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पीयूष गोयल ने फ्रांस में किया यूपीआई लॉन्च, भारतीय पर्यटकों के लिए डिजिटल भुगतान हुआ आसान

नई दिल्ली, 16 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को फ्रांस के नीस शहर में मशहूर गैलरीज लाफायेट में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लॉन्च किया। इससे फ्रांस जाने वाले भारतीय यात्री जाने-पहचाने प्लेटफॉर्म के जरिए आसानी से पेमेंट कर सकेंगे।

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर पोस्ट में कहा, भारत के वर्ल्ड-क्लास डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म को फ्रांस के प्रमुख रिटेल डेस्टिनेशन में से एक में लाना यूपीआई के ग्लोबल विस्तार में एक और अहम कदम है। लाइरा कलेक्ट और एनआईपीएल की भागीदारी के साथ, यह पहल बड़े पैमाने पर भरोसेमंद, आसान और इंटरऑपरेबल डिजिटल समाधान देने की भारत की क्षमता को दिखाती है।

उन्होंने कहा, यह लॉन्च भारत और फ्रांस के बीच आर्थिक और तकनीकी संबंधों को और मजबूत करता है, जो हमारी रणनीतिक साझेदारी की बढ़ती गहराई और महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

यह डिजिटल पेमेंट कॉरिडोर दोनों देशों के बीच व्यापार के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाता है। इससे यात्रियों को तुरंत सुविधा मिलती है क्योंकि उन्हें फिजिकल करेंसी एक्सचेंज, भारी मात्रा में कैश ले जाने या विदेशी मुद्रा एक्सचेंज की अनजान फीस जैसी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता।

इससे फ्रांसीसी व्यवसायों को भी आर्थिक बढ़ावा मिलेगा, जिन्हें बड़ी संख्या में तकनीक-प्रेमी भारतीय पर्यटकों तक तुरंत पहुंच मिलेगी, जिससे ट्रांजेक्शन की संख्या बढ़ेगी।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि स्थानीय व्यापारियों को भी बेहतर कैश मैनेजमेंट, फिजिकल कैश संभालने से जुड़ी कम लागत और सुरक्षित, रियल-टाइम ट्रांज़ैक्शन सेटलमेंट का लाभ मिलेगा।

3 जून को कंबोडिया के बाद फ्रांस दूसरा देश है, जहां यूपीआई लॉन्च किया गया है। यह अहम सहयोग नोम पेन्ह में एक औपचारिक समारोह के बाद शुरू हुआ, जिसमें कंबोडिया के नेशनल बैंक की गवर्नर चिया सेरे और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधि शामिल हुए।

बयान में कहा गया है कि इस कार्यक्रम के साथ ही दोनों देशों के बीच बाकोंग के केएचक्‍यूआर (कंबोडिया का नेशनल क्‍यूआर कोड) के जरिए क्रॉस-बॉर्डर क्‍यूआर पेमेंट लिंक स्थापित करने का पहला चरण पूरा हो गया।

पहला चरण लाखों भारतीय यात्रियों को 45 लाख से ज्‍यादा कंबोडियाई व्यापारियों के यहां आसानी से क्‍यूआर पेमेंट करने की सुविधा देता है और इसके बाद टू-वे (दोनों तरफ से) कॉरिडोर शुरू होगा।

हालांकि पहले चरण में फ्रांस आने वाले भारतीय यात्रियों को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन इस साझेदारी को बड़े पैमाने पर विस्तार देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अगले चरण में, यह कॉरिडोर पूरी तरह से टू-वे (दोनों तरफ से काम करने वाला) हो जाएगा।

भारत आने वाले कंबोडिया के नागरिक जल्द ही अपने घरेलू बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट ऐप्स का इस्तेमाल करके पूरे भारत में लाखों यूपीआई क्‍यूआर कोड स्कैन कर सकेंगे, जिससे एक बेहद एडवांस्ड, टू-वे इंटरऑपरेबल फाइनेंशियल नेटवर्क पूरा हो जाएगा।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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19वां एमआईएफएफ : ओपन फोरम चर्चा में विशेषज्ञों ने कहा, 'एआई रचनात्मकता बढ़ाने का साधन, विकल्प नहीं'

मुंबई, 16 जून (आईएएनएस)। 19वें मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) के दौरान भारतीय वृत्तचित्र फिल्मकार संघ (इंडियन डॉक्यूमेंट्री प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन) ने क्या एआई रचनात्मकता का भविष्य है? विषय पर ओपन फोरम आयोजित किया।

इस सत्र में फायरफ्लाई क्रिएटिव स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक सनत पीसी, सोसाइटी ऑफ मोशन पिक्चर एंड टेलीविजन इंजीनियर्स (एसएमपीटीई) के अध्यक्ष उज्ज्वल निर्गुडकर, अधिवक्ता हेतल देसाई सोलिया और फिल्मकार सुबोध मेनन ने फिल्म निर्माण और कंटेंट क्रिएशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अवसरों, चुनौतियों और प्रभावों पर चर्चा की।

परिचर्चा में क्रिएटिव इकोसिस्टम में एआई की बढ़ती भूमिका पर विचार किया गया। प्रतिभागियों ने कहानी कहने की कला, फिल्म निर्माण प्रक्रियाओं और फिल्म उद्योग के भविष्य पर इसके प्रभावों का विश्लेषण किया। प्रतिभागियों ने एआई की परिवर्तनकारी क्षमता स्वीकार करते हुए इस बात पर जोर दिया कि कहानी कहने की कला के मूल में मानव रचनात्मकता और भावनात्मक बुद्धिमत्ता की भूमिका आज भी सबसे महत्वपूर्ण है।

सिनेमा के तकनीकी विकास की चर्चा करते हुए, उज्ज्वल निर्गुडकर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को फिल्म निर्माण की अगली स्वाभाविक अवस्था बताया। उन्होंने पोस्ट-प्रोडक्शन में इसकी बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया, जिसमें साउंड की गुणवत्ता में सुधार, कलर करेक्शन, दृश्य गुणवत्ता को बेहतर बनाना तथा फिल्म रेस्टोरेशन शामिल है। उन्होंने कहा कि एआई टूल्स तेजी से विकसित हो रहे हैं, फिर भी उद्योग को इनके मानकीकरण और व्यापक रूप से अपनाने में समय लगेगा।

फैनबॉय पिक्चर्स के निर्देशक और फिल्मकार सुबोध मेनन ने जोर देकर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंटेंट तैयार कर सकता है और विचार-मंथन में सहायता कर सकता है, लेकिन कहानी कहने की कला मूल रूप से मानवीय ही रहती है। उन्होंने एआई को नए विचार उत्पन्न करने और उनकी पुष्टि करने का एक मूल्यवान उपकरण बताया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे यह तकनीक व्यापक रूप से अपनाई जाएगी, फिल्म निर्माताओं के लिए एआई की समझ और महत्वपूर्ण होगी।

फायरफ्लाई क्रिएटिव स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक सनत पीसी ने कहा कि एआई कहानी कहने की प्रक्रिया बेहतर बना सकता है, क्योंकि यह चित्रों की गुणवत्ता, ध्वनि और दर्शकों के अनुभव में सुधार लाने में सक्षम है। उन्होंने वर्तमान समय को प्रयोगात्मक दौर बताते हुए कहा कि रचनाकारों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की संभावनाओं का पता लगाना चाहिए, लेकिन इस पर पूर्ण रूप से निर्भर होने के बजाय इसे एक सहायक उपकरण के तौर पर इस्तेमाल करना चाहिए।

एआई-जनित सामग्री के कानूनी पहलुओं पर चर्चा करते हुए अधिवक्ता हेतल देसाई सोलिया ने लाइसेंस प्राप्त डेटा के उपयोग और रचनात्मक कार्यों में पर्याप्त मानवीय भागीदारी सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कॉपीराइट स्वामित्व मानव रचनाकारों के पास ही रहता है। उन्होंने फिल्मकारों को सलाह दी कि वे एआई का उपयोग मौलिक सामग्री प्रतिस्थापित करने के बजाय उसे बेहतर बनाने के लिए करें।

पैनल परिचर्चा में सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि एआई को मानव रचनात्मकता का विकल्प नहीं, बल्कि उसका पूरक और एक शक्तिशाली सहयोगी मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई निर्माण प्रक्रियाओं को सरल बना सकता है, कार्यकुशलता बढ़ा सकता है और रचनात्मक संभावनाओं का विस्तार कर सकता है, लेकिन कहानी कहने का वास्तविक सार मानव कल्पना, भावनाओं और कलात्मक दृष्टि में ही निहित है।

परिचर्चा के बाद श्रोताओं के साथ एक रोचक संवाद सत्र में प्रतिभागियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपनाने, इससे संबंधित नैतिक चिंताओं, कॉपीराइट संरक्षण और रचनात्मक व्यवसायों के भविष्य से जुड़े विभिन्न प्रश्नों पर विचार-विमर्श किया।

सत्र का समापन सर्वसम्मति से हुआ कि फिल्मकारों को तकनीकी बदलाव अवश्य अपनाने चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कहानी कहने की प्रक्रिया के केंद्र में मानव रचनात्मकता बनी रहे।

--आईएएनएस

एबीएम/

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