के लिए बैंक ऋण की 30 प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में देगी। साथ ही बहादुर बच्चों के लिए इसी साल से ‘बाल वीरता पुरस्कार’ शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां विकास के साथ राज्य की संस्कृति और पहचान भी मजबूत हो और रोजगार के साथ पलायन की समस्या का समाधान हो।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation








