गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच चंदौली में अलर्ट, बाढ़ से पहले मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने खुद संभाला मोर्चा
चंदौली में बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने मारुफपुर बाढ़ चौकी और गंगा घाट का औचक निरीक्षण किया. उन्होंने ग्रामीणों से संवाद कर राहत सामग्री और सुरक्षा का पूरा भरोसा दिलाया.
Hariyali Teej Vrat Katha: आज हरियाली तीज का व्रत रखा जा रहा है, इस व्रत कथा का पाठ जरूर करें
Hariyali Teej Vrat Katha: आज 15 अगस्त 2026 को तीद का व्रत रखा जा रहा है. इस व्रत को सुहागिन महिलाएं रखती हैं. पंचांग के अनुसार, हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हरियाली तीज का व्रत रखा जाता है और पूजा-पाठ किया जाता है. इस बार 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस पर ही इस व्रत को किया जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना हेतु व्रत रखा जाता है. कुंवारी कन्याएं भी आज के दिन भगवान शिव और पार्वती माता की पूजा करते हैं ताकि मनचाहा वर प्राप्त कर सके. आज के दिन शिव पूजन के साथ चालीसा का पाठ, आरती और कथा का पाठ करें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज देवी पार्वती की तपस्या करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं. आइए जानते हैं 15 अगस्त को मनाई जाने वाली हरियाली तीज की व्रत कथा के बारे में.
हरियाली तीज व्रत कथा
शिव महापुराण के अनुसार, प्राचीन समय की बात है. जब माता सती ने जब अपने पिता दक्ष द्वारा भगवान शिव का अपमान होते देखा, तो उन्होंने क्रोध और दुख में अपने प्राण त्याग दिए थे. इसके बाद भगवान शिव गहरे शोक में चले गए और वर्षों तक समाधि में लीन हो गए. धीरे-धीरे समय बीता. माता सती जी ने हिमालय राज की पुत्री पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया. इस जन्म में भी उनका उद्देश्य सिर्फ एक था भगवान शिव को अपने पति रूप में प्राप्त करना.
पार्वती मां ने बचपन से ही शिव को पति माना था
पार्वती मां ने बाल्यकाल से ही शिव को अपना स्वामी मान लिया था. जब वे युवा हुईं, तो उन्होंने कठोर तपस्या शुरू की. उन्होंने कई सालों तक पर्वतों की गुफाओं में, जंगलों में और तपोवनों में गर्मी, सर्दी, बारिश की परवाह किए बिना घोर तप किया. बारिशों के समय, जब चारों ओर हरियाली छा जाती थी, जब वृक्ष, लताएं और फूल प्रकृति की सुंदरता को निखारते थे तब भी माता पार्वती अपने लक्ष्य में अडिग थीं.
कठोर तप कर पाया शिव को
उन्होंने सावन की हरियाली में भी तपस्या नहीं छोड़ी. वर्षा ऋतु में की गई उनकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर यह दिन हरियाली तीज कहलाया. उनकी इस कठोर तपस्या से देवता भी प्रभावित हो गए. देवर्षि नारद ने भगवान शिव से माता पार्वती के भाव और समर्पण के बारे में बताया. परंतु भगवान शिव ने उन्हें परखने का निर्णय लिया. इसके बाद भगवान शिव एक वृद्ध ब्राह्मण का रूप लेकर माता पार्वती के पास गए और बोले- हे कन्या, तुम इतनी कठिन तपस्या क्यों कर रही हो? जिसे तुम वर रूप में पाना चाहती हो, वह शिव तो श्मशान में रहने वाला है, भस्म धारण करने वाला है और सर्पों का हार पहनता है. वह कैसे तुम्हारे योग्य है?
भगवान शिव ने ली परीक्षा
तब माता पार्वती मुस्कुराई और भाव से उत्तर दिया कि भगवान शिव बाहरी रूप से चाहे जैसे हों, परंतु वे सृष्टि के मूल हैं. मैं केवल उन्हें ही अपना पति मानती हूं चाहे इसके लिए मुझे कितने भी जन्म क्यों न लेने पड़ें. यह सुनकर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और अपने असली रूप में प्रकट होकर बोले- हे पार्वती तुम्हारा यह प्रेम, तप और भक्ति अतुलनीय है. मैं तुम्हें पत्नी रूप में स्वीकार करता हूं और इस प्रकार शिव और पार्वती का पुनर्मिलन हुआ.
व्रत कथा का सार
इस व्रत का महत्व यह है कि इस व्रत को पूर्ण निष्ठा से रखने वाली स्त्री को भगवान शिव मनोवांछित फल देते हैं. भगवान शिव ने पार्वती से कहा कि इस व्रत को जो भी स्त्री पूर्ण श्रद्धा से करेंगी उसे तुम्हारी तरह अचल सुहाग प्राप्त होगा.
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