Tuesday Gold Rate : सोने की कीमतों में फिर बदलाव, जानिए 16 जून का 10 ग्राम का ताजा भाव
अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की पुष्टि होने के बाद 16 जून 2026 को भारतीय सराफा बाजार में हलचल देखने को मिली है। मंगलवार को सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया यानी एमसीएक्स पर 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव मामूली 1,51,420 से 1,53,830 रुपए प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर रहा है।
वहीं, आभूषण बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने की कीमत देश के अधिकांश हिस्सों में लगभग 1,38,900 रुपये से 1,40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बनी हुई है। औद्योगिक मांग में कमी और वैश्विक स्तर पर हाजिर चांदी में आई कमजोरी के कारण चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है। चांदी लगभग 2,50,400 रुपये से 2,51,400 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड कर रही है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों और शहरों में स्थानीय करों और परिवहन लागत के कारण खुदरा चांदी का भाव अब भी 2,65,100 रुपये प्रति किलोग्राम तक बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना बढ़त के साथ 4,330 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया है, वहीं चांदी भी मजबूत होकर 69 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार कर रही है।अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते और संघर्ष विराम की खबरों से वैश्विक बाजारों में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) के दामों में नरमी देखी गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड टूटकर 82-83 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड (WTI) 80 डॉलर के नीचे आ गया है। कच्चे तेल की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट से वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव कम हुआ है, जिससे अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में भी नरमी देखी गई है।
इस घटनाक्रम से केंद्रीय बैंकों द्वारा आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) की इस सप्ताह होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले निवेशक सतर्क हो गए हैं । अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते के आधिकारिक हस्ताक्षर पर भी नजर बनाए हुए हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम और डॉलर इंडेक्स की चाल ही सोने-चांदी की अगली दिशा तय करेगी।
ध्यान रहे कि ऊपर दिए गए सोने-चांदी के भावों में राज्यों के जीएसटी (GST) मेकिंग चार्ज और स्थानीय राज्य कर शामिल नहीं हैं, इसलिए राज्यवार खुदरा दुकान पर अंतिम रेट अलग हो सकते हैं। स्थानीय टैक्स, परिवहन लागत और ज्वेलर्स के मेकिंग चार्ज के कारण अलग-अलग शहरों में कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल सकता है। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है इसे निवेश की सलाह ना मानें। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या बाजार विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
राजस्थान में छपे विज्ञापन को लेकर MP की सियासत गरमाई, जीतू पटवारी ने जल संकट को लेकर सरकार से किए सवाल
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पड़ोसी राज्य राजस्थान में पेयजल आपूर्ति बंद होने की चेतावनी को लेकर एमपी की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के अखबारों में आज एक चेतावनी भरा विज्ञापन छपा है जिसमें जल आपूर्ति से जुड़े संवेदक लिख रहे हैं- “हम पानी बंद नहीं करना चाहते…हम सिर्फ अपना हक चाहते हैं!”
उन्होंने विज्ञापन के हवाले से बताया कि 35 महीनों से बकाया भुगतान नहीं मिलने के कारण राजस्थान के जलदाय विभाग के संवेदकों ने 17 जून सुबह 10 बजे से पेयजल आपूर्ति बंद करने का फैसला लिया है, जिससे पूरे राज्य में पेयजल संकट गहराने की आशंका है। कांग्रेस नेता ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि इस घटना को सिर्फ राजस्थान की समस्या मानकर नजरअंदाज न करें।
जीतू पटवारी ने पेयजल की स्थिति को लेकर सरकार को घेरा
राजस्थान में पेयजल आपूर्ति से जुड़े संवेदकों द्वारा लंबित भुगतान और संभावित जल आपूर्ति बंदी को लेकर प्रकाशित विज्ञापन को लेकर मध्यप्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस घटनाक्रम को चेतावनी बताते हुए प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के अखबारों में प्रकाशित विज्ञापन सिर्फ एक राज्य की समस्या नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक संकेत है कि यदि समय रहते भुगतान, रखरखाव और योजनाओं की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया तो जल संकट गहरा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में भी कई स्तरों पर पेयजल व्यवस्था कमजोर होती जा रही है और सरकार सिर्फ घोषणाओं तक सीमित है।
सरकार से किए सवाल
जीतू पटवारी कहा है कि गांवों में पानी की किल्लत, शहरों में पाइपलाइन की समस्या, नर्मदा आधारित योजनाओं की धीमी गति, विंध्य और बुंदेलखंड में जल संकट तथा मालवा में गिरता भूजल स्तर गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि कितनी पेयजल योजनाएं लंबित हैं, कितने भुगतान अटके हुए हैं और अगले तीन वर्षों के लिए सरकार की ठोस जल नीति क्या है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में छपा विज्ञापन मध्यप्रदेश सरकार के लिए एक “आईना” है जो बताता है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए तो जल संकट और गहरा सकता है।




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