अमेरिका में मिलने वाले प्रति घंटा वेतन में गिरावट जारी:मध्यम वर्ग की आय धीमी गति से बढ़ रही, एआई से भी बढ़ी समस्या
अमेरिकी अर्थव्यवस्था इस समय एक विरोधाभास से गुजर रही है, जहां एक ओर अरबपतियों की संपत्ति नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है, वहीं आम वर्कर्स बढ़ती महंगाई और भविष्य की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। पिछले सप्ताह इसकी झलक दो घटनाओं में दिखाई दी। बुधवार को लेबर ब्यूरो ने बताया कि ऊर्जा कीमतों(बिजली, पेट्रोल, गैस, डीजल) में बढ़ोतरी ने औसत अमेरिकी कर्मचारी की पिछले डेढ़ साल की वास्तविक वेतन वृद्धि लगभग खत्म कर दी। वहीं शुक्रवार को स्पेसएक्स के आईपीओ के बाद इलॉन मस्क दुनिया के पहले खरबपति बन गए। अर्थशास्त्रियों गैब्रियल जकमैन और इमैनुएलसाएज के अनुसार, 19वीं सदी के उत्तरार्ध के तथाकथित "गिल्डेड एज' में सबसे अमीर अमेरिकियों की संपत्ति देश के वार्षिक आर्थिक उत्पादन के लगभग 3% के बराबर थी। आज अमेरिका के शीर्ष 0.00001% यानी लगभग 20 लोगों की संपत्ति राष्ट्रीय उत्पादन (अमेरिकी कंपनियों द्वारा अमेरिका और अन्य देशों में सालाना किया जाने वाला उत्पादन ) के 12% तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी इतिहास में शीर्ष स्तर पर संपत्ति का इतना बड़ा केंद्रीकरण पहले कभी नहीं देखा गया। हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर स्टीफेनी स्टेंटचेवा केअनुसार, शेयर बाजार में लगातार उछाल ने लोगों में यह भावना पैदा की है कि आर्थिक व्यवस्था कुछ चुनिंदा लोगों के लिए अधिक काम कर रही है। हालांकि आधे से अधिक अमेरिकी परिवार प्रत्यक्ष रूप से या रिटायरमेंट फंड के माध्यम से शेयर बाजार में निवेश रखते हैं और उन्हें भी लाभ मिला है, लेकिन फेडरल रिजर्व के आंकड़े बताते हैं कि पिछले दशक में मध्यम वर्ग की संपत्ति अमीरों की तुलना में कहीं धीमी गति से बढ़ी है। ईरान से जुड़े तनाव और ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण मई में अमेरिका की मुद्रास्फीति तीन वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। महंगाई को समायोजित करने के बाद प्रति घंटे मिलने वाला वास्तविक वेतन लगातार तीन महीनों से घट रहा है। नतीजतन, ट्रम्प के मौजूदा कार्यकाल के शुरुआती दौर में हुई वेतनवृद्धि का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया है। अमेरिकी परिवार पहले ही कोविड-19 महामारी,चार दशक की सबसे ऊंची महंगाई, ऊंची ब्याज दरों, टैरिफ और मंदी की आशंकाओं का सामना कर चुके हैं। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई) एक नई चिंता बनकर उभरा है। कई तकनीकी कंपनियों के प्रमुख चेतावनी दे चुके हैं कि एआई आने वाले वर्षों में अनेक श्रेणियों की नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। कोलंबिया बिजनेस स्कूल के अर्थशास्त्री ग्लेन हबार्ड का कहना है कि जब तकनीकी कंपनियां स्वयं यह संदेश देती हैं कि उनकी तकनीक लोगों की नौकरियां खत्म कर सकती है, तो उसके खिलाफ प्रतिक्रिया स्वाभाविक है। इसी वजह से अमेरिका में आर्थिक असमानता, सुपररिच वर्ग के बढ़ते प्रभाव और आम लोगों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर बहस पहले से अधिक तेज हो गई है। महंगाई बढ़ने के साथ कमाई घटी - अमेरिका में महामारी के बाद महंगाई चार दशक में सबसे अधिक हो गई । - राष्ट्रीय आय में वर्कर्स के हिस्से में लगातार गिरावट। - अमीरों की तुलना में मध्यमवर्ग की संपत्ति में बढ़ोतरी की गति धीमी। - लंबे समय तक महंगाई रहने से कंज्यूमर खर्च से बचते हैं। - प्रति घंटा वेतनों में तीन माह से गिरावट जारी। एआई कंपनियों के कई बड़े आईपीओ आएंगे टेक कंपनियों को अभी हाल में शेयर मार्केट की तेजी से फायदा हुआ है। स्पेसएक्स के बाद एआई कंपनियों के बड़े-बड़े आईपीओ की श्रृंखला आ सकती है। महंगाई और आय में गिरावट की चिंता के बीच एआई में उछाल से लोगों का अमीरों की संपत्ति में बढ़ोतरी से असहज होना असामान्य नहीं है। कम आय वालों को करना पड़ रहा संघर्ष अर्थशास्त्रियों के अनुसार महंगाई के दौर से कंज्यूमर का आर्थिक व्यवहार लंबे समय तक प्रभावित रहता है। यह उनके बजट पर बोझ के साथ अनुचित भी है, क्योंकि अमीर लोग तो महंगाई का सामना अपेक्षाकृत आसानी से कर लेते हैं जबकि कम आय वाले परिवारों को संघर्ष करना पड़ता है। कई अमेरिकी राज्यों में डेटा सेंटरों का विरोध सर्वेक्षणों के अनुसार कई वर्कर्स करिअर पर एआई टेक्नोलॉजी के पड़ने वाले प्रभाव के बारे में चिंतित हैं। अमेरिका के कई राज्यों में वोटर अपने इलाके में डेटा सेंटरों के निर्माण पर विरोध जता चुके हैं। वे अपने बिजली के बिल, पानी सप्लाई और हवा की क्वालिटी पर इसके असर की बात कह रहे हैं।
Tuesday Gold Rate : सोने की कीमतों में फिर बदलाव, जानिए 16 जून का 10 ग्राम का ताजा भाव
अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की पुष्टि होने के बाद 16 जून 2026 को भारतीय सराफा बाजार में हलचल देखने को मिली है। मंगलवार को सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया यानी एमसीएक्स पर 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव मामूली 1,51,420 से 1,53,830 रुपए प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर रहा है।
वहीं, आभूषण बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने की कीमत देश के अधिकांश हिस्सों में लगभग 1,38,900 रुपये से 1,40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बनी हुई है। औद्योगिक मांग में कमी और वैश्विक स्तर पर हाजिर चांदी में आई कमजोरी के कारण चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है। चांदी लगभग 2,50,400 रुपये से 2,51,400 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड कर रही है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों और शहरों में स्थानीय करों और परिवहन लागत के कारण खुदरा चांदी का भाव अब भी 2,65,100 रुपये प्रति किलोग्राम तक बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना बढ़त के साथ 4,330 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया है, वहीं चांदी भी मजबूत होकर 69 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार कर रही है।अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते और संघर्ष विराम की खबरों से वैश्विक बाजारों में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) के दामों में नरमी देखी गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड टूटकर 82-83 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड (WTI) 80 डॉलर के नीचे आ गया है। कच्चे तेल की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट से वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव कम हुआ है, जिससे अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में भी नरमी देखी गई है।
इस घटनाक्रम से केंद्रीय बैंकों द्वारा आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) की इस सप्ताह होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले निवेशक सतर्क हो गए हैं । अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते के आधिकारिक हस्ताक्षर पर भी नजर बनाए हुए हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम और डॉलर इंडेक्स की चाल ही सोने-चांदी की अगली दिशा तय करेगी।
ध्यान रहे कि ऊपर दिए गए सोने-चांदी के भावों में राज्यों के जीएसटी (GST) मेकिंग चार्ज और स्थानीय राज्य कर शामिल नहीं हैं, इसलिए राज्यवार खुदरा दुकान पर अंतिम रेट अलग हो सकते हैं। स्थानीय टैक्स, परिवहन लागत और ज्वेलर्स के मेकिंग चार्ज के कारण अलग-अलग शहरों में कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल सकता है। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है इसे निवेश की सलाह ना मानें। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या बाजार विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
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