How Cape Verde took on Spain and shocked the world | BBC News
Debutants Cape Verde produced one of the biggest 2026 World Cup shocks of recent times by holding Spain to a goalless draw in Atlanta. The third-smallest country in terms of population to qualify for a World Cup, Cape Verde were 67th in Fifa's latest rankings and many expected them to be swept aside by second-ranked Spain in their opening Group H contest. But what does their recent success mean for the small island off the coast of West Africa? 00:00 - Intro 00:38 - The nation that shocked the world 01:23 - Quickfire questions about Cape Verde 02:15 - How did they shock Spain? 03:39 - The tactics behind the upset 06:08 - What could this mean for Cape Verde? Subscribe here: http://bit.ly/1rbfUog For more news, analysis and features, visit: www.bbc.com/news #WorldCup #CapeVerde #BBCNews
Jharkhand News: झारखंड में छिपे हैं 20 दुर्लभ खनिज, अमेरिकी कंपनियों ने खनन के लिए मिलाया हाथ
Jharkhand News: झारखंड के समृद्ध खनिज संसाधनों ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है. राज्य में परंपरागत खनिजों के अलावा अब बेहद मूल्यवान और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्रिटिकल मिनरल्स की खोज, खनन और प्रसंस्करण के लिए अमेरिकी कंपनियों ने अपनी रुचि दिखाई है. इस सिलसिले में रांची में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया.
भविष्य की रणनीतियों को लेकर चर्चा
यह बैठक झारखंड के मुख्य सचिव अविनाश कुमार और अमेरिकी काउंसलेट जेनरल कैली जाइल डियाज के नेतृत्व में आए एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के बीच संपन्न हुई. बैठक में राज्य के खनिज क्षेत्र में मौजूद असीमित संभावनाओं पर गहन मंथन किया गया और भविष्य की रणनीतियों को लेकर बातचीत आगे बढ़ाई गई.
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को दी गई अनमोल खजाने की जानकारी
बैठक के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को झारखंड की धरती में दबे अनमोल खजाने के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. उन्हें बताया गया कि झारखंड में कोयला, लौह अयस्क, तांबा, बॉक्साइट, सोना और लाइम स्टोन जैसे परंपरागत खनिजों के विशाल भंडार पहले से ही मौजूद हैं. इन क्षेत्रों में राज्य ने खनन और प्रसंस्करण के मामले में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है. अब सरकार का ध्यान उन दुर्लभ खनिजों पर है जिनकी मांग पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रही है.
अमेरिकी कंपनियों को झारखंड आने का न्योता
राज्य सरकार अब इन दुर्लभ और रणनीतिक खनिजों के दोहन के लिए दुनिया की सबसे बेहतरीन और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना चाहती है. बैठक के दौरान अमेरिकी काउंसलेट जेनरल के माध्यम से अमेरिका की बड़ी माइनिंग कंपनियों को झारखंड में निवेश करने और उन्नत तकनीक के साथ काम करने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है. राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस क्षेत्र में काम कर रही विश्व की अग्रणी कंपनियों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि झारखंड में आधुनिकतम तकनीकों का समावेश किया जा सके.
बैठक में बेहद महत्वपूर्ण जानकारी भी की साझा
इस बैठक में यह बेहद महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की गई कि अमेरिका की दिग्गज माइनिंग कंपनियों के एक बड़े समूह, यूएसआईएसपीए ने खुद झारखंड सरकार से संपर्क साधा है. इस अमेरिकी समूह ने राज्य में खनिज ब्लॉकों की होने वाली खुली नीलामी प्रक्रिया में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की है. अमेरिकी कंपनियां विशेष रूप से दुर्लभ खनिजों की खोज और उनकी प्रोसेसिंग से जुड़ी गतिविधियों में काम करने के लिए उत्सुक हैं. इस बैठक में खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अरवा राजकमल और खान निदेशक राहुल कुमार सिन्हा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे.
गिरिडीह और कोडरमा में मिला लिथियम का बड़ा भंडार
दुनिया भर में वर्तमान समय में कुल 24 रणनीतिक और क्रिटिकल मिनरल्स को चिन्हित किया गया है. भारत के लिए यह बड़े गौरव की बात है कि इन 24 में से 20 अत्यंत महत्वपूर्ण मिनरल्स अकेले झारखंड राज्य में ही उपलब्ध हैं. यही कारण है कि अमेरिका और चीन जैसे शक्तिशाली देश इन खनिजों में हिस्सेदारी और साझेदारी चाहते हैं. झारखंड के गिरिडीह और कोडरमा जिलों में लिथियम के बड़े भंडार प्रमाणित हो चुके हैं. लिथियम को मौजूदा दौर का सबसे महत्वपूर्ण खनिज माना जाता है क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी बनाने में इसका सबसे ज्यादा उपयोग होता है.
इसके साथ ही झारखंड का पलामू और लातेहार जिला देश का एक प्रमुख ग्रेफाइट बेल्ट माना जाता है. बैटरी उद्योग के विकास के लिए ग्रेफाइट एक अनिवार्य तत्व है और इस क्षेत्र में भरपूर मात्रा में ग्रेफाइट उपलब्ध है. इसके अलावा लोहरदगा और गुमला का जो बॉक्साइट क्षेत्र है, वहां भी क्रिटिकल मिनरल्स की मौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है. यहाँ बॉक्साइट के साथ-साथ टाइटेनियम, गैलियम और वैनेडियम जैसे मूल्यवान खनिज पाए गए हैं जो आने वाले समय में देश के उच्च तकनीकी उद्योगों की रीढ़ बनेंगे.
सिंहभूम क्षेत्र भी बना क्रिटिकल मिनरल का बड़ा हब
झारखंड का पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम जिला भी क्रिटिकल मिनरल जोन के रूप में उभरकर सामने आया है. इस पूरे क्षेत्र में तांबा के साथ-साथ निकेल, कोबाल्ट, सोना और आरईई (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) मिलने की बहुत अधिक संभावना देखी जा रही है. पश्चिमी सिंहभूम के इलाकों में जांच के दौरान निकेल, कोबाल्ट और क्रोमाइट के अंश मिले हैं.
अगर कुल मिलाकर देखा जाए तो झारखंड की धरती में लिथियम, टाइटेनियम, वैनेडियम, सिल्वर, ग्रेफाइट, पोटाश, निकेल, सेलेनियम, टेलुरियम, जिरकोनियम, मोलीबीडेनम, बेरिल, गेलियम, नियबियम, टांटुलम, टंगस्टेन और टिन जैसे 20 बेहद महत्वपूर्ण क्रिटिकल मिनरल्स के विशाल भंडार दबे हुए हैं. इन खनिजों की नई जगहों पर खोज का काम भी बेहद तेजी से चल रहा है. अमेरिकी कंपनियों के इस क्षेत्र में आने से झारखंड न सिर्फ देश बल्कि दुनिया के नक्शे पर एक बड़े माइनिंग हब के रूप में स्थापित हो जाएगा और इससे राज्य में रोजगार और राजस्व की भी बड़ी वृद्धि होगी.
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