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600 टेस्ट खेलने वाली तीसरा देश बना भारत, जानिए सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने वाली लिस्ट में किस नंबर पर है पाकिस्तान

Teams With Played Most Test Matches: भारतीय क्रिकेट टीम श्रीलंका के खिलाफ गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले जा रहे मुकाबले में अपना 600वां टेस्ट मैच केलने उतरी है. टेस्ट क्रिकेट में 600 टेस्ट मैच खेलने वाली महज तीसरी टीम बन गई है. उनसे पहले महज इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की टीम ही ऐसा कर सकीं. लेकिन, क्या आपको मालूम है कि पाकिस्तान की टीम इस लिस्ट में कहां पहुंची है. तो आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाली टीमें कौन-कौन सी हैं.

इंग्लैंड क्रिकेट टीम नंबर-1 पर काबिज

सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने का रिकॉर्ड इंग्लैंड क्रिकेट टीम के नाम पर दर्ज है. इंग्लैंड क्रिकेट टीम ने 1877 से अब तक 1097 टेस्ट मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने 405 मैच जीते हैं और 336 मैचों में हार का सामना किया है. वहीं, 356 मैच ड्रॉ पर खत्म हुए हैं. इंग्लैंड का विनिंग प्रतिशत 37 है.

ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम नंबर-1 पर मौजूद

ऑस्ट्रेलिया ने 1877 से अब तक 883 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 426 मैच जीते और 435 मैचों में हार का सामना करना पड़ा. वहीं, 219 मुकाबले ड्रॉ पर खत्म हुए और 2 मैच टाई हो गए. ऑस्ट्रेलिया का विनिंग प्रतिशत 48.11 है.

नंबर-3 पर काबिज टीम इंडिया

भारतीय क्रिकेट टीम टेस्ट क्रिकेट में 600 मैच खेलने वाली महज तीसरी टीम बन गई है. भारत ने अपना पहला टेस्ट 1932 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. 600 टेस्ट मैचोंमें भारत ने 186 मैच जीते, 188 मैच में हार का सामना किया और 224 मैच ड्रॉ पर खत्म हुए. एक मैच टाई हुआ.

चौथे स्थान पर वेस्टइंडीज की टीम

सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने वाली टीमों की लिस्ट में तीसरे स्थान पर वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम का नाम आता है. कैरेबियाई टीम ने 1928 से अब तक 596 मुकाबले खेले हैं, जिसमें उन्होंने 187 मैच जीते हैं, 224 मैच हारे हैं और 184 मैच ड्रॉ पर खत्म हुए हैं. इसका मतलब है कि अब अगली टीम जो 600 टेस्ट मैचों का आंकड़ा पार करेगी, वो कोई और नहीं वेस्टइंडीज ही होगी.

पांचवें नंबर पर है न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम

इस लिस्ट में चौथे नंबर पर न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम का नाम आता है. कीवी टीम ने 1930 से 2026 के बीच अब तक 487 मुकाबले खेले हैं, जिसमें उन्होंने 153 मैच जीते हैं, 152 मैच हारे हैं और 166 मैच ड्रॉ पर खत्म हुए हैं.

6वें नंबर पर है साउथ अफ्रीका

सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने वाली टीमों की लिस्ट में पांचवें स्थान पर साउथ अफ्रीका है. अफ्रीकी टीम ने 1889 से अब तक साउथ अफ्रीका के लिए 479 मैच खेले हैं, जिसमें 191 मैच जीते हैं, 162 मैच हारे हैं. वह 126 मैच ड्रॉ पर खत्म हुए हैं.

पाकिस्तान 7वें पायदान पर है काबिज

सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने वाली टीमों की लिस्ट में पाकिस्तान क्रिकेट टीम छठवें स्थान पर आती है. पाकिस्तान ने पहला टेस्ट मैच 1952 में खेला और तब से अब तक 471 मैच खेले हैं, जिसमें 153 मैच पाकिस्तान ने जीते हैं, 152 मैचों में हार का सामना किया, 166 मैच ड्रॉ हुए.

यहां देखिए पूरी लिस्ट

रैंक टीम टेस्ट मैच जीत हार ड्रॉ टाई
1 ???? इंग्लैंड 1,097 405 336 356 0
2 ???????? ऑस्ट्रेलिया 883* 426 435 219 2
3 ???????? भारत 600* 186 188 224 1
4 ???????? वेस्टइंडीज 596* 187 224 184 0
5 ???????? न्यूजीलैंड 487* 153 152 166 0
6 ???????? दक्षिण अफ्रीका 479 191 162 126 0
7 ???????? पाकिस्तान 471 153 152 166 0

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Explainer: आजादी की पहली सुबह लोगों को पता ही नहीं था क्या होती है स्वतंत्रता? आजाद भारत का निकाल रहे थे अजीबो-गरीब मतलब

भारत आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. हर साल की तरह इस बार भी देश के प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से तिरंघा फहराया और देश को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं. देश भर के स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी और निजी संस्थानों पर शान से ध्वजारोहण किया जाता है. ध्वजारोहण देखना आज भले ही एक सहज और नॉर्मल चीज हो गई है लेकिन 15 अगस्त 1947 को चीजें इतनी सहज नहीं थीं. उस दिन तिरंगा देखना लाखों भारतीयों के लिए आजादी को अपनी आंखों से महसूस करने जैसा था. 

हमें आज पढ़ाई, नौकरी, कारोबार, यात्रा और अपने पसंद की जिंदगी जीने का अधिकार है. हम चुनाव भी लड़ सकते हैं और अपने पसंद की सरकार भी चुन सकते हैं. कानून के दायरे में रहते हुए हम अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन भारत 80 साल पहले तक ब्रिटिश शासन के अधीन था. लोगों के अधिकार सीमित थे. खास बात है कि भारतीय को भारत में ही कोई भी फैसला लेने की आजादी नहीं थी.

आखिर देश की आजादी की पहली सुबह कैसी थी? क्या आप जानते हैं अगर नहीं तो आइये आपको लेकर चलते हैं 15 अगस्त 1947 में…

15 अगस्त 1947 की सुबह यानी आजाद भारत की पहली सुबह काफी ज्यादा ऐतिहासिक थी. दिल्ली में हजारों नहीं बल्कि लाखों लोग जुटे हुए थे. आजादी का जश्न मनाने के लिए सभी सड़कों पर थे. प्रसिद्ध लेखक राजेंद्र लाल हांडा ने अपनी किताब 'दिल्ली में दस वर्ष' में उस वक्त का आंखों देखा हाल दर्ज किया. उनके अनुसार, 14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि में दिल्ली में अभूतपूर्व जनसमूह इकट्ठा हुआ था. आधी रात को पंडित जवाहरलाल नेहरू संविधान सभा से निकले तो उनके पीछे ही भीड़ चल पड़ी थी. 

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लोगों के आंखों में खुशी के आंसू

14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि में जब देश आजाद हुआ तो ये सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं था बल्कि उस गुलामी के अंत का प्रतीक था, जिसमें कई पीढ़ियां गुजर चुकी थीं. 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम्' की धुनों के बीच लोगों की आंखों में खुशी के आंसू थे. हालांकि, इस खुशी के बीच विभाजन की पीड़ा दिखाई दी. हालांकि, जैसे ही राष्ट्रगान में पंजाब और सिंध का नाम आया, वैसे ही लोगों के चेहरे पर एक तनाव दिखाई दिया. सबके आंखों के सामने बंटवारे और हिंसा की तस्वीरें सामने आ गई. 

15 अगस्त की सुबह उगा सूरज कुछ अलग था. आज लोगों की आंखों में एक चमक थी. ये चमक थी आजाद होने की. पंडित नेहरू कुछ देर बाद लाल किले पर पहुंचे. उन्होंने किले पर लगे यूनियन जैक की जगह भारत का तिरंगा फहराया. दिल्ली गेट से लेकर कश्मीरी गेट और जामा मस्जिद तक सिर्फ लोग ही लोग दिखाई दे रहे थे. पूरा इलाका खाली होने में घंटों लग गए थे. उस वक्त की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम में कम से कम 10 लाख लोग शामिल हुए थे. 

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10 दिवाली एक साथ मनाने जैसा जश्न

उस दौर की घटनाओं पर आधारित किताब 'फ्रीडम एट मिडनाइट' में लेखक डोमिनिक लैपीयरे और लैरी कॉलिन्स ने कहा कि 14 अगस्त से ही गांवों और शहरों में जश्न शुरू हो गया था. लोग साइकिल, कार, बस, तांगा, बैलगाड़ी, रिक्शा, हाथी और घोड़ों पर सवार पर दिल्ली आ रहे थे. कई लोग पैदल भी अपने-अपने गांवों से दिल्ली आ रहे थे. सबने नए-नए कपड़े पहने हुए थे. एक-दूसरे को बधाई दी जा रही थी. मुंह मीठा करवा रहे थे. पूरा माहौल ऐसा था- मानो देश में एक साथ 10 दिवाली मनाई जा रही है. बच्चों को बताया जा रहा था कि अंग्रेजों ने देश छोड़ दिया है. भारत आजाद हो चुका है. 

आजादी का मतलब ही लोगों को पता नहीं था

देश की आजादी क्या होती है, असल में यह किसी को पता ही नहीं था. 'फ्रीडम एट मिडनाइट' में बताया कि गांवों से आए लोग अपने-अपने हिसाब से बच्चों को आजादी का मतलब समझा रहे थे. कोई कह रहा था कि अब हमारे पास ज्यादा पशु होंगे. कोई समझ रहा था कि आजादी के बाद उनके खेतों से अधिक फसल होगी तो कोई गायों से अधिक दूध आने को आजादी सोच रहा था.   

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लाल किले पर तिरंगा फहरना- सपने के सच होने जैसा

लाल किले से जैसे ही यूनियन जैक का झंडा उतरा, उसके बाद देशभर के सरकारी दफ्तरों और सैन्य प्रतिष्ठानों से यूनियन जैका का झंडा उतारा गया. उसकी जगह तिरंगा फहराया गया. ये दृश्य हर उस व्यक्ति के लिए कोई सपना सच होने की तरह था, जिसने वर्षों तक विदेशी शासन और उसके दमन को झेला था.  

सम्मान-स्वतंत्र भारत का प्रतीक का तिरंगा

आज हम आसानी से तिरंगा अपने हाथ में लेकर चल सकते हैं. हालांकि, 1947 में तिरंगा अपने हाथों में लेकर चलना आसान नहीं था. उस वक्त तिरंगा सिर्फ एक झंडा नहीं था बल्कि सम्मान, स्वाभिमान, स्वतंत्र भारत और अधिकार का प्रतीक था. आज हम जब अपने तिरंगे को देखें तो हमें आजादी की उस पहली सुबह को याद करना चाहिए, जब लाखों भारतीयों ने पहली बार सचमुच इसे महसूस किया था कि हम आजाद हैं. 

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लगातार 13वीं बार पीएम मोदी ने देश को किया संबोधित 

पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर लाल किले की प्राचीर पर ध्वजारोहण किया और देश को 13वीं बार संबोधित किया. आज लाल किले से उन्होंने तकरीबन 75 से 76 मिनट का भाषण दिया है. इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस का आयोजन बेहद खास रहा क्योंकि भारत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष भी मना रहा है. कार्यक्रम में आजादी के बाद पहली बार वंदे मातरम का गायन हुआ. 

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