लाल किले से PM मोदी का ऐलान, आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार होगा विशाल 'सिविल डिफेंस' नेटवर्क
Civil defence: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक बड़ा विजन पेश किया. उन्होंने देश के भीतर और सीमाओं के पार की चुनौतियों से मजबूती से निपटने के लिए नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों का एक मजबूत नेटवर्क बनाने का आह्वान किया है.
आधुनिक संकटों के लिए स्वयंसेवकों की फौज
प्रधानमंत्री ने देश में एक ऐसे वॉलंटरी फोर्स (स्वयंसेवक बल) की आवश्यकता पर जोर दिया, जो आज के समय की आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का डटकर सामना कर सके. अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, "मैं आज लाल किले से यह घोषणा करता हूं कि आने वाले समय में हम एक जीवंत सिविल डिफेंस नेटवर्क की स्थापना करेंगे. हम अपने नागरिकों को आधुनिक तकनीकों और प्रणालियों से जोड़ेंगे. आज के युग के संकटों से नागरिकों को बचाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं, इस पर काम होगा. हम एक ऐसी विशाल और आधुनिक नागरिक सुरक्षा फोर्स तैयार करने जा रहे हैं, जो समकालीन चुनौतियों को मात देने में पूरी तरह सक्षम होगी."
क्या है सिविल डिफेंस (नागरिक सुरक्षा)?
भारत के 'नागरिक सुरक्षा अधिनियम' के तहत बनाए गए 1968 के नियमों के मुताबिक, सिविल डिफेंस का मुख्य काम किसी भी आपात स्थिति या बाहरी हमले के दौरान आम नागरिकों, संपत्तियों और जरूरी बुनियादी ढांचों की हिफाजत करना है. इसके तहत केंद्र और राज्य सरकारों को किसी भी संकट से पहले, उस दौरान और उसके बाद एहतियाती, सुरक्षात्मक और नियंत्रण के कदम उठाने का अधिकार मिलता है. इसका उद्देश्य जान-माल के नुकसान को कम करना और राहत कार्यों में मदद करना है. प्रधानमंत्री की इस नई पहल से राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आम नागरिकों की तैयारियों को भी एक नई दिशा मिलेगी.
भारत को सिर्फ 'बाजार' नहीं, 'ग्लोबल सप्लायर' बनना है
अपने भाषण में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत को अब दुनिया की बड़ी रक्षा कंपनियों के लिए केवल एक उपभोक्ता बाजार बनकर नहीं रहना है. उन्होंने स्पष्ट किया, "रक्षा क्षेत्र में हमारा आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है. जब दुनिया केवल अपने हितों के बारे में सोच रही है, तब हम केवल एक बाजार तक सीमित नहीं रह सकते. हमें रक्षा उपकरणों का वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनना ही होगा और हाइपरसोनिक रक्षा तकनीकों में दुनिया का नेतृत्व करना होगा."
रक्षा उत्पादन और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि
सरकारी आंकड़े प्रधानमंत्री के विजन की गवाही देते हैं, जहां साल 2014 में देश का रक्षा उत्पादन सिर्फ 46,000 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में यह बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. वहीं, रक्षा निर्यात इसी तरह, FY26 में देश का रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया है. सैन्य आधुनिकीकरण देश की सेनाओं को आधुनिक बनाने के लिए तेजी से काम हो रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, बीते एक साल में ही सशस्त्र बलों के लिए 8.75 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की सैन्य परियोजनाओं को सरकार की ओर से हरी झंडी दी जा चुकी है.
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पेट्रोल-डीजल और एटीएफ के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में कटौती:पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी जीरो हुई, डीजल पर ₹24 और ATF पर ₹19.5 लीटर लगेगी
केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन यानी ATF के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती की है। नई दरें 14 अगस्त से लागू हो गई हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल एक्सपोर्ट पर टैक्स को पूरी तरह खत्म यानी ‘जीरो’ कर दिया गया है, जबकि डीजल और जेट फ्यूल पर शुल्क में राहत दी गई है। किस ईंधन पर कितनी कटौती हुई डीजल के एक्सपोर्ट पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क यानी SAED को 25.5 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 24 रुपए प्रति लीटर कर दिया है। इसी तरह ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को 22 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 19.5 रुपए प्रति लीटर तय किया गया है। सबसे बड़ी राहत पेट्रोल एक्सपोर्ट पर मिली है। 3 अगस्त को लगाए गए 3.5 रुपए प्रति लीटर के टैक्स को अब घटाकर जीरो कर दिया गया है। घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर होगा? वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि देश के भीतर आम उपभोक्ताओं के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल की मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। घरेलू बाजार में फ्यूल की कीमतें पहले की तरह बनी रहेंगी। यह फैसला केवल विदेशों में फ्यूल एक्सपोर्ट करने वाली रिफाइनरीज और कंपनियों के लिए लागू होगा। विंडफॉल टैक्स क्या है और इसे क्यों लगाया गया था? मिडल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई थीं। इस दौरान भारतीय ऑयल रिफाइनिंग कंपनियां घरेलू बाजार में आपूर्ति करने की बजाय विदेशी बाजारों में महंगे दामों पर तेल बेचकर मुनाफा कमा रही थीं। इसी मुनाफे को कंट्रोल करने और देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने पहली बार 27 मार्च को डीजल और ATF के एक्सपोर्ट पर टैक्स लगाया था। इसके बाद 16 मई से पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर भी यह टैक्स लागू किया गया था। 15 दिन में होती है समीक्षा सरकार हर 14-15 दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन का आकलन करती है। अगर ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल और रिफाइनिंग मार्जिन में नरमी आती है, तो विंडफॉल टैक्स घटा दिया जाता है।
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